आगरा। गोकुलपुरा स्थित प्राचीन सिद्धिविनायक मंदिर में शुक्रवार को 66वें गणेश महोत्सव का समापन गणपति प्रतिमा के विसर्जन के साथ हुआ। इससे पहले मंदिर में लड्डू और दूर्वा से सहस्रार्चन व हवन किया गया तथा भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। शाम को 1008 दीपकों से महाआरती के बाद ढोल-नगाड़ों की थाप पर विसर्जन यात्रा कैलाश घाट पहुंची, जहां विधिवत पूजन के बाद भक्तों ने यमुना में गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया।
गोकुलपुरा स्थित प्राचीन सिद्धिविनायक मंदिर में शुक्रवार को गणेश महोत्सव के समापन अवसर पर सुबह से ही धार्मिक आयोजन हुए। 66वें गणेश महोत्सव के अंतिम दिन मंदिर में श्रद्धालुओं ने गणपति की पूजा-अर्चना की। महोत्सव के समापन को लेकर मंदिर परिसर में भक्तों की मौजूदगी रही। धार्मिक विधि-विधान के साथ दिनभर अलग-अलग कार्यक्रम संपन्न हुए और शाम को गणपति प्रतिमा को विसर्जन के लिए कैलाश घाट ले जाया गया।
समापन अवसर पर सबसे पहले सिद्धिविनायक मंदिर में गणेश जी का लड्डू और दूर्वा के साथ सहस्रार्चन किया गया। इसके बाद हवन का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की। गणपति आराधना के साथ महोत्सव के अंतिम दिन की पूजा संपन्न हुई। मंदिर परिसर में आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में आने वाले भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।
दिनभर के धार्मिक कार्यक्रमों के बाद शाम को गणपति प्रतिमा की महाआरती की गई। विसर्जन यात्रा शुरू होने से पहले 1008 दीपकों से महाआरती हुई। बड़ी संख्या में दीपकों के साथ हुई आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने गणपति की आराधना की। इसके बाद प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने की तैयारी शुरू हुई। महाआरती के बाद मंदिर परिसर से विसर्जन यात्रा निकाली गई।
विसर्जन यात्रा ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच कैलाश घाट के लिए रवाना हुई। यात्रा में गणपति भक्त शामिल रहे। ढोल-नगाड़ों की धुन के बीच श्रद्धालु गणपति प्रतिमा को लेकर कैलाश घाट पहुंचे। इस दौरान गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ… के जयकारे गूंजते रहे। महोत्सव के दौरान गणपति आराधना से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए यह विदाई का भावुक अवसर रहा।
कैलाश घाट पहुंचने के बाद गणपति प्रतिमा के विसर्जन से पहले विधिवत पूजन किया गया। महंत पंडित मनीष शर्मा के सानिध्य में धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न कराई गई। इसके बाद भक्तों ने गणपति प्रतिमा का यमुना नदी में विसर्जन किया। प्रतिमा विसर्जन के समय श्रद्धालुओं ने गणपति से अगले वर्ष फिर आने की कामना की। विसर्जन के साथ ही मंदिर में आयोजित 66वें गणेश महोत्सव का समापन हो गया।
गणेश महोत्सव के अंतिम दिन मंदिर में पूजा-अर्चना से लेकर भंडारे और महाआरती तक धार्मिक आयोजन क्रमवार चलते रहे। लड्डू और दूर्वा के साथ किए गए सहस्रार्चन तथा हवन के बाद श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। शाम को 1008 दीपकों से महाआरती हुई। इसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ प्रतिमा को कैलाश घाट ले जाया गया। वहां पूजन के बाद यमुना नदी में विसर्जन की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की गई।
विसर्जन यात्रा में शामिल भक्तों के लिए गणपति की विदाई भावुक क्षण रही। महोत्सव के समापन पर भक्तों ने नम आंखों से सिद्धिविनायक को विदाई दी। यात्रा के दौरान गूंजते जयकारों के बीच श्रद्धालु गणपति प्रतिमा के साथ कैलाश घाट पहुंचे। विसर्जन के बाद भक्तों ने गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ… के जयकारों के साथ अगले वर्ष फिर गणपति महोत्सव की प्रतीक्षा का भाव व्यक्त किया।
इस अवसर पर पुनीत वर्मा, वैभव शर्मा, यश पंडित, अतुल गौतम, कुणाल गौतम, आशु अग्रवाल, विजय यादव, शत्रुजीत, समर और समीर सहित सैकड़ों गणपति भक्त मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की मौजूदगी में धार्मिक अनुष्ठान और विसर्जन की प्रक्रिया संपन्न हुई। मंदिर में आयोजित भंडारे में भी बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
66वें गणेश महोत्सव के समापन पर मंदिर से कैलाश घाट तक निकली विसर्जन यात्रा आयोजन का अंतिम चरण रही। मंदिर में पूजा, सहस्रार्चन और हवन के बाद श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। शाम को 1008 दीपकों से गणपति प्रतिमा की महाआरती हुई। इसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ भक्त प्रतिमा को लेकर कैलाश घाट पहुंचे। महंत पंडित मनीष शर्मा के सानिध्य में पूजन के बाद प्रतिमा को यमुना नदी में विसर्जित किया गया। इसी के साथ प्राचीन सिद्धिविनायक मंदिर का 66वां गणेश महोत्सव धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।
