आगरा। उत्तर प्रदेश में आठ या उससे अधिक सीट क्षमता वाले निजी वाहनों के मालिकों को परिवहन विभाग ने बड़ी राहत दी है। निजी श्रेणी में पंजीकृत आठ सीटर कारों को अब केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होगी। परिवहन आयुक्त ने वर्ष 2005 में जारी उस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है, जिसके तहत चालक को छोड़कर छह से अधिक और नौ तक सीट वाले निजी वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य था। नई व्यवस्था लागू होने से इनोवा आठ सीटर, मारुति ओमनी आठ सीटर वैन और टाटा के आठ से नौ सीटर निजी वाहनों के मालिकों को विशेष रूप से राहत मिलेगी।
एआरटीओ प्रवर्तन आलोक कुमार अग्रवाल ने बताया कि अब किसी भी गैर-परिवहन यानी निजी वाहन के लिए सिर्फ सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रमाणपत्र लेने की बाध्यता नहीं रहेगी। पहले सीटों की संख्या अधिक होने के कारण निजी वाहन स्वामियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत फिटनेस टेस्ट कराना पड़ता था। इसके लिए आरटीओ कार्यालय जाना पड़ता था। वाहन की जांच और प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में समय लगने के साथ वाहन स्वामियों को कार्यालय के चक्कर भी लगाने पड़ते थे। अब केवल सीट क्षमता की वजह से यह प्रक्रिया नहीं करनी होगी।
इस बदलाव का सबसे सीधा फायदा उन परिवारों को मिलेगा, जो बड़ी सीट क्षमता वाली कारों का इस्तेमाल निजी आवागमन के लिए करते हैं। आठ या नौ सीट वाली कार होने के कारण उन्हें अब नियमित रूप से केवल फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए वाहन प्रस्तुत नहीं करना पड़ेगा। इससे आरटीओ कार्यालय आने-जाने का समय और इस प्रक्रिया में होने वाला खर्च बच सकेगा। खासतौर पर ऐसे वाहन मालिक, जो परिवार के सदस्यों के साथ लंबी दूरी की यात्रा या निजी कामकाज के लिए बड़ी कार का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए प्रक्रिया आसान होगी।
फिटनेस टेस्ट की बाध्यता हटने से निजी वाहन और परिवहन वाहन के बीच सीट क्षमता को लेकर बनी व्यावहारिक परेशानी भी कम होगी। निजी उपयोग में आने वाले वाहनों को सिर्फ अधिक सीट होने के कारण परिवहन श्रेणी के वाहनों जैसी फिटनेस प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे वाहन स्वामियों को अपने निजी वाहन के दस्तावेजों की प्रक्रिया संभालने में सुविधा होगी।
हालांकि नई व्यवस्था का अर्थ यह नहीं है कि निजी वाहन के लिए सभी कानूनी और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां खत्म हो गई हैं। वाहन का पंजीकरण, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेज वैध रखना अनिवार्य होगा। मोटर यान अधिनियम के तहत लागू सुरक्षा प्रावधानों का पालन भी करना होगा। वाहन की सड़क पर सुरक्षित स्थिति बनाए रखने की जिम्मेदारी वाहन मालिक की रहेगी।
नई व्यवस्था से बीमा क्लेम और अन्य कागजी प्रक्रियाओं में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रमाणपत्र लेने की अनिवार्यता अब नहीं रहेगी। वाहन मालिकों को बार-बार फिटनेस प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि किसी अन्य कानूनी प्रावधान या वाहन की श्रेणी के आधार पर यदि कोई अलग प्रमाणपत्र या जांच आवश्यक होती है तो वह व्यवस्था लागू रहेगी।
परिवहन विभाग के इस निर्णय से बड़ी सीट क्षमता वाले निजी वाहनों के स्वामियों के लिए कागजी प्रक्रिया सरल होगी। खासकर उन लोगों को राहत मिलेगी, जिनके वाहन निजी श्रेणी में पंजीकृत हैं और जिनके लिए अब तक सीटों की संख्या के आधार पर फिटनेस कराना जरूरी था। इससे आरटीओ कार्यालय की अनावश्यक दौड़ कम होगी और निजी वाहन मालिकों का समय भी बचेगा।
