आगरा। पितृ पक्ष के पावन अवसर पर हलवाई की बगीची स्थित प्राचीन श्रीनाथ जी मंदिर में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। शुभम अपार्टमेंट से निकली कलश यात्रा में लाल और पीली साड़ी पहने महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर मंगल गीत गाए। बैंड-बाजों की स्वर लहरियों और भक्तों के नाचते-गाते चलने से वातावरण भक्तिमय हो गया। बग्घी पर विराजमान कथावाचक आचार्य सुभाष चंद्र शास्त्री महाराज श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए चले। मार्ग में आठ स्थानों पर पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया। कथा के पहले दिन महात्म्य कथा और कथा श्रवण के नियम बताए गए। मंगलवार को शुकदेव कथा, भीम स्तुति, परीक्षित जन्म, कपिल देव-आहुति संवाद और सृष्टि क्रम के अध्यायों का व्याख्यान होगा।
पितृ पक्ष के पावन अवसर पर हलवाई की बगीची स्थित प्राचीन श्रीनाथ जी मंदिर में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कलश यात्रा के दौरान भक्ति और आस्था के साथ सनातन संस्कृति की अनुपम छटा दिखाई दी। बैंड-बाजों की स्वर लहरियों के बीच महिलाएं सिर पर कलश धारण कर मंगल गीत गाती हुईं यात्रा में शामिल हुईं। श्रद्धालुओं के नाचते-गाते चलने से पूरे वातावरण में भक्तिमय रंग दिखाई दिया।

कलश यात्रा की शुरुआत हलवाई की बगीची स्थित शुभम अपार्टमेंट से हुई। लाल और पीली साड़ी पहने महिलाओं ने उत्साह के साथ इसमें भाग लिया। सिर पर कलश धारण किए महिलाएं मंगल गीत गाते हुए आगे बढ़ीं। उनके साथ श्रद्धालु भी भक्ति भाव में शामिल हुए। यात्रा आगे बढ़ते हुए हलवाई की बगीची स्थित प्राचीन श्रीनाथ जी मंदिर पहुंची, जहां श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
कलश यात्रा में बग्घी पर कथावाचक आचार्य सुभाष चंद्र शास्त्री महाराज विराजमान रहे। वह श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए यात्रा के साथ चले। यात्रा के मार्ग में आठ स्थानों पर श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। इससे यात्रा के दौरान श्रद्धा और आस्था का वातावरण और गहरा हो गया। कलश यात्रा में धार्मिक उत्साह के साथ सनातन संस्कृति की अनुपम छटा देखने को मिली।
श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के प्रथम दिन कथावाचक आचार्य सुभाष चंद्र शास्त्री महाराज ने कथा स्थल पर महात्म्य कथा और कथा सुनने के नियमों के बारे में बताया। उन्होंने भागवत कथा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। बताया गया कि भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि मानव जीवन को भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और सदाचार की दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी है।
कथा के दौरान भागवत श्रवण के लिए श्रद्धा और एकाग्रता के महत्व को भी बताया गया। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ भागवत कथा का श्रवण करने से मन में सकारात्मक भावों का संचार होता है। साथ ही व्यक्ति को अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की प्रेरणा मिलती है। प्रथम दिन कथा में महात्म्य और कथा श्रवण से जुड़े नियमों की जानकारी श्रद्धालुओं को दी गई।
मुख्य यजमान वंदना सक्सेना ने बताया कि मंगलवार को कथा में शुकदेव कथा, भीम स्तुति, परीक्षित जन्म, कपिल देव-आहुति संवाद और सृष्टि क्रम के अध्यायों का व्याख्यान होगा। इन अध्यायों के माध्यम से श्रद्धालु कथा का श्रवण करेंगे। मंगलवार को होने वाले कार्यक्रम में इन विषयों को कथा के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
श्रीनाथ जी मंदिर पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 4 अक्टूबर तक प्रतिदिन होगा। कथा का समय दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक निर्धारित है। इस दौरान श्रद्धालु प्रतिदिन संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कर पाएंगे। कथा महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन दोपहर दो से छह बजे तक कथा का आयोजन किया जाएगा।
कलश यात्रा से शुरू हुए इस कथा महोत्सव में धार्मिक आस्था और भक्ति के साथ लोगों की भागीदारी देखने को मिली। महिलाओं ने कलश धारण कर मंगल गीतों के साथ यात्रा में सहभागिता की। बैंड-बाजों की स्वर लहरियों के बीच श्रद्धालुओं का नाचते-गाते आगे बढ़ना यात्रा का प्रमुख दृश्य रहा। मार्ग में आठ स्थानों पर पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह और आस्था का भाव दिखाई दिया।
कथा स्थल पर प्रथम दिन आचार्य सुभाष चंद्र शास्त्री महाराज ने महात्म्य कथा और कथा सुनने के नियमों की जानकारी दी। भागवत को मानव जीवन में भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और सदाचार की दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शन बताया गया। श्रद्धा और एकाग्रता से कथा श्रवण करने पर मन में सकारात्मक भावों का संचार होने तथा जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की प्रेरणा मिलने की बात कही गई।
मंगलवार के कार्यक्रम में शुकदेव कथा, भीम स्तुति, परीक्षित जन्म, कपिल देव-आहुति संवाद और सृष्टि क्रम के अध्यायों का व्याख्यान होगा। मुख्य यजमान वंदना सक्सेना ने इसकी जानकारी दी। कथा 4 अक्टूबर तक प्रतिदिन दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक चलेगी। श्रद्धालु इस दौरान संगीतमय कथा का रसपान कर पाएंगे।
इस अवसर पर कुसुम कालरा, विभा सक्सेना, कुसुम कुलश्रेष्ठ, दीपक शर्मा, शालिनी, अंजना, भव्या, ज्योति, करुणा, मिनी, देवेंद्र, सुरेंद्र, सुनील, अजय, संजय और दिनेश आदि मौजूद रहे।
