आगरा। विधानसभा चुनाव में कोई भी मतदाता डर, धमकी या दबाव के कारण मतदान से वंचित न रहे, इसके लिए आगरा में निर्वाचन तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सूरसदन में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को वल्नरेबिलिटी मैपिंग का प्रशिक्षण दिया गया। संवेदनशील गांवों, बस्तियों और मतदाता समूहों की पहचान कर अधिकारी कम से कम तीन बार क्षेत्र का भ्रमण करेंगे। मतदाताओं को प्रभावित करने वाले व्यक्तियों और तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध निरोधात्मक कार्रवाई की रणनीति भी तैयार की जाएगी।

आगामी विधानसभा निर्वाचन को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को सूरसदन प्रेक्षागृह में वल्नरेबिलिटी मैपिंग को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में हुए प्रशिक्षण में पुलिस अधिकारियों, सेक्टर मजिस्ट्रेट और जोनल मजिस्ट्रेट को निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि चुनाव के दौरान किसी भी मतदाता को डराने-धमकाने, अनुचित दबाव बनाने अथवा बाहुबल के इस्तेमाल से मतदान करने से रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक मतदाता को बिना किसी भय के अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिलना चाहिए।
2007 में शुरू हुई वल्नरेबिलिटी मैपिंग की व्यवस्था
प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनरों ने बताया कि वल्नरेबिलिटी मैपिंग का मुख्य उद्देश्य ऐसे मतदाताओं, क्षेत्रों और व्यक्तियों की पहचान करना है, जिनके कारण निर्वाचन के दौरान मतदान प्रभावित होने की आशंका रहती है। मतदाताओं को डराने-धमकाने, उन पर अनुचित दबाव बनाने और बाहुबल के इस्तेमाल जैसी गतिविधियों को रोकना इसका प्रमुख उद्देश्य है। भारत निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2007 में इस व्यवस्था की शुरुआत की थी। यह व्यवस्था ‘कोई मतदाता पीछे न छूटे’ के सिद्धांत पर आधारित है। इसके तहत प्रत्येक मतदाता को निर्भीक होकर मतदान करने का अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

तीन चरणों में होगी संवेदनशीलता की पहचान
प्रशिक्षण के दौरान वल्नरेबिलिटी मैपिंग के तीन प्रमुख चरणों की विस्तार से जानकारी दी गई। पहले चरण में मतदाताओं, मतदाता वर्गों और गांव-मजरा तथा क्षेत्रवार ऐसे मतदान केंद्रों की पहचान की जाएगी, जहां मतदान प्रभावित होने की आशंका हो। इसमें क्रिटिकल बूथों और संवेदनशील मतदाता समूहों को चिह्नित किया जाएगा।

दूसरे चरण में वल्नरेबिलिटी उत्पन्न करने वाले व्यक्तियों और इसके पीछे के कारणों की पहचान की जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि किन व्यक्तियों, समूहों या परिस्थितियों के कारण मतदाताओं पर दबाव बनाया जा सकता है अथवा उन्हें मतदान से रोका जा सकता है। तीसरे चरण में ऐसे व्यक्तियों और कारणों को ध्यान में रखते हुए पहले से रणनीति तैयार की जाएगी। इसके आधार पर प्रभावी निरोधात्मक उपाय किए जाएंगे, जिससे मतदान के दौरान किसी तरह की बाधा उत्पन्न न हो।

पिछले चुनावों के मतदान प्रतिशत और शिकायतों को भी बनाएंगे आधार
मास्टर ट्रेनरों ने बताया कि वल्नरेबिलिटी मैपिंग के लिए कई महत्वपूर्ण मानदंड निर्धारित किए गए हैं। इनमें पिछले निर्वाचन के मतदान प्रतिशत को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत कम या असामान्य रूप से अधिक रहा है, वहां के कारणों की जांच की जाएगी। इसके अलावा चुनाव से पहले मिलने वाली शिकायतों, आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन, असामाजिक तत्वों के प्रभाव और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जुड़े तथ्यों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

