आगरा। श्री रामलीला महोत्सव के अंतर्गत जनकपुरी महोत्सव में गुरुवार को भावना एस्टेट रोड पर मिथिला की अतिथि-सत्कार परंपरा साकार हो उठी। राजा जनक अशोक कुमार गोयल और रानी सुनैना लता गोयल की ओर से प्रभु श्रीराम के सम्मान में पारंपरिक ‘बढ़हार की दावत’ सजाई गई। चांदी की थाल में विविध व्यंजन परोसे गए तो इंडिया गॉट टैलेंट फेम छत्तीसगढ़ के 35 सदस्यीय रॉयल सिम्फनी बैंड की भजनमयी प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
राजा जनक परिवार ने किया स्वागत
भावना एस्टेट रोड पर सजे परिसर में राजा जनक अशोक कुमार गोयल और रानी सुनैना लता गोयल ने राजा दशरथ के स्वरूप संजय सिंघल और रानी कौशल्या के स्वरूप नीता सिंघल का आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद प्रभु श्रीराम, माता सीता सहित सभी स्वरूपों की विधि-विधान से आरती उतारी गई।
दामाद राम के लिए सजी ज्यौनार
मिथिला की परंपरा में वर के सम्मान में आयोजित होने वाली बढ़हार की दावत में जनक परिवार ने प्रभु श्रीराम सहित सभी स्वरूपों के लिए तरह-तरह के व्यंजनों की व्यवस्था की। चांदी की थाल में भोजन परोसा गया और पूरे आयोजन में बेटी सीता के वर के प्रति जनक परिवार का प्रेम और सम्मान दिखाई दिया।
भजनों से गूंजा भावना एस्टेट रोड
दावत के दौरान रॉयल सिम्फनी बैंड के 35 सदस्यीय दल ने पूर्वी और पश्चिमी संगीत का समावेश करते हुए रामधुनों और भजनों की प्रस्तुतियां दीं। मधुर भजनों और रामनाम के संकीर्तन के बीच श्रद्धालु झूमते नजर आए और जयकारों से परिसर गूंजता रहा।
भोजन के साथ भक्ति का संगम
बढ़हार की दावत में भोजन, संगीत और भक्ति तीनों का संगम देखने को मिला। आयोजन केवल ज्यौनार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिथिला की अतिथि-सत्कार परंपरा और राम-सीता के रिश्ते की आत्मीयता को भी सामने लाया।
जनकपुरी में उमड़े शहर के लोग
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल, कैबिनेट मंत्री कपिल देव अग्रवाल, राज्यसभा सांसद नवीन जैन, एमएलसी विजय शिवहरे, पूर्व सांसद राज बब्बर और जितेंद्र चौहान सहित शहर के वरिष्ठ समाजसेवी, व्यापारी, जनप्रतिनिधि और राजनेता मौजूद रहे।
जनक परिवार की रही मौजूदगी
राजा जनक के परिवार की ओर से शोभिक गोयल, स्मृति गोयल, मोहित गोयल, रिनी गोयल, अनुप्रिया, खुश, अवंतिका और वेदा सहित परिवार के सदस्य मौजूद रहे। राजा दशरथ के परिवार की ओर से रजत सिंघल, निमिषा सिंघल, आयुषी गर्ग और कृष्ण गर्ग उपस्थित रहे।
रामलीला कमेटी के पदाधिकारी पहुंचे
श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, विजय प्रकाश गोयल, रामकिशन अग्रवाल, भगवान दास बंसल, विष्णु दयाल बंसल, टीएन अग्रवाल, मुकेश जौहरी, प्रवीण गर्ग, विनोद जौहरी, संजय तिवारी, प्रवीण स्वरूप, अंजुल बंसल, राहुल गौतम और अशोक राठी मौजूद रहे।
इसके साथ मनोज पाली, विजय कुमार गोयल, गिरधर शर्मा, रमांशु, प्रकाश अग्रवाल, राहुल शर्मा, विजय रामाशीष, संजय अग्रवाल, ऋषि गोयल, लखन गर्ग, नितिन अग्रवाल, विकास अग्रवाल, शैलेंद्र, तपिश, निक्की गोयल और राम अभिषेक शर्मा सहित कमेटी के अन्य पदाधिकारी भी आयोजन में शामिल हुए।
आयोजन समिति ने संभाली जिम्मेदारी
जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव के साथ संतोष कटारा, मनोज बंसल, संजय गोयल, अरविंद शर्मा, अजय गर्ग अवागढ़, नरेंद्र सिंह, अशोक गुप्ता, धर्मेश जैन, मनोज जादौन, हितेश लवानिया और आकाश ग्वाला मौजूद रहे।http://**Janakpuri Mahotsav: Mithila Feast Arranged for Lord Ram, Dishes Served in Silver Plates**
पार्षद वेद प्रकाश गोस्वामी, सतीश ठाकुर, रोहन गुप्ता, अनुज भारद्वाज, पंकज पाठक, हेमंत जादौन, भोले चौहान, धीरज शर्मा, धीरज मंगल, रामबली यादव और राणा सुशील सिंह सहित आयोजन समिति के अन्य सदस्य भी शामिल हुए।
महिला समिति की भी रही भागीदारी
महिला समिति की ओर से अमृता पोरवाल, शिखा, रुचि, सूची, सीमा, शालिनी और शीतल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संचालन दीपक जैन ने किया।
मिथिला की परंपरा हुई जीवंत
बढ़हार की दावत के माध्यम से जनकपुरी महोत्सव में उस परंपरा को जीवंत किया गया, जिसमें बेटी सीता के विवाह के बाद उसके वर का आतिथ्य विशेष रूप से किया जाता है। राजा जनक की ओर से आयोजित ज्यौनार में इसी पारंपरिक भाव को सामने रखा गया।
श्रद्धा और प्रेम बना आयोजन का केंद्र
दावत में तरह-तरह के व्यंजन परोसे गए, लेकिन पूरे आयोजन का केंद्र श्रद्धा और प्रेम रहा। जनक परिवार की ओर से प्रभु श्रीराम और माता सीता सहित सभी स्वरूपों का स्वागत-सत्कार किया गया। इससे आयोजन में शामिल लोगों को मिथिला की पारंपरिक आतिथ्य भावना का अनुभव हुआ।
त्रेता युग की मिथिला का दिखा स्वरूप
सजे परिसर, पारंपरिक ज्यौनार, चांदी की थाल, रामधुन, भजन और जयकारों के बीच भावना एस्टेट रोड का वातावरण पूरी तरह राममय दिखाई दिया। बढ़हार की दावत ने जनकपुरी महोत्सव में राम-सीता के रिश्ते, मिथिला की परंपरा और अतिथि-सत्कार की भावना को एक साथ सामने रखा।

