आगरा। प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े करीब 7.50 लाख शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारों को बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा देते हुए मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ किया गया। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने योजना की शुरुआत करते हुए इसे शिक्षकों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया।

योजना के तहत शिक्षकों को सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक कैशलेस उपचार मिलेगा, जबकि सरकारी अस्पतालों में इलाज की राशि पर कोई सीमा लागू नहीं होगी। स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से मिलने वाली इस सुविधा के साथ दुर्घटना बीमा, अस्पताल में भर्ती होने पर आर्थिक सहायता और अन्य स्वास्थ्य सुरक्षा लाभ भी उपलब्ध कराए जाएंगे। कार्यक्रम में पंजाब नेशनल बैंक के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और लाभार्थी शिक्षकों को स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित शिवाजी मंडपम रविवार को प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण फैसले का साक्षी बना। यहां मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का विधिवत शुभारंभ किया गया, जिसके माध्यम से राज्य विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों तथा स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारों को व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने योजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ शिक्षकों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। उनका कहना था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाले शिक्षक तभी पूरी क्षमता से कार्य कर पाएंगे, जब उन्हें और उनके परिवार को स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से मुक्ति मिलेगी।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों और प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने अलग-अलग विश्वविद्यालयों में चल रहे शोध, नवाचार, तकनीकी प्रयोग और शैक्षणिक उपलब्धियों की जानकारी ली तथा शिक्षकों और विद्यार्थियों से संवाद भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि नवाचार, शोध और समाज परिवर्तन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षा विभाग और पंजाब नेशनल बैंक के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत शिक्षकों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाएंगे, जिनके माध्यम से वे सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक कैशलेस उपचार का लाभ उठा सकेंगे। सरकारी अस्पतालों में इलाज की राशि पर कोई सीमा नहीं होगी। योजना का लाभ शिक्षकों के साथ उनके सभी आश्रित परिवारजनों को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप से लाभार्थी शिक्षकों को स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए और योजना पर आधारित लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पहले ही बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के लगभग 60 लाख शिक्षकों एवं उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर चुकी है। अब उच्च शिक्षा विभाग के लगभग 7.50 लाख शिक्षकों को इस व्यवस्था से जोड़कर सरकार ने शिक्षा जगत के एक बड़े वर्ग को सुरक्षा कवच प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है कि कोई भी शिक्षक आर्थिक अभाव के कारण बेहतर इलाज से वंचित न रहे। योजना के अंतर्गत कैशलेस उपचार के अलावा दुर्घटना की स्थिति में बीमा लाभ, अस्पताल में भर्ती होने पर आर्थिक सहायता और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भविष्य में स्ववित्तपोषित एवं निजी विश्वविद्यालयों के शिक्षकों को भी इस योजना से जोड़ने की दिशा में गंभीरता से विचार करेगी। साथ ही विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षणोत्तर कर्मचारियों को भी योजना के दायरे में लाने की आवश्यकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस दिशा में भी सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, ताकि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक कर्मचारी को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिल सके।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है। जब दुनिया का बड़ा हिस्सा अज्ञान के अंधकार में था, तब भारत तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों के माध्यम से पूरे विश्व को ज्ञान का प्रकाश दे रहा था। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करता है, उनमें संस्कार विकसित करता है और राष्ट्र के भविष्य को दिशा देता है। इसलिए शिक्षकों का सम्मान और उनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने प्रसिद्ध वैद्य जीवक का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके गुरु ने उन्हें ऐसी वनस्पति खोजने का दायित्व दिया था जिसमें औषधीय गुण न हों। लंबे अध्ययन के बाद जीवक इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि प्रकृति की प्रत्येक वनस्पति किसी न किसी रूप में औषधीय गुणों से युक्त है। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री ने संस्कृत का प्रसिद्ध श्लोक अमंत्रमक्षरं नास्ति, नास्ति मूलमनौषधम्, अयोग्यः पुरुषो नास्ति, योजकस्तत्र दुर्लभः उद्धृत करते हुए कहा कि संसार में कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, आवश्यकता केवल ऐसे शिक्षक और मार्गदर्शक की होती है जो उसकी प्रतिभा को पहचानकर सही दिशा दे सके। उन्होंने कहा कि यही शिक्षक की सबसे बड़ी भूमिका है और यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर के समान सम्मान दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में अध्ययन, शोध और जिज्ञासा विकसित करना भी शिक्षकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समय के साथ पढ़ने की संस्कृति कमजोर होती जा रही है। पहले विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों के साथ समाचार-पत्र, संदर्भ ग्रंथ और अन्य ज्ञानवर्धक साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता था, लेकिन अब पुस्तकालयों में पहले जैसी सक्रियता दिखाई नहीं देती। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में नियमित अध्ययन और पुस्तक पठन की आदत विकसित करें, क्योंकि यही आदत उन्हें बेहतर नागरिक और सफल शोधकर्ता बनाएगी।

