आगरा। छोटी दिवाली पर घर पहुंचने की जल्दबाजी में आगरा में यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रेलवे स्टेशन से लेकर बस अड्डों तक भीड़ उमड़ी, लेकिन ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिली और स्थानीय रूटों पर बसों के लिए यात्री घंटों इंतजार करते रहे।
महाकौशल एक्सप्रेस में दरवाजों और पायदान तक यात्री बैठे नजर आए। आईएसबीटी और रामबाग चौराहे पर बसों के लिए मारामारी रही। मजबूरी में यात्रियों ने डग्गामार और मालवाहक वाहनों का सहारा लिया। एक ओर रेलवे 71 स्पेशल ट्रेनों और रोडवेज 572 बसों के संचालन का दावा करता रहा, दूसरी ओर यात्री घर पहुंचने के लिए परेशान होते रहे।https://todaynewstrack.com/2026/11/agra-diwali-passenger-rush-trains-buses-crowd/
छोटी दिवाली पर अपनों के साथ त्योहार मनाने के लिए घर पहुंचने की चाह यात्रियों के लिए मुश्किल सफर में बदल गई। रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों में जगह पाने के लिए यात्रियों के बीच धक्कामुक्की हुई तो बस अड्डों पर घंटों इंतजार के बाद भी बसें नहीं मिलीं।
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन से लेकर आईएसबीटी, सैटेलाइट बस अड्डे और रामबाग चौराहे तक यात्रियों की भीड़ दिखाई दी। ट्रेनों के जनरल कोच पहले से भरे होने के कारण यात्रियों को दरवाजों, शौचालय के पास और पायदान पर बैठकर सफर करना पड़ा। बसों की कमी से परेशान यात्रियों ने डग्गामार वाहनों और मालवाहक गाड़ियों में भी सफर किया।
शनिवार को आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर शाम पांच बजे महाकौशल एक्सप्रेस पहुंची तो यात्रियों में ट्रेन में चढ़ने के लिए दौड़ लग गई। प्लेटफॉर्म पर पहले से बड़ी संख्या में यात्री ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही ट्रेन पहुंची, यात्री कोच के दरवाजों पर जमा हो गए। सीट पाने की कोशिश में दरवाजों पर भीड़ इतनी बढ़ गई कि ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों को रास्ता तक नहीं मिल रहा था। काफी मशक्कत के बाद यात्री कोच से बाहर निकल सके।
ट्रेन के जनरल कोच पहले से ही यात्रियों से खचाखच भरे हुए थे। हालत यह थी कि कोच के अंदर खड़े होने तक की जगह नहीं बची थी। सीट नहीं मिलने पर कुछ यात्री दरवाजों पर लटककर सफर करते नजर आए तो कई शौचालय के पास बैठ गए। कुछ यात्रियों ने पायदान पर बैठकर ही सफर करने का जोखिम उठाया। त्योहार पर घर पहुंचने की जल्दबाजी में यात्रियों को अपनी सुरक्षा की भी परवाह नहीं रही।
महाकौशल एक्सप्रेस का आगरा कैंट पहुंचने का निर्धारित समय दोपहर 3:30 बजे है, लेकिन शनिवार को ट्रेन करीब डेढ़ घंटे की देरी से शाम पांच बजे पहुंची। इससे प्लेटफॉर्म पर इंतजार कर रहे यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई। ट्रेन के इंतजार में यात्री लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर खड़े रहे। स्टेशन के प्रथम और द्वितीय श्रेणी के प्रतीक्षालय भी पूरी तरह भरे हुए थे। वहां बैठने की जगह नहीं मिलने पर यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर ही समय बिताना पड़ा।
ट्रेनों में क्षमता से अधिक यात्रियों के सवार होने का खतरा पहले भी सामने आ चुका है। बीती रात आगरा फोर्ट स्टेशन पर अजमेर-सियालदह एक्सप्रेस के जनरल कोच के पायदान पर बैठे एक यात्री का पैर प्लेटफॉर्म से रगड़कर कट गया था। इस घटना के बावजूद अगले दिन भी यात्री पायदान पर बैठकर सफर करते दिखाई दिए। त्योहार पर घर पहुंचने की मजबूरी में यात्री अपनी जान जोखिम में डालने से भी पीछे नहीं हट रहे थे।
रेलवे की ओर से आगरा कैंट स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं। यहां यात्रियों के बैठने की व्यवस्था की गई है, ताकि भीड़ को सीधे प्लेटफॉर्म पर पहुंचने से रोका जा सके। इसके बावजूद बड़ी संख्या में यात्री प्लेटफॉर्म पर पहुंचते रहे। त्योहार के दौरान ट्रेनों में बढ़ते दबाव के बीच यात्रियों को सुरक्षित तरीके से यात्रा कराने की चुनौती बनी रही।http://agra-chhoti-diwali-train-bus-passenger-rush
बसों की स्थिति भी कुछ अलग नहीं थी। आईएसबीटी पर दिल्ली से आने वाले यात्रियों की संख्या अधिक रही। शनिवार को दोपहर 12 बजे तक बस नहीं मिलने के कारण कई यात्री परेशान होकर पैदल ही आईएसबीटी फ्लाईओवर के नीचे पहुंच गए। यहां पहले से डग्गामार वाहन खड़े थे।
