आगरा। छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में अनंत चतुर्दशी पर 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव का श्रद्धा और उल्लास के साथ समापन हुआ। दिल्ली पब्लिक स्कूल कुंडोल के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने मंदिर पहुंचकर महागणपति के दर्शन किए और सामूहिक प्रार्थना के साथ गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ किया। समापन अवसर पर विशेष महाआरती, महाप्रसाद और आकर्षक विद्युत सज्जा के बीच श्रद्धालुओं ने गणपति की आराधना की। मंदिर में तैयार 101 किलो के मेवा मोदक ने भी बच्चों और श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।
अनंत चतुर्दशी के अवसर पर छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में सुबह से ही धार्मिक वातावरण बना रहा। 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव के अंतिम दिन दिल्ली पब्लिक स्कूल कुंडोल के बच्चों का मंदिर पहुंचना आयोजन का विशेष आकर्षण रहा। विद्यालय के नन्हे श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में पहुंचकर भगवान वरद वल्लभा महागणपति के दर्शन किए। इसके बाद बच्चों ने सामूहिक रूप से प्रार्थना की और गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ किया। बच्चों की सामूहिक उपस्थिति और धार्मिक पाठ से मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया।

मंदिर में भगवान महागणपति का विशेष भव्य श्रृंगार किया गया था। अलग-अलग धार्मिक अवसरों के अनुरूप सजाए गए विग्रह के दर्शन बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। भगवान को विशेष वस्त्र धारण कराए गए थे। इस अवसर पर वस्त्र सेवा धर्मेंद्र अग्रवाल की ओर से की गई। बच्चों ने भगवान के दर्शन के बाद पूजा-अर्चना की और श्रद्धाभाव से प्रार्थना की। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की।
समापन दिवस पर मंदिर में तैयार किया गया 101 किलो का मेवा मोदक भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का विषय रहा। मंदिर की रसोई में शुद्ध मेवा से इस विशाल मोदक को तैयार किया गया। आकार में बड़ा होने के कारण इसे स्वच्छता का ध्यान रखते हुए जालीदार वस्त्र से ढककर रखा गया था। मोदक को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। मंदिर पहुंचे स्कूली बच्चे इसे देखकर उत्साहित नजर आए और विशाल मोदक उनके लिए विशेष कौतूहल का विषय बना रहा। गणपति पूजा में मोदक के धार्मिक महत्व के कारण भी इस विशेष प्रसाद को श्रद्धालुओं ने उत्सुकता से देखा।
मंदिर प्रबंधन की ओर से बच्चों के लिए प्रसादी की व्यवस्था की गई। दर्शन, पूजा और धार्मिक पाठ के बाद बच्चों को प्रसादी वितरित की गई। बच्चों ने प्रसादी ग्रहण की और भगवान गणपति का आशीर्वाद लिया। विद्यालय से आए बच्चों की सहभागिता ने समापन समारोह को अलग स्वरूप दिया। धार्मिक आयोजन में बच्चों की भागीदारी के माध्यम से उन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं और संस्कारों से परिचित कराने का अवसर भी मिला।

महोत्सव के दौरान पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया था। शाम के समय विशेष महाआरती का आयोजन हुआ। इसमें मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान श्री महागणपति की आरती की। आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। महाआरती के बाद मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया। लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और भगवान गणपति से सुख-समृद्धि की कामना की।
12 दिनों तक चले पंचम गणेश महोत्सव के दौरान भगवान श्री वरद वल्लभा महागणपति का प्रतिदिन अलग-अलग स्वरूप में श्रृंगार किया गया। प्रत्येक दिन भगवान को अलग रंग और स्वरूप के वस्त्रों से सजाया गया। स्वर्णाभूषण, तिलक और पुष्प बंगले के माध्यम से विग्रह को अलग-अलग मनोहारी स्वरूप प्रदान किए गए। इन सज्जाओं के दर्शन के लिए महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना जारी रहा। अलग-अलग दिनों में भगवान के विविध स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आकर्षण का केंद्र बने।
मंदिर में दक्षिण भारतीय पूजा पद्धति के अनुरूप विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी कराए गए। इनमें अभिषेक, हवन, सहस्रनाम अर्चना और आरती प्रमुख रहे। पूरे महोत्सव के दौरान धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। प्रतिदिन होने वाले अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों के साथ श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और प्रसादी की व्यवस्था भी जारी रही।
मंदिर के संस्थापक हरिमोहन गर्ग ने कहा कि 12 दिवसीय गणेश महोत्सव का समापन बच्चों की सहभागिता के साथ होना विशेष आनंद का विषय है। बच्चों द्वारा सामूहिक प्रार्थना और गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ धार्मिक संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि बच्चों को धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने वाले ऐसे अवसर उनके संस्कार निर्माण में भूमिका निभाते हैं। उन्होंने महोत्सव को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं और सेवा देने वाले परिवारों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित लखन दीक्षित ने कहा कि अनंत चतुर्दशी भगवान गणपति की आराधना और विदाई का पावन अवसर है। इस दिन श्रद्धालु गणपति की पूजा-अर्चना कर धार्मिक परंपरा के अनुरूप महोत्सव का समापन करते हैं। मंदिर में भी इसी भावना के साथ अंतिम दिन धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए और श्रद्धालुओं ने महागणपति के दर्शन कर आराधना की।
मंदिर के प्रबंधक नितिन शर्मा ने बताया कि 12 दिवसीय महोत्सव के दौरान प्रतिदिन मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूजा, दर्शन और प्रसादी की व्यवस्था की गई। समापन दिवस पर भी दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा गया। शाम को महाआरती और इसके बाद महाप्रसाद की विशेष व्यवस्था रही। उन्होंने बताया कि पूरे महोत्सव में भगवान के अलग-अलग स्वरूपों का श्रृंगार, दक्षिण भारतीय पूजा पद्धति से होने वाले धार्मिक अनुष्ठान और श्रद्धालुओं की सहभागिता आयोजन के प्रमुख हिस्से रहे।
अनंत चतुर्दशी के साथ पंचम गणेश महोत्सव का धार्मिक कार्यक्रम पूर्ण हुआ। अंतिम दिन बच्चों की सहभागिता, सामूहिक अथर्वशीर्ष पाठ, विशेष श्रृंगार, विशाल मेवा मोदक, महाआरती और महाप्रसाद ने मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक वातावरण बनाए रखा। आयोजन में मंदिर प्रबंधन, सेवा देने वाले परिवारों, विद्यालय से आए बच्चों, अभिभावकों और श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।
