रामबाग के चीनी का रौजा स्थित नर्सरी में अजगर देखकर जुटी भीड़, वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने किया रेस्क्यू
आगरा। रामबाग के चीनी का रौजा स्थित एक नर्सरी में शनिवार को पेड़ पर करीब सात फुट लंबा भारतीय रॉक पायथन दिखाई दिया। जमीन से 20 फुट से अधिक ऊंचाई पर अजगर को देखकर आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई।
चिंतित लोगों ने उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट को सूचना दी। इसके बाद संगठन की दो सदस्यीय रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची।https://todaynewstrack.com/2026/10/agra-up-python-rescue-nursery-tree-wildlife-sos/
अजगर को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए टीम को करीब एक घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी। उचित उपकरणों और तकनीक की मदद से उसे काबू में कर नीचे उतारा गया। इस दौरान टीम ने मौके पर जुटी भीड़ को भी संभाला, ताकि किसी को नुकसान न पहुंचे।

पेड़ पर चढ़कर किया अजगर का रेस्क्यू
शनिवार, 24 अक्टूबर को चीनी का रौजा स्थित नर्सरी में पेड़ पर अजगर दिखाई देने की सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। वाइल्डलाइफ एसओएस की आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 9917109666 पर भी संपर्क किया गया।
मौके पर पहुंची टीम ने अजगर की स्थिति का आकलन किया। जमीन से 20 फुट से अधिक ऊंचाई पर होने के कारण उसे नीचे उतारना चुनौतीपूर्ण था। टीम के सदस्य सावधानीपूर्वक पेड़ पर चढ़े और अजगर को सुरक्षित तरीके से काबू में किया।
करीब एक घंटे तक चले अभियान में टीम ने अजगर को चोट से बचाने के साथ ही लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा। आसपास जुटी भीड़ को नियंत्रित किया गया, जिससे रेस्क्यू के दौरान किसी तरह का खतरा पैदा न हो।
अजगर जहरीला नहीं, लेकिन पकड़ना खतरनाक
वाइल्डलाइफ एसओएस में संरक्षण परियोजनाओं के निदेशक और सरीसृप विशेषज्ञ बैजू राज एमवी ने बताया कि भारतीय रॉक पायथन शक्तिशाली और गैर-विषैले सांप होते हैं। ये मुख्य रूप से जमीन पर रहते हैं, लेकिन पेड़ों पर चढ़ने में भी सक्षम होते हैं।
उन्होंने बताया कि इस रेस्क्यू में टीम को पेड़ पर चढ़कर अजगर तक पहुंचना पड़ा। इसके बाद उसे सावधानीपूर्वक काबू में कर नीचे उतारा गया। अजगर की ताकत के कारण उसे संभालना आसान नहीं होता।
बैजू राज एमवी ने कहा कि उचित प्रशिक्षण और उपकरणों के बिना अजगर को पकड़ने का प्रयास खतरनाक हो सकता है। लोगों को वन्यजीव दिखाई देने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए।
उन्होंने अपील की कि लोग सरीसृप को घेरने, उसका पीछा करने या पकड़ने का प्रयास न करें। ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित वन्यजीव रेस्क्यू टीम की मदद लेनी चाहिए।
डर के कारण वन्यजीव को नुकसान न पहुंचाएं
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि सात फुट लंबे अजगर को देखकर घबराहट होना स्वाभाविक है, लेकिन डर के कारण किसी वन्यजीव को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचते हैं, तब प्रशिक्षित टीम की मदद और लोगों की जिम्मेदार प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में सावधानी बरतकर लोगों और वन्यजीवों, दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।http://agra-up-seven-foot-python-rescue-cheeni-ka-rauza

गीता शेषमणि ने उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग और समन्वय के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि विभाग की मदद से अजगर को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़े जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने में सहयोग मिला।
भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाती है यह प्रजाति
भारतीय रॉक पायथन का वैज्ञानिक नाम Python molurus है। यह भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली सबसे बड़ी सांप प्रजातियों में से एक है। वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से इस प्रजाति का विशेष महत्व है।
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में इसे निकट संकटग्रस्त यानी नियर थ्रेटन्ड श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा, वन्य जीवों एवं वनस्पतियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (साइट्स) के परिशिष्ट-एक में भी यह प्रजाति शामिल है।
भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-एक के अंतर्गत भारतीय रॉक पायथन को उच्चतम स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में इस प्रजाति के संरक्षण के लिए लोगों का जागरूक होना और वन्यजीवों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार करना जरूरी है।
वन्यजीव दिखने पर हेल्पलाइन पर दें सूचना
वाइल्डलाइफ एसओएस ने लोगों से अपील की है कि अजगर या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर शांत रहें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें। उसे पकड़ने, उसका पीछा करने या चारों ओर से घेरने का प्रयास न करें।
ऐसा करने से व्यक्ति और वन्यजीव, दोनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। लोगों को प्रशिक्षित वन्यजीव रेस्क्यू टीम या संबंधित वन विभाग से संपर्क करना चाहिए।
आगरा में वन्यजीवों के रेस्क्यू के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस की आपातकालीन हेल्पलाइन 9917109666 पर सूचना दी जा सकती है। चीनी का रौजा की नर्सरी में चलाए गए अभियान में टीम ने सावधानी और उचित उपकरणों की मदद से अजगर को सुरक्षित नीचे उतारा।
वाइल्डलाइफ एसओएस ने लोगों से वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की है। संस्था के अनुसार, ऐसे मामलों में विशेषज्ञों की मदद लेना ही लोगों और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का उचित तरीका है।
