मथुरा। दशकों तक सड़कों पर भीख मंगवाने और प्रताड़ना झेलने वाले हाथी राजू को 2014 में बचाया गया था। पैरों में जंजीरों के घाव और शरीर पर चोटों के निशान लेकर मथुरा पहुंचे राजू की जिंदगी अब बदल चुकी है। वाइल्डलाइफ एसओएस के एलिफेंट कैंप में उसे बेहतर पोषण, विशेष पशु चिकित्सा देखभाल और खुले वातावरण में रहने की सुविधा मिल रही है। हालांकि, पुराने घावों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते 12 साल से अधिक समय बाद भी उसका पुनर्वास लगातार जारी है।
सड़कों पर भीख मंगवाने के लिए मजबूर किए जाने और वर्षों तक शारीरिक प्रताड़ना झेलने वाले हाथी राजू के जीवन में अब काफी बदलाव आया है। उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस ने 2014 में उसे बचाया था। इसके बाद उसे मथुरा स्थित वाइल्डलाइफ एसओएस के एलिफेंट कैंप में रखा गया। http://12-years-after-rescue-elephant-raju-rehabilitation-agra-up
बचाव अभियान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था और बंदी हाथियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को सामने लाया था। अब 12 साल से अधिक समय बीतने के बाद भी राजू की सेहत में सुधार के लिए विशेष देखभाल की जा रही है।

जंजीरों से पैरों में हुए थे गहरे घाव
राजू को बचाए जाने के समय उसकी हालत बेहद कमजोर थी। कसकर बांधी गई नुकीली जंजीरों के कारण उसके पैरों में घाव हो गए थे। बुलहुक से बार-बार किए गए हमलों के निशान उसके शरीर पर थे। उसके कूल्हे के हिस्से में भी पुराने फोड़े थे।http://elephant-raju-old-wounds-treatment-agra-up
लंबे समय तक शारीरिक प्रताड़ना झेलने के कारण उसे पशु चिकित्सा उपचार, पोषण संबंधी सहायता और नियमित निगरानी की जरूरत थी। पुरानी चोटों और स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए उसकी देखभाल आज भी लगातार की जा रही है।
खुले बाड़े में रहने और ठंडक पाने की सुविधा
एलिफेंट कैंप में राजू के लिए बड़ा खुला बाड़ा बनाया गया है। गर्मी से राहत के लिए पूल और वॉटर स्प्रिंकलर की व्यवस्था है। उसे पीने के लिए हमेशा ताजा पानी उपलब्ध कराया जाता है। उसके आहार में हरा चारा, मौसमी फल और सब्जियां शामिल हैं। इसके साथ ही खनिजों, दही और नारियल से युक्त पौष्टिक पका हुआ आहार भी दिया जाता है। गन्ना और खरबूजा उसके पसंदीदा खाद्य पदार्थ हैं।

प्रशिक्षण से देखभाल में लेता है हिस्सा
राजू को नियमित देखभाल की प्रक्रियाओं में स्वेच्छा से भाग लेने के लिए सकारात्मक प्रोत्साहन पर आधारित टारगेट ट्रेनिंग दी जाती है। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान वह शांत रहता है। नाखूनों की नियमित देखभाल में भी उसका व्यवहार शांत रहता है। उसकी साफ-सफाई, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और पशु चिकित्सकों की निगरानी को पुनर्वास का अहम हिस्सा बनाया गया है।http://elephant-raju-rescue-from-begging-exploitation-agra-up
भीख मंगवाने की प्रथा समाप्त करने की जरूरत
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि राजू के बचाव अभियान ने सड़कों पर भीख मंगवाने के लिए मजबूर किए जाने वाले हाथियों की पीड़ा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में हाथियों की शारीरिक और व्यवहार संबंधी जरूरतों को वर्षों तक नजरअंदाज किया जाता है। इस प्रथा को समाप्त करने के लिए शोषण रोकने के साथ ही बचाए गए हाथियों को उनकी जरूरतों के अनुरूप देखभाल उपलब्ध कराना जरूरी है।

पुरानी चोटों के लिए लंबे समय तक देखभाल जरूरी
वाइल्डलाइफ एसओएस में कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के निदेशक बैजू राज एम.वी. ने कहा कि वर्षों तक शारीरिक कष्ट झेलने वाले हाथियों को पुरानी चोटों और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में नियमित निगरानी और हर हाथी की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार देखभाल जरूरी होती है।http://today-news-track-raju-elephant-chain-injuries-agra-up
उन्होंने बताया कि राजू के पुनर्वास में तत्काल चिकित्सीय जरूरतों को पूरा करने के साथ उचित पोषण, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सकारात्मक प्रोत्साहन पर आधारित प्रशिक्षण भी शामिल है। इन प्रयासों का उद्देश्य राजू के स्वास्थ्य, आराम और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखना है।
