द्वितीय कॉरिडोर पर प्री-RDSO ऑसिलेशन टेस्टिंग सफल, सैंड बैग रखकर ट्रेन में तैयार की गई वास्तविक यात्री भार जैसी स्थिति; डिपो के एंट्री रैंप से सदर बाजार स्टेशन तक किया गया परीक्षण
आगरा। आगरा मेट्रो के द्वितीय कॉरिडोर पर यात्री सेवाएं शुरू करने की तैयारियों के बीच ट्रेन का तकनीकी परीक्षण किया गया। इसमें मेट्रो ट्रेन को 959 यात्रियों के बराबर भार के साथ 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाया गया।
ट्रेन में वास्तविक यात्रियों के भार जैसी स्थिति तैयार करने के लिए सैंड बैग (रेत से भरे बैग) रखे गए। इस भार के साथ ट्रेन के प्रदर्शन, स्थिरता और तकनीकी व्यवहार का आकलन किया गया। डिपो के एंट्री रैंप से सदर बाजार मेट्रो स्टेशन के बीच हुई प्री-RDSO (Research Designs and Standards Organisation/अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन) ऑसिलेशन टेस्टिंग सफल रही।https://todaynewstrack.com/2026/11/agra-up-metro-eight-areas-959-passenger-load-successful-test/
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) की आगरा मेट्रो परियोजना ने यह उपलब्धि द्वितीय कॉरिडोर पर हासिल की है। परीक्षण के दौरान ट्रेन में कुल 959 यात्रियों के बराबर भार रखा गया। इसका वजन लगभग 60 से 80 टन था।

सैंड बैग के माध्यम से ट्रेन में वास्तविक यात्री भार जैसी स्थिति बनाई गई, ताकि इस बात का आकलन किया जा सके कि यात्रियों के भार के साथ ट्रेन का संचालन कैसा रहता है। इसके बाद मेट्रो ट्रेन को 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति पर चलाकर उसके प्रदर्शन और स्थिरता को परखा गया।
ट्रैक और सिविल संरचना की मजबूती की हुई जांच
प्री-RDSO ऑसिलेशन टेस्टिंग मेट्रो ट्रेन के सुरक्षित और सुचारु संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण तकनीकी प्रक्रिया है। इसमें ट्रेन को यात्री भार के साथ चलाकर उसकी स्थिरता, प्रदर्शन और तकनीकी व्यवहार का आकलन किया जाता है। अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों में ट्रेन के संचालन को परखने के साथ ट्रैक और सिविल संरचना (स्ट्रक्चर) की मजबूती एवं स्थिरता की जांच भी इस परीक्षण का प्रमुख उद्देश्य है।

परीक्षण के दौरान ट्रेन में 959 यात्रियों के बराबर भार रखकर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से संचालन किया गया। इससे ट्रैक और उससे जुड़ी सिविल संरचना पर पड़ने वाले भार के साथ उनकी स्थिति का आकलन किया गया। यूपीएमआरसी के अनुसार, परीक्षण के दौरान सभी मानक सही पाए गए। इस तरह यह ट्रायल सफल रहा। दूसरे कॉरिडोर पर यात्री सेवाएं शुरू करने की तैयारियों में इसे एक अहम तकनीकी कदम माना जा रहा है।
आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक बन रहा दूसरा कॉरिडोर
आगरा मेट्रो का द्वितीय कॉरिडोर आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक बनाया जा रहा है। इस रूट पर आगरा कैंट, सदर बाजार, प्रतापपुरा और कलेक्ट्रेट मेट्रो स्टेशनों पर निर्माण कार्य किया जा रहा है। वहीं, एमजी रोड से कालिंदी विहार तक के शेष हिस्से में भी सिविल निर्माण कार्य जारी है।
इस कॉरिडोर के तहत संजय प्लेस, एमजी रोड, सुल्तानगंज क्रॉसिंग, कमला नगर, रामबाग, फाउंड्री नगर, मंडी समिति और कालिंदी विहार सहित शहर के प्रमुख क्षेत्रों में मेट्रो कनेक्टिविटी विकसित करने के लिए काम किया जा रहा है। आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक बनने वाला यह कॉरिडोर शहर के प्रमुख व्यावसायिक, आवासीय और पर्यटन क्षेत्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।http://agra-metro-second-corridor-eight-areas-connectivity-load-trial-up-news
निर्माण के साथ तकनीकी परीक्षण भी जारी
आगरा मेट्रो का उद्देश्य शहर के प्रमुख व्यावसायिक, आवासीय और पर्यटन क्षेत्रों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन सुविधा से जोड़ना है। इसी दिशा में द्वितीय कॉरिडोर का निर्माण कार्य जारी है। निर्माण के साथ-साथ मेट्रो ट्रेन के संचालन से जुड़े तकनीकी परीक्षण भी किए जा रहे हैं, ताकि यात्री सेवाएं शुरू करने से पहले ट्रेन और उससे जुड़ी संरचनाओं की स्थिति का आकलन किया जा सके।

959 यात्रियों के बराबर भार के साथ 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पर किया गया प्री-RDSO ऑसिलेशन टेस्ट इसी तैयारी का हिस्सा है। डिपो के एंट्री रैंप से सदर बाजार मेट्रो स्टेशन के बीच यह परीक्षण सफल रहने से द्वितीय कॉरिडोर पर यात्री सेवाएं शुरू करने की तैयारियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
