आगरा। सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर वर्तमान समय तक भारतीय महिलाओं की भूमिका और योगदान को इतिहास में किस तरह दर्ज किया गया है, इसकी पड़ताल के लिए आगरा में देशभर के इतिहासकार जुटे हैं। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला इतिहासकार सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।
पहले दिन 23 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन में भारतीय नारी के नेतृत्व, ज्ञान, संस्कृति, शासन और राष्ट्र निर्माण में योगदान के साथ इतिहास के अनछुए पहलुओं पर विचार रखे गए। रविवार को 42 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
भारतीय इतिहास के उन पहलुओं को सामने लाने और ऐतिहासिक तथ्यों का नए सिरे से अध्ययन करने के उद्देश्य से डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इतिहास एवं संस्कृति विभाग तथा अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला इतिहासकार सम्मेलन शुरू हुआ।https://todaynewstrack.com/2026/10/women-historians-conference-agra-indian-history-women-contribution-research-agra-up-news/
सिविल लाइंस स्थित संस्कृति भवन में आयोजित सम्मेलन का विषय भारत : शाश्वत सभ्यता और युगों, साम्राज्यों एवं पुरातात्विक धरोहरों के माध्यम से उसकी यात्रा रखा गया है।

सम्मेलन का उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी, मुख्य अतिथि प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, मुख्य वक्ता अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडे, राष्ट्रीय सचिव प्रो. शिवकुमार मिश्र और इतिहास संकलन समिति ब्रज प्रांत के अध्यक्ष प्रो. बीडी शुक्ला ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
इतिहास एवं संस्कृति विभाग के अध्यक्ष तथा भारतीय इतिहास संकलन समिति, ब्रज प्रांत के अध्यक्ष प्रो. बीडी शुक्ला ने सम्मेलन की विषयवस्तु रखते हुए कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर वर्तमान समय तक भारतीय महिलाओं की स्थिति और योगदान का इतिहास में किस तरह उल्लेख हुआ है, इसका व्यापक पुनरावलोकन जरूरी है।
भारतीय इतिहास में लोपामुद्रा जैसी अनेक विदुषी महिलाओं का उल्लेख मिलता है, जिन्होंने ज्ञान, दर्शन, साहित्य और समाज को समृद्ध किया। इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में महिलाओं की भूमिका को उचित स्थान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य भारत की शाश्वत सभ्यता की यात्रा को विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों, साम्राज्यों और पुरातात्विक साक्ष्यों के माध्यम से समझना और नए शोध को प्रोत्साहित करना है।
इतिहास में दर्ज तथ्यों के अलावा भी छिपी हैं महत्वपूर्ण जानकारियां
मुख्य वक्ता डॉ. बालमुकुंद पांडे ने कहा कि इतिहास में दर्ज प्रत्येक बात संपूर्ण सत्य का प्रतिनिधित्व नहीं करती। इतिहास के पन्नों के भीतर और लिखे गए अक्षरों से परे भी कई महत्वपूर्ण तथ्य, घटनाएं और व्यक्तित्व छिपे हैं। उन्हें सामने लाने के लिए अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना देशभर में छोटे-छोटे स्तर पर शोध और तथ्य संकलन का काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और पुस्तकों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाए गए इतिहास का प्रमाणों के आधार पर पुनरावलोकन होना चाहिए। इससे ऐतिहासिक तथ्यों को अधिक पारदर्शी और प्रामाणिक रूप में भावी पीढ़ियों के सामने प्रस्तुत किया जा सकेगा।
भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुरूप हो इतिहास का पुनरावलोकन
मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्स्थापित करने और उसके विभिन्न पक्षों पर शोध करने का काम निरंतर चल रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास में कुछ शासकों और व्यक्तित्वों को जिस तरह महान बताकर प्रस्तुत किया गया, उसी तरह भारतीय परंपरा के वास्तविक महानायकों और राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने वाले राजाओं के बारे में भी वर्तमान पीढ़ी को जानकारी मिलनी चाहिए।http://national-women-historians-conference-dbrau-agra-history-research-agra-up-news
