मां सुनैना ने रानी कौशल्या को सौंपा बेटी का हाथ, अयोध्या और मिथिला के परिवारों ने निभाई मिलनी की परंपरा
आगरा। विवाह के मंगल गीतों से गूंज रही जनकपुरी में शुक्रवार को बेटी की विदाई का ऐसा दृश्य सामने आया कि वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। जनक भवन से जनकदुलारी सीता की विदाई के साथ ही भावना एस्टेट में सजी मिथिला नगरी का माहौल भावुक हो उठा। बेटी को विदा करते समय राजा जनक के स्वरूप अशोक कुमार गोयल और रानी सुनैना के स्वरूप लता गोयल के चेहरे पर बिछोह की पीड़ा साफ दिखाई दी। कुछ देर पहले तक जहां विवाह की खुशियां थीं, वहीं विदाई की बेला आते ही माहौल में करुणा छा गई।

श्री रामलीला महोत्सव के अंतर्गत आयोजित जनकपुरी महोत्सव में माता सीता की विदाई के प्रसंग को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ प्रस्तुत किया गया। राजा जनक और रानी सुनैना के वात्सल्य, बेटी के प्रति प्रेम और उसके सुखी दांपत्य जीवन की कामना ने इस प्रसंग को खास बना दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो त्रेता युग की मिथिला में जनकदुलारी की विदाई का दृश्य फिर से जीवंत हो उठा हो। परिवार के सदस्यों के साथ वहां मौजूद सखियां भी भावुक हो गईं।
जनक परिवार के लिए यह केवल एक धार्मिक प्रसंग का मंचन नहीं, बल्कि बेटी को मायके से विदा करने की उस भावना का प्रतीक था, जिससे हर परिवार जुड़ाव महसूस करता है। बेटी के नए जीवन की शुरुआत की खुशी के साथ उसके दूर जाने का दुख भी इस दृश्य में दिखाई दिया। विदाई के दौरान मौजूद श्रद्धालु भी भावनाओं से जुड़ गए।
मां सुनैना ने रानी कौशल्या को सौंपा बेटी का हाथ
विदाई का सबसे मार्मिक क्षण उस समय आया, जब रानी सुनैना ने अपनी बेटी सीता का हाथ रानी कौशल्या के स्वरूप नीता सिंघल के हाथों में सौंपा। यह दृश्य मां के विश्वास, स्नेह और आशीर्वाद को दर्शा रहा था। बेटी को नए परिवार के साथ विदा करते समय मां की आंखें नम थीं। उनके मन में बेटी के सुखी जीवन की कामना थी।
जनकदुलारी सीता अपने मायके से विदा हो रही थीं। ऐसे में जनक परिवार का हर सदस्य इस बिछोह को महसूस कर रहा था। रानी सुनैना के वात्सल्य और रानी कौशल्या के स्नेहपूर्ण स्वीकार ने विदाई के प्रसंग को और भावुक बना दिया। विवाह के बाद बेटी को नए परिवार में सौंपने की परंपरा के इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को अपने परिवारों की याद दिला दी।
इसके बाद राजा जनक के स्वरूप अशोक कुमार गोयल ने राजा दशरथ के स्वरूप संजय सिंघल से आत्मीय भेंट की। दोनों परिवारों के बीच मिलनी की परंपरा निभाई गई। यह मिलन अयोध्या और मिथिला के पारिवारिक संबंधों का प्रतीक बना। इस अवसर पर श्री जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव ने श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और महामंत्री राजीव अग्रवाल से भी मिलनी की।
भाइयों ने बहन सीता को गोद में उठाकर रथ तक पहुंचाया
विदाई का एक और भावुक दृश्य तब देखने को मिला, जब भाई शोभिक गोयल और मोहित गोयल ने अपनी बहन सीता को गोद में उठाकर सजे हुए रथ तक पहुंचाया। भाई-बहन के बीच स्नेह और अपनत्व का यह दृश्य लोगों के मन को छू गया। बहन को विदा करते भाइयों के चेहरे पर भावुकता दिखाई दी। इस प्रसंग ने पूरे वातावरण को करुणामय बना दिया।
