नारी शक्ति मंथन कार्यशाला में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व, शिक्षा
डिजिटल साक्षरता और आर्थिक स्वावलंबन पर दिया जोर
नई दिल्ली/आगरा। महिलाओं को सुरक्षित माहौल, बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलें, साथ ही वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर फैसले लेने में भी भागीदारी निभाएं। महिला सशक्तीकरण को लेकर इन मुद्दों पर उत्तर प्रदेश की कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने नई दिल्ली में आयोजित नारी शक्ति मंथन कार्यशाला में अपने विचार रखे।
उन्होंने महिलाओं और बालिकाओं को बदलती जरूरतों के अनुरूप सक्षम बनाने के लिए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, कौशल विकास और जनजागरूकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।http://Women’s Economic Empowerment and Financial Literacy
इसमें उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व महिला कल्याण एवं बाल विकास तथा पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने किया। कार्यशाला का उद्देश्य महिला सशक्तीकरण के लिए चल रहे प्रयासों के अनुभव साझा करना, सफल पहलों से सीखना और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक नई रणनीतियों पर विचार करना रहा।http://Baby Rani Maurya on Girls’ Education and Empowerment
डिजिटल साक्षरता और रोजगार से जोड़ने पर जोर
बेबी रानी मौर्य ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें शिक्षा और कौशल विकास के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना जरूरी है। डिजिटल साक्षरता बढ़ने से महिलाएं आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर नए अवसरों का लाभ उठा सकेंगी।http://Women’s Leadership and Political Representation
उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिला तक पहुंचाने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने की जरूरत बताई। महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए व्यापक जनजागरूकता पर भी बल दिया।
तकनीक से मजबूत हो महिला सुरक्षा
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर मंत्री ने तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित वातावरण देने के साथ उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना भी जरूरी है।
उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा, महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सुदृढ़ीकरण को महिला नेतृत्व आधारित विकास के प्रमुख आधार बताया। इन क्षेत्रों में लगातार ऐसे प्रयास करने की जरूरत है, जिनका लाभ महिलाओं तक पहुंचे और उनके जीवन में वास्तविक बदलाव आए।
योजनाओं से आगे बढ़कर नेतृत्व के अवसर मिलें
बेबी रानी मौर्य ने कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में समान अवसर मिलने चाहिए। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच के जरिए उनकी क्षमताओं को विकसित कर आत्मनिर्भरता की राह आसान की जा सकती है।
उन्होंने सरकार, सामाजिक संस्थाओं, स्थानीय निकायों और जनसमुदाय के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत भी बताई। उनके मुताबिक, इन सभी की सहभागिता से महिलाओं के विकास से जुड़े प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। कार्यशाला में उन्होंने उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण को आगे बढ़ाने के लिए अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए।
कई राज्यों के मंत्रियों ने किया प्रतिभाग
कार्यशाला राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के सान्निध्य में आयोजित हुई। इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा और दिल्ली भाजपा के प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे सहित भाजपा शासित राज्यों के महिला एवं बाल विकास मंत्रियों ने प्रतिभाग किया।
चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वुमेन-लेड डेवलपमेंट’ यानी महिला नेतृत्व आधारित विकास के विजन को प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य महिलाओं को विकास योजनाओं का लाभार्थी भर नहीं, बल्कि विकास प्रक्रिया का सक्रिय नेतृत्वकर्ता बनाना है।
कार्यशाला में सामने आए विचारों और अनुभवों के आधार पर महिलाओं के स्वाभिमान, स्वावलंबन और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने के लिए प्रभावी कार्ययोजनाएं तैयार करने पर जोर रहा। बेबी रानी मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित, शिक्षित, स्वावलंबी और सशक्त बनाने के लिए प्रयासरत है। ऐसे आयोजन राज्यों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान और महिला सशक्तीकरण से जुड़े प्रयासों को नई दिशा देने में सहायक हैं।