उन्होंने कहा कि आवश्यक संशोधन, शोध और तथ्यों के सुव्यवस्थित संकलन के माध्यम से भारतीय इतिहास को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे देश की गौरवशाली विरासत और वास्तविक ऐतिहासिक योगदान को समझने का अवसर मिलेगा।
हर युग में महिलाओं ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद की प्रोजेक्ट प्रमुख सुष्मिता पांडे ने भारतीय नारी के गौरवशाली अतीत पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाओं ने प्रत्येक युग में समाज, संस्कृति, शासन और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रचलित ऐतिहासिक धारणाओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कुंती, अहिल्याबाई होल्कर, जीजाबाई और रानी लक्ष्मीबाई जैसी महिलाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में महिलाओं के सामर्थ्य, नेतृत्व और योगदान को व्यापक संदर्भ में समझने की जरूरत है।
देशभर से पहुंचे इतिहासकार, 100 से अधिक शोध पत्र होंगे प्रस्तुत
प्रो. बीडी शुक्ला ने बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन में भारतीय इतिहास के विभिन्न कालखंडों, सभ्यताओं, सांस्कृतिक परंपराओं और महिलाओं के योगदान पर 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा, सिक्किम, असम, गुजरात और तेलंगाना सहित देश के विभिन्न प्रांतों से इतिहासकार और शोधार्थी इसमें शामिल हुए हैं। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की भागीदारी से सम्मेलन में देश की विविधता देखने को मिली।
महिला इतिहासकार कार्यशाला में 70 से अधिक महिला प्रतिनिधि और इतिहासकार अपने शोध प्रस्तुत कर रही हैं। पुरातत्व विभाग के 80 वर्षीय अधिकारी डीपी शर्मा ने भी सिंधु सभ्यता में आगरा की भूमिका पर शोध पत्र प्रस्तुत किया।
सम्मेलन के पहले दिन कुल 23 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें 19 शोध पत्र ऑफलाइन और चार ऑनलाइन माध्यम से प्रस्तुत हुए। रविवार को दूसरे दिन 42 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। उत्कृष्ट शोध पत्रों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
शोध सत्र में सभ्यता, संस्कृति और महिला योगदान पर प्रस्तुतियां
उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित दूसरे सत्र में इतिहास के विभिन्न आयामों पर शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इनमें भारतीय सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक घटनाओं, महिलाओं के योगदान और अलग-अलग कालखंडों से जुड़े विषय शामिल रहे। शोधार्थियों ने अपने अध्ययन के आधार पर इतिहास के महत्वपूर्ण पक्षों पर विचार रखे।
कार्यक्रम में अखिलेश शुक्ला ने अतिथियों का परिचय कराया और उनका सम्मान किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. लवकुश मिश्रा ने दिया। संचालन आकाश और शुभम ने किया।
ब्रज के लोकगीतों से सजी सांस्कृतिक संध्या
सम्मेलन के पहले दिन शाम को भारतीय इतिहास और मध्यकालीन लोकसंस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई। इसमें रीना सिंह और उनकी टीम ने ब्रज क्षेत्र के पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुतियां दीं। ‘वो आयो’ और ‘काले घोड़े पर बैठो है’ जैसे लोकगीतों के माध्यम से श्रोताओं को ब्रज की लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में मीडिया प्रमुख हेमंत द्विवेदी, अमित शर्मा, गोपाल वशिष्ठ, राहुल शर्मा, डॉ. सीता देवी, प्रो. हेमा पाठक और डॉ. पूजा पोरस, डॉ. ज्योति श्री सहित अन्य लोगों ने सहयोग किया।
रविवार को 42 शोध पत्रों के साथ होगा समापन
राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को विभिन्न विषयों पर 42 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके बाद उत्कृष्ट शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा और सम्मेलन का समापन होगा। आयोजन के माध्यम से भारतीय इतिहास के अनछुए पहलुओं, महिला इतिहासकारों के शोध और देश की सभ्यतागत विरासत से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