इसके बाद प्रभु श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के स्वरूपों की आरती उतारी गई। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर प्रभु से प्रार्थना की कि माता जानकी का नया जीवन सुख, समृद्धि और मंगल से भरा रहे। आरती के दौरान श्रद्धालु धार्मिक भाव से जुड़े रहे और विदाई के दृश्य को देखते हुए परिवार के सुखी जीवन की कामना करते नजर आए।
आरती और विदाई की रस्मों के बाद श्रीराम अपने भाइयों के साथ घोड़ों पर सवार होकर विदाई यात्रा पर निकले। यात्रा होली पब्लिक स्कूल पहुंची। वहां से यात्रा भावना एस्टेट आई। इसके बाद वाहनों के माध्यम से नेहरू नगर स्थित राजा जनक के निवास की ओर प्रस्थान किया गया। यहां विदाई की पारंपरिक रस्में निभाई गईं।
इस दौरान मां जानकी ने हल्दी के थापे लगाए और पिता से विदाई ली। बेटी को विदा करते समय राजा जनक और रानी सुनैना के भावों ने इस प्रसंग को और मार्मिक बना दिया। जनकपुरी महोत्सव में विवाह के बाद विदाई की परंपराओं को जिस तरह प्रस्तुत किया गया, उससे लोगों को भारतीय परिवारों में बेटी के प्रति माता-पिता के स्नेह और उसके नए जीवन के लिए दिए जाने वाले आशीर्वाद का भाव देखने को मिला।
जनकनंदिनी की विदाई में हर बेटी की विदाई का भाव
जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव ने कहा कि जनकपुरी महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि भारतीय पारिवारिक परंपराओं, संस्कारों और रिश्तों की भावनात्मक अभिव्यक्ति भी है। माता सीता की विदाई में हर माता-पिता को अपनी बेटी की विदाई का भाव दिखाई देता है। राजा जनक और रानी सुनैना का वात्सल्य इस बात का प्रतीक है कि बेटी को विदा करना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि उसे प्रेम, विश्वास और आशीर्वाद के साथ नए जीवन की ओर भेजना है।
उन्होंने कहा कि जनकपुरी महोत्सव रामायण के प्रसंगों के माध्यम से लोगों को परिवार और रिश्तों के महत्व से जोड़ता है। सीता की विदाई का प्रसंग माता-पिता के स्नेह, भाई-बहन के रिश्ते और दो परिवारों के बीच आत्मीय संबंधों को सामने लाता है। यही वजह है कि इस प्रसंग में शामिल लोग धार्मिक कथा के साथ अपने जीवन से जुड़ी भावनाओं को भी महसूस करते हैं।
रामलीला कमेटी और जनकपुरी समिति के सदस्यों की मिलनी
विदाई समारोह के दौरान श्री रामलीला कमेटी के सदस्यों और जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के पदाधिकारियों के बीच भी मिलनी हुई। तारा चंद्र अग्रवाल, राम बारात प्रभारी प्रवीण स्वरूप बंसल, मुकेश जौहरी, रामकिशन अग्रवाल, संजय अग्रवाल, मनोज पोली, अंजुल बंसल, राहुल गौतम, राम अभिषेक, राहुल शर्मा और मनीष शर्मा सहित अन्य सदस्यों की जनकपुरी महोत्सव समिति के सदस्यों ने आत्मीयता के साथ अगवानी की।
इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे का अभिवादन किया और पारंपरिक मिलनी की रस्म निभाई। धार्मिक आयोजन में इस तरह की सहभागिता ने आपसी संबंधों और सामाजिक समरसता को भी दर्शाया। जनकपुरी महोत्सव की परंपराओं में धार्मिक प्रसंगों के साथ सामाजिक मेलजोल और पारिवारिक आत्मीयता का भी महत्व रहा।
केंद्रीय राज्य मंत्री और गणमान्यजनों का स्वागत
विदाई समारोह में स्वागताध्यक्ष अरविंद शर्मा के साथ शोभिक गोयल, मोहित गोयल और रजत सिंघल ने केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया, बृज क्षेत्र के संगठन मंत्री अभय गिरी, कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, विजय शिवहरे, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक गुप्ता और श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल का स्वागत-अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी रही। जनकपुरी महोत्सव के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को रामकथा से जुड़ने का अवसर मिला। विदाई समारोह में धार्मिक परंपराओं के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आपसी मेलजोल की भी झलक दिखाई दी।
