आगरा। रोडवेज बसों में बिना टिकट सफर करने वाले यात्रियों पर कार्रवाई के दौरान गड़बड़ी का मामला सामने आया है। छह यात्री बिना टिकट पकड़े गए, लेकिन मार्गपत्र में उनकी संख्या तीन ही दर्ज की गई। इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन में छह यात्रियों का ब्योरा दर्ज होने और तीन यात्रियों की संख्या लिखे जाने से टिकट जांच की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में नियमित परिचालक को बचाने के आरोप भी लगे हैं।
मशीन में छह यात्रियों का ब्योरा, मार्गपत्र में तीन का
28 सितंबर 2026 को मुख्यालय की प्रवर्तन टीम ने फिरोजाबाद से आगरा आ रही फोर्ट डिपो की बस संख्या यूपी 78 केटी 3013 की जांच की थी। बस पर संविदा चालक भोलेन्द्र सिंह और नियमित परिचालक मोहन श्याम तैनात थे। जांच के दौरान छह यात्री बिना टिकट मिले थे।https://todaynewstrack.com/2026/10/roadways-ticket-checking-fraud-six-ticketless-passengers-agra-up/
इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन में छह यात्रियों के बिना टिकट मिलने का ब्योरा दर्ज हुआ और 3000 रुपये जुर्माना वसूला गया। इसके बावजूद मार्गपत्र में केवल तीन यात्रियों के बिना टिकट मिलने की संख्या दर्ज होने का मामला सामने आया। मशीन और मार्गपत्र के ब्योरे में अंतर से सवाल उठ रहा है कि छह यात्रियों की जगह तीन की संख्या कैसे दर्ज हुई।
टिकट की रोल खत्म होने के बाद मशीन अटकने की बात
परिचालक मोहन श्याम ने बताया कि टिकट की रोल खत्म हो गई थी। नई रोल डालने के बाद मशीन अटक गई, जिससे तकनीकी गड़बड़ी हुई। हालांकि, इस वजह से मार्गपत्र में यात्रियों की संख्या आधी कैसे दर्ज हुई, यह स्पष्ट नहीं है। इसकी पुष्टि मशीन के अभिलेखों और संबंधित दस्तावेजों के मिलान से ही हो सकती है।
क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल ने कहा कि प्रवर्तन दल के सहायक निरीक्षक से गलती हुई थी और गलती से बटन दब गया था। उनके अनुसार, इसी वजह से मार्गपत्र में यात्रियों की संख्या में अंतर आया।

पहले भी पकड़े जा चुके हैं बेटिकट यात्री
रोडवेज बसों में बिना टिकट यात्रा के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। 24 अप्रैल को आगरा-ग्वालियर मार्ग पर जांच के दौरान सात यात्रियों में से चार बिना टिकट मिले थे। इस मामले ने भी बसों में टिकट जांच और परिचालकों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े किए थे।
आगरा-जयपुर मार्ग पर जांच के दौरान 10 यात्री बिना टिकट मिले थे। इसी जांच में 200 किलोग्राम अतिरिक्त सामान भी पकड़ा गया था। इस मामले को दबाने के आरोप लगे थे, हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के आधार पर ही हो सकती है।
15 यात्री बिना टिकट मिले, दो निरीक्षक निलंबित हुए
8 मई को आगरा-जयपुर मार्ग पर जांच के दौरान 15 यात्री बिना टिकट मिले थे। इस मामले में यातायात निरीक्षक नवल सिंह और अमित कुमार को प्रारंभिक जांच में दोषी मानते हुए निलंबित किया गया था। बाद में दोबारा जांच के बाद दोनों को बहाल कर दिया गया और उन्हें फिर से टिकट जांच की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि टिकट जांच में गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारी किसकी तय होती है और जांच के बाद कर्मचारियों पर कार्रवाई किस आधार पर की जाती है।
पांच बेटिकट यात्री मिलने पर भी हो सकती है कार्रवाई
नियमों के अनुसार, जांच में पांच या इससे अधिक यात्री बिना टिकट मिलने पर संविदा परिचालक का अनुबंध समाप्त किया जा सकता है। नियमित परिचालक को निलंबित करने की कार्रवाई भी हो सकती है। ऐसे मामलों में चालक की भूमिका की भी जांच की जाती है।
ऐसे में छह यात्रियों के बिना टिकट मिलने के बावजूद मार्गपत्र में तीन का ही ब्योरा दर्ज होने का मामला अहम है। संख्या कम दर्ज करने के पीछे किसी कर्मचारी को बचाने का उद्देश्य था या यह तकनीकी अथवा मानवीय गलती थी, इसका निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।http://agra-up-roadways-ticket-checking-irregularities-ticketless-passengers-report discrepancy
क्षेत्रीय प्रबंधक बोले, गलती से दब गया था बटन
क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल ने कहा, “छह यात्री बिना टिकट पकड़े जाने की बात कही जा रही है, उसमें प्रवर्तन दल के सहायक निरीक्षक से गलती हो गई है और गलती से बटन दब गया था। इसलिए ऐसा हुआ है। लगातार टिकट व्यवस्था की निगरानी की जा रही है। कहीं भी कोई गड़बड़ी होती है या कोई दोषी मिलता है तो उस पर कार्रवाई की जाती है।”
मामले में इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन के अभिलेख, मार्गपत्र और जुर्माने की रसीद का मिलान महत्वपूर्ण होगा। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि छह यात्रियों के बिना टिकट मिलने के बावजूद मार्गपत्र में तीन का ही ब्योरा क्यों दर्ज हुआ।
