आगरा। ताजमहल और उसके आसपास के पर्यावरणीय संवेदनशील टीटीजेड क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना और विस्तार को लेकर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। 23 जुलाई को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के अनुपालन में गुरुवार को मंडल आयुक्त डॉ. नगेंद्र प्रताप की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें उद्योगों से जुड़े आवेदनों की जांच प्रक्रिया को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में तय किया गया कि अब किसी भी उद्योग को अनापत्ति या अनुमति देने से पहले उसके दस्तावेजों की गहन जांच के साथ मौके पर भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा।

बैठक में जिलाधिकारी डॉ. मनीष बंसल, आगरा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष डॉ. एम. अरून्मौली, उपायुक्त उद्योग डॉ. शैलेंद्र सिंह तथा क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा करते हुए यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि टीटीजेड क्षेत्र में पर्यावरणीय मानकों से कोई समझौता न हो।
चर्चा के बाद मंडल आयुक्त डॉ. नगेंद्र प्रताप ने निर्देश दिए कि संबंधित उपजिलाधिकारी, उपायुक्त उद्योग और क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तीन सदस्यीय समिति गठित की जाए। यह समिति उद्योग स्थापना और विस्तार से संबंधित प्राप्त प्रत्येक आवेदन का विस्तृत परीक्षण करेगी। समिति यह देखेगी कि प्रस्तावित उद्योग किस भूमि उपयोग क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है, उसकी औद्योगिक श्रेणी क्या है, वायु प्रदूषण का संभावित स्तर कितना है और पर्यावरणीय अनापत्ति से जुड़े सभी प्रपत्र पूर्ण हैं या नहीं।
मंडल आयुक्त ने स्पष्ट किया कि केवल कागजी जांच पर्याप्त नहीं मानी जाएगी। समिति संबंधित स्थल का भौतिक सत्यापन भी करेगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आवेदन में दी गई जानकारी वास्तविक स्थिति से मेल खाती है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त अभिलेख भी मांगे जा सकेंगे।
बैठक में अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि टीटीजेड क्षेत्र देश के सबसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों में शामिल है और यहां उद्योगों की स्थापना या विस्तार के मामलों में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। वायु प्रदूषण स्कोर, उद्योग की श्रेणी और पर्यावरणीय प्रभाव का वैज्ञानिक आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि ताजमहल सहित क्षेत्र की पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अब जांच प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक कठोर होगी और बिना संतोषजनक परीक्षण के किसी भी आवेदन पर आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। बैठक में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की संयुक्त जिम्मेदारी है।
बैठक के अंत में मंडल आयुक्त डॉ. नगेंद्र प्रताप ने सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए और कहा कि पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखते हुए ही निर्णय लिए जाएं, ताकि टीटीजेड क्षेत्र की संवेदनशीलता और न्यायालय के निर्देशों दोनों का सम्मान बना रहे।