मिल्टन पब्लिक स्कूल के बच्चों ने प्रस्तुत की नृत्य नाटिका
कार्यक्रम में मिल्टन पब्लिक स्कूल के बच्चों ने रामलीला पर आधारित नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। बच्चों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से रामकथा के प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम ने आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं को रामायण के आदर्शों, पारिवारिक संबंधों और त्याग की भावना से जोड़ा।
बच्चों की प्रस्तुति जनकपुरी महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हिस्सा रही। धार्मिक प्रसंगों के साथ इस तरह की प्रस्तुतियों से बच्चों को भारतीय संस्कृति और रामायण की कथाओं से जुड़ने का अवसर मिला।
समिति के सदस्यों ने संभालीं व्यवस्थाएं
जनकपुरी महोत्सव की व्यवस्थाओं में आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव के साथ संतोष कटारा, अजय अवागढ़, नरेंद्र सिंह सेंगर, अशोक गुप्ता, संजय गोयल, मनोज बंसल, धर्मेश जैन, मनोज जादौन, हितेश लवानियां, मीडिया प्रभारी राणा सुशील सिंह, अरविंद शर्मा, आकाश ग्वाला, पार्षद वेद प्रकाश गोस्वामी, सतीश ठाकुर, रोहन गुप्ता, अनुज भारद्वाज, पंकज पाठक, हेमंत जादौन, भोले चौहान, धीरज शर्मा, धीरज मंगल, अविनाश राणा और रामवली यादव सहित अन्य सदस्यों की सहभागिता रही।http://Sita Leaves Janak Bhavan as King Janak and Sunaina Break Down in Tears During Her Farewell
महिला समिति की ओर से अमृता पोरवाल, शिखा, रुचि, सीमा, शीतल, शालिनी, सिमी, शुचि, वंदना, संगीता, मीना, मिशी, दीप्ति, ऋतु, प्रियंका ठाकुर, एकता, ज्योति, शालू, रुपाली, रिंकू, मुकेश अग्रवाल और ऋतु अग्रवाल सहित अन्य सदस्यों ने योगदान दिया। आयोजन से जुड़े लोगों की सहभागिता से जनकपुरी महोत्सव के कार्यक्रमों को संपन्न कराने में सहयोग मिला।
शनिवार को वनवास लीला और रामायण का मंचन
श्री रामलीला कमेटी के मीडिया प्रभारी राहुल गौतम के अनुसार शनिवार को शाम छह बजे श्री रामलीला महोत्सव के अंतर्गत वनवास लीला का मंचन किया जाएगा। रामलीला मैदान से वनवास की सवारी निकलेगी। यह बिजलीघर, कचहरी घाट और यमुना किनारा होते हुए मथुरेश जी मंदिर, यमुना किनारे पहुंचेगी। यहां प्रभु श्रीराम और केवट के बीच संवाद का मंचन किया जाएगा।
वहीं, जनकपुरी महोत्सव के अंतर्गत शाम सात बजे सांस्कृतिक मंच पर लाडी संगीत मेकर ग्रुप की ओर से बॉलीवुड कलाकारों के साथ रामायण पर आधारित विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। इसमें रामायण में हनुमान की भूमिका निभाने वाले अभिनेता दारा सिंह के पुत्र बिंदु दारा सिंह भी शामिल होंगे।
कार्यक्रम के दौरान जनकपुरी महोत्सव के आयोजन और सहयोग से जुड़े लोगों का सम्मान भी किया जाएगा। होने वाले दोनों आयोजनों में रामकथा के अलग-अलग प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जुड़ने का अवसर मिलेगा। वनवास लीला में प्रभु श्रीराम और केवट के संवाद का मंचन होगा, जबकि जनकपुरी के सांस्कृतिक मंच पर रामायण आधारित विशेष प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहेगी।