क्षेत्रों में धनबल और बाहुबल के दुरुपयोग की आशंका तथा मतदाताओं को प्रभावित करने वाली अन्य परिस्थितियों का भी आकलन किया जाएगा। इन सभी तथ्यों के आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों और मतदाता समूहों का विवरण तैयार किया जाएगा, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
तीन बार क्षेत्र में जाकर मतदाताओं से करेंगे संवाद
जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी मनीष बंसल ने प्रशिक्षण के दौरान निर्देश दिए कि संबंधित सेक्टर अधिकारी और पुलिस अधिकारी अपने आवंटित क्षेत्रों में वर्तमान तथा पिछले निर्वाचन के अभिलेखों, स्थानीय सूचनाओं और क्षेत्रीय भ्रमण के आधार पर वल्नरेबिलिटी मैपिंग की कार्यवाही पूरी करें। संवेदनशील गांवों, बस्तियों और मतदाता समूहों की पहचान कर वल्नरेबिलिटी उत्पन्न करने वाले व्यक्तियों और कारणों का पूरा विवरण निर्धारित प्रारूप में तैयार किया जाए।
उन्होंने कहा कि वल्नरेबिलिटी प्लान केवल औपचारिकता के लिए तैयार नहीं किया जाना चाहिए। यह तर्कसंगत, वास्तविक और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर आधारित होना चाहिए। इसे सेक्टर अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया जाए, ताकि संबंधित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।https://todaynewstrack.com/agra-election-voter-security-vulnerability-mapping-sensitive-areas/
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सेक्टर अधिकारी और सेक्टर पुलिस अधिकारी संयुक्त रूप से अपने क्षेत्रों का भ्रमण करें। संवेदनशील क्षेत्रों में कम से कम तीन बार जाकर स्थानीय मतदाताओं से संवाद स्थापित किया जाए। इस दौरान उनकी समस्याओं और आशंकाओं को समझते हुए यह भरोसा दिलाया जाए कि मतदान के समय उन्हें किसी प्रकार का भय या दबाव नहीं झेलना पड़ेगा। कोई भी मतदाता धमकी अथवा दबाव के कारण मतदान से वंचित न रहे। मतदान केंद्र तक प्रत्येक मतदाता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएं।
डराने-धमकाने वालों की पहचान कर तैयार करें कार्रवाई की रणनीति
मनीष बंसल ने स्पष्ट किया कि वल्नरेबिलिटी मैपिंग का उद्देश्य केवल संवेदनशील गांवों और मतदान केंद्रों की सूची तैयार करना नहीं है, बल्कि उन व्यक्तियों की पहचान करना भी है, जो मतदाताओं को प्रभावित करने या मतदान में बाधा पहुंचाने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई की रणनीति पहले से तैयार की जाए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी आपसी समन्वय से काम करें, जिससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनी रहे और मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
उन्होंने सेक्टर अधिकारियों को सेक्टर मैनेजमेंट प्लान तैयार करने के भी निर्देश दिए। इस योजना में प्रत्येक मतदान केंद्र का रूट मैप, संबंधित अधिकारियों का विवरण, पुलिस स्टेशन की जानकारी, जिम्मेदार व्यक्तियों के नाम और आवश्यक संपर्क नंबर शामिल किए जाएंगे। इससे निर्वाचन के दौरान किसी भी परिस्थिति में संबंधित अधिकारियों से तत्काल संपर्क किया जा सकेगा।
ग्राम प्रधान और बीट पुलिस कर्मियों के साथ करेंगे बैठक
जिलाधिकारी ने संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय ग्राम प्रधान, सरपंच, जनप्रतिनिधियों, बीट पुलिस कर्मियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठकें करने के निर्देश दिए। इन बैठकों के माध्यम से स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जाएगी और मतदाताओं में विश्वास बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी मतदाता को मतदान करने से रोकने अथवा प्रभावित करने की कोशिश न हो।
प्रशिक्षण में मतदाताओं तक निर्वाचन संबंधी जानकारी पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि मतदाताओं को दी जाने वाली वोटर इन्फॉर्मेशन स्लिप के वितरण की निगरानी की जाए, ताकि प्रत्येक पात्र मतदाता तक आवश्यक जानकारी पहुंच सके।
1950 और सी-विजिल एप के प्रति करेंगे जागरूक
प्रशिक्षण में अधिकारियों को 1950 कॉल सेंटर और सी-विजिल एप के संबंध में भी जानकारी दी गई। मतदाताओं को इन माध्यमों के बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए गए, ताकि निर्वाचन से संबंधित किसी भी शिकायत को समय से दर्ज कराया जा सके। मतदाता किसी तरह की गड़बड़ी, दबाव या आचार संहिता के उल्लंघन की जानकारी इन माध्यमों से दे सकें, इसके लिए व्यापक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रशिक्षण में अपर पुलिस आयुक्त सचिन्द्र पटेल, अपर जिलाधिकारी (नगर) एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी यमुनाधर चौहान, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) आजाद भगत सिंह, अपर पुलिस उपायुक्त राजकुमार सिंह और एसडीएम नरेंद्र गंगवार सहित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सेक्टर मजिस्ट्रेट तथा जोनल मजिस्ट्रेट उपस्थित रहे।