उन्होंने कहा कि शिक्षक को केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने विश्वविद्यालय, संस्थान और समाज से भी गहरा जुड़ाव रखना चाहिए। जिस विश्वविद्यालय में वह कार्य कर रहा है, उसके संस्थापकों, पूर्व कुलपतियों, प्रतिष्ठित शिक्षकों और पूर्व विद्यार्थियों के योगदान की जानकारी भी विद्यार्थियों तक पहुंचनी चाहिए। इससे संस्थान के प्रति गौरव की भावना पैदा होगी और विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक को शैक्षणिक सत्र की पहली कक्षा को प्रेरणादायी बनाना चाहिए। केवल पाठ्यक्रम शुरू करने के बजाय विद्यार्थियों में विषय के प्रति जिज्ञासा और सीखने की इच्छा पैदा करना शिक्षक का पहला दायित्व होना चाहिए। जब शिक्षक रोचक वातावरण तैयार करता है तो विद्यार्थी स्वतः ही विषय और कक्षा दोनों के प्रति आकर्षित होते हैं।
मुख्यमंत्री ने बदलते डिजिटल दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि आज का विद्यार्थी स्मार्टफोन के माध्यम से देश-दुनिया की जानकारी प्राप्त कर रहा है। ऐसे में यह और अधिक आवश्यक हो गया है कि वह सही और गलत जानकारी में अंतर करना सीखे। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध हर जानकारी सत्य नहीं होती। कई बार अपुष्ट सूचनाएं तेजी से फैलती हैं और लोग उन्हें सही मान लेते हैं। इसलिए विद्यार्थियों में तथ्यों की जांच करने और प्रमाणिक स्रोतों से जानकारी लेने की आदत विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि परंपरागत प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की अपनी जवाबदेही होती है। समाचार देने वाले संवाददाता, संपादक और संस्थान की पहचान सार्वजनिक होती है, इसलिए वहां उत्तरदायित्व तय होता है। इसके विपरीत सोशल मीडिया पर कोई भी व्यक्ति गुमनाम रहकर भ्रामक सूचना, अफवाह और समाज में विद्वेष फैलाने का प्रयास कर सकता है। यदि समाज सही तथ्यों से परिचित नहीं होगा तो ऐसी परिस्थितियां अराजकता को जन्म देंगी। इसलिए शिक्षकों की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें विद्यार्थियों को तथ्य और भ्रम के बीच अंतर समझाने की भी जिम्मेदारी निभानी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान समय की आवश्यकता हैं। इन तकनीकों से दूरी बनाकर नहीं चला जा सकता, बल्कि उनका सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग करना होगा। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान और अनुभव का उपयोग करते हुए सोशल मीडिया पर प्रेरणादायी, तथ्यपरक और समाजहित से जुड़ी सामग्री साझा करें।
अच्छे विचार, श्रेष्ठ उद्धरण और सकारात्मक संदेश समाज को सही दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद देश को स्वतंत्रता मिली है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक का दायित्व है कि वह विद्यार्थियों को राष्ट्रविरोधी दुष्प्रचार, अफवाहों और समाज को बांटने वाली ताकतों के प्रति जागरूक करे तथा उनमें राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और अनुशासन की भावना विकसित करे।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि भारत की गुरु परंपरा ने सदैव राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया है। महर्षि वशिष्ठ और महर्षि विश्वामित्र ने भगवान राम का मार्गदर्शन किया, जबकि संदीपन ऋषि ने भगवान कृष्ण को शिक्षा देकर उन्हें समाज और राष्ट्र के लिए तैयार किया। आचार्य चाणक्य ने अपने ज्ञान और दूरदर्शिता से राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव रखी। आज के शिक्षक उसी गौरवशाली परंपरा के उत्तराधिकारी हैं और समाज को नई दिशा देने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग की चिंता करते हुए जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। सरकार परिवार की जिम्मेदारियों को समझते हुए ऐसी योजनाएं लागू कर रही है जो आम नागरिकों के लिए सुरक्षा कवच बन रही हैं। मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना भी इसी सोच का परिणाम है। इससे शिक्षकों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक चिंता से राहत मिलेगी और वे पूरी निष्ठा के साथ शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान दे सकेंगे।
योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि सरकार की सभी योजनाओं का उद्देश्य बिना किसी भेदभाव के पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाना है। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” केवल नारा नहीं, बल्कि सरकार की कार्यशैली का आधार है। योजनाओं का लाभ जाति, वर्ग, क्षेत्र या समुदाय के आधार पर नहीं, बल्कि पात्रता के आधार पर दिया जा रहा है और यही सुशासन की पहचान है।
केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। शिक्षकों और उनके परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्रदेश सरकार की संवेदनशील सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आगरा चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। एस.एन. मेडिकल कॉलेज के विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और नई सुविधाओं से आम लोगों को बेहतर उपचार मिल रहा है। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है, जिसका लाभ प्रत्येक वर्ग तक पहुंच रहा है।