बस का इंतजार लंबा होने पर यात्रियों ने मजबूरी में इन वाहनों का सहारा लिया। इनमें से अधिकांश यात्री डग्गामार वाहनों में बैठकर अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए। कुछ लोग मालवाहक वाहनों में भी सवार होकर जाते दिखाई दिए।
आईएसबीटी पर बीती रात भी यात्रियों की भीड़ का दबाव बना रहा। यहां यात्रियों की संख्या करीब दो से ढाई हजार तक पहुंच गई थी। बसें नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में यात्री बस अड्डे पर ही बैठे इंतजार करते रहे। लंबी दूरी के लिए बसें उपलब्ध थीं, लेकिन स्थानीय रूटों पर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इटावा, औरैया, एटा, कासगंज, बदायूं, फर्रुखाबाद और मैनपुरी जाने वाले यात्रियों को रात के समय बसें नहीं मिल सकीं।
इन रूटों पर जाने वाले यात्रियों को उम्मीद थी कि बस अड्डे से उन्हें अपने गंतव्य के लिए वाहन मिल जाएगा, लेकिन इंतजार के बाद भी बस उपलब्ध नहीं होने पर उनकी परेशानी बढ़ती गई। त्योहार पर परिवार के साथ पहुंचने की जल्दी में यात्री इधर-उधर बसों की जानकारी लेते रहे। कई यात्रियों को मजबूरी में दूसरे साधनों से सफर करना पड़ा।
रामबाग चौराहे पर भी यात्रियों की परेशानी कम नहीं रही। अलीगढ़ और हाथरस रूट से आने वाली बसों के पहुंचते ही उनमें चढ़ने के लिए भीड़ टूट पड़ती थी। बस के दरवाजे पर जगह नहीं मिलने पर कुछ यात्रियों ने खिड़कियों के रास्ते अंदर घुसने का प्रयास किया। हालांकि, भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें सफलता नहीं मिली। बस में सीट पाने के लिए यात्रियों के बीच धक्कामुक्की होती रही।
सैटेलाइट बस अड्डे के आगे डिवाइडर पर बना कट हादसे के बाद बंद कर दिया गया है। इसके चलते बसों को रामबाग चौराहे से घूमकर जाना पड़ता है। इस व्यवस्था के कारण बसों के संचालन का रास्ता बदल गया है। वहीं, यात्रियों की भीड़ को देखते हुए चालक रामबाग चौराहे से ही बसों में सवारियां भरकर रवाना हो रहे थे। इसका असर सैटेलाइट बस अड्डे पर इंतजार कर रहे यात्रियों पर पड़ा। बस अड्डे पर खड़े यात्रियों को बस मिलने में परेशानी हुई।
अलीगढ़ और हाथरस रूट की बसों का संचालन सैटेलाइट बस अड्डे से किया जा रहा है, लेकिन रामबाग चौराहे पर ही यात्रियों की भीड़ के कारण बसें भरकर निकल रही थीं। दूसरी ओर वाटर बॉक्स फ्लाईओवर पर भी डग्गामार वाहनों का संचालन दिखाई दिया। इन वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जा रही थीं। त्योहार पर घर पहुंचने की मजबूरी में यात्री क्षमता से अधिक भरे वाहनों में सफर करने को तैयार नजर आए।
यात्रियों की परेशानी के बीच रेलवे और रोडवेज के अधिकारियों ने व्यवस्थाएं पर्याप्त होने का दावा किया। आगरा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे की ओर से होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं। प्लेटफॉर्म पर शिफ्टवार आरपीएफ की ड्यूटी लगाई गई है, ताकि यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के साथ सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी जा सके। भीड़ पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि त्योहार के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए 71 स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य अनारक्षित ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं। रेलवे की ओर से यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।
वहीं, रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक कपिल देव ने बताया कि उन्होंने सेवा प्रबंधक के साथ आईएसबीटी, सैटेलाइट बस अड्डे सहित अन्य बस अड्डों पर व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। सभी बस अड्डों पर पर्याप्त बसें उपलब्ध हैं। सुबह के समय यात्रियों की संख्या अधिक थी। शाम को भीड़ बढ़ने की आशंका को देखते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
कपिल देव के मुताबिक, यात्रियों की सुविधा के लिए कुल 572 बसों का संचालन किया जा रहा है। इसके बावजूद स्थानीय रूटों पर यात्रियों को बसों के इंतजार में परेशानी उठानी पड़ी। एक ओर अधिकारियों की ओर से पर्याप्त बसों और स्पेशल ट्रेनों के संचालन की जानकारी दी जाती रही, वहीं दूसरी ओर छोटी दिवाली पर घर पहुंचने की जल्दी में यात्री स्टेशन और बस अड्डों पर साधन तलाशते नजर आए। त्योहार पर घर लौटने के लिए निकले लोगों के लिए सफर आसान होने के बजाय इंतजार, भीड़ और धक्कामुक्की से भरा रहा।