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एम.पी. अग्रवाल, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति आशु रानी, जिलाधिकारी मनीष बंसल, मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्राचार्य, शिक्षक, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का स्वागत करते हुए इसे उच्च शिक्षा जगत के लिए ऐतिहासिक पहल बताया। योजना के लागू होने से प्रदेश के लगभग 7.50 लाख शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की प्रगति उसकी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। यदि शिक्षक सुरक्षित, सम्मानित और चिंतामुक्त होगा तो उसका सकारात्मक प्रभाव सीधे विद्यार्थियों और शिक्षा व्यवस्था पर दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास केवल योजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करना भी है, ताकि पात्र लोगों को वास्तविक लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना इसी सोच का परिणाम है, जो शिक्षकों और उनके परिवारों को आर्थिक संकट के समय बड़ी राहत प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को समय के अनुरूप आधुनिक बनाना आवश्यक है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं रखा जा सकता। शोध, नवाचार, तकनीकी विकास और समाजोपयोगी अनुसंधान को बढ़ावा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए शिक्षकों को स्वयं भी निरंतर अध्ययन और नई तकनीकों से जुड़ना होगा, ताकि विद्यार्थियों को बदलते समय के अनुरूप तैयार किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में ऐसा वातावरण तैयार होना चाहिए, जहां विद्यार्थियों को रोजगार के साथ-साथ उद्यमिता, अनुसंधान और नवाचार के लिए भी प्रेरित किया जाए। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य भी विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानना और उन्हें बहुआयामी अवसर उपलब्ध कराना है। प्रदेश सरकार इसी दिशा में विश्वविद्यालयों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुरक्षा केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। गंभीर बीमारी की स्थिति में सबसे अधिक आर्थिक बोझ परिवार पर पड़ता है। यदि शिक्षक इस चिंता से मुक्त रहेगा तो उसका पूरा ध्यान विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में लगेगा। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य कार्ड की व्यवस्था की गई है, जिससे शिक्षकों और उनके आश्रितों को उपचार के दौरान आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को विकास की तीन सबसे महत्वपूर्ण आधारशिलाएं मानती है। इन्हीं क्षेत्रों में किए गए निवेश का सबसे अधिक लाभ समाज और आने वाली पीढ़ियों को मिलता है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना आने वाले वर्षों में लाखों शिक्षकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगी।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर शोध परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों, स्टार्टअप गतिविधियों और अकादमिक उपलब्धियों का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को स्थानीय समस्याओं के समाधान पर आधारित शोध को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि शिक्षा का लाभ सीधे समाज तक पहुंच सके। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार की ओर प्रेरित करने का भी आह्वान किया।
योजना के तहत जारी किए जाने वाले स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से शिक्षकों और उनके आश्रितों को सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज मिलेगा, जबकि सरकारी अस्पतालों में उपचार की राशि पर कोई सीमा लागू नहीं होगी। इसके अलावा दुर्घटना की स्थिति में बीमा सुरक्षा, अस्पताल में भर्ती होने पर आर्थिक सहायता तथा अन्य निर्धारित स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। योजना का संचालन उच्च शिक्षा विभाग और पंजाब नेशनल बैंक के सहयोग से किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनी रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने योजना का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय से उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। स्वास्थ्य सुरक्षा मिलने से शिक्षकों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक राहत मिलेगी और गुणवत्तापूर्ण उपचार आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। कई शिक्षकों ने इसे प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि इससे शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत लोगों का मनोबल भी बढ़ेगा।
समारोह में प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, विश्वविद्यालयों के कुलपति, विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षाविद, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में लाभार्थी शिक्षकों को स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए तथा योजना के सफल संचालन के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही उच्च शिक्षा विभाग में स्वास्थ्य सुरक्षा की नई व्यवस्था औपचारिक रूप से लागू हो गई, जिससे प्रदेश के लगभग 7.50 लाख शिक्षक और उनके आश्रित परिवार सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।
उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि यह योजना केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि शिक्षकों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। सरकार को उम्मीद है कि इससे शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और शोध गतिविधियों को नया बल मिलेगा।
