आगरा। छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में पंचम गणेश महोत्सव के सातवें दिवस भगवान श्री वरद वल्लभा महागणपति का कर्पूर गौरम स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। कर्पूर से सजे मुख-मंडल की उज्ज्वल आभा, लाल वस्त्र, स्वर्ण मुकुट और स्वर्णाभूषणों से सुसज्जित भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचे। मस्तिष्क पर सजे श्री के तिलक ने स्वरूप की आभा को और निखार दिया। फूलों से सजे भव्य फूल बंगले में विराजमान महागणपति के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और विधिवत पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।
छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में चल रहे 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव में प्रतिदिन भगवान श्री महागणपति का अलग-अलग स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया जा रहा है। सातवें दिन भगवान को कर्पूर गौरम स्वरूप में सजाया गया। कर्पूर से किए गए विशेष श्रृंगार से भगवान का मुख-मंडल अत्यंत उज्ज्वल और मनोहारी दिखाई दे रहा था। लाल वस्त्रों के साथ स्वर्ण मुकुट और स्वर्णाभूषणों से सजे भगवान का स्वरूप श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। मस्तिष्क पर लगाए गए श्री के तिलक ने श्रृंगार की आभा को और बढ़ा दिया।
फूलों से सजे भव्य फूल बंगले में विराजमान महागणपति के कर्पूर गौरम स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचे। भगवान के उज्ज्वल मुख-मंडल की छटा और लाल वस्त्रों के साथ स्वर्णाभूषणों का संयोजन श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करता रहा। भक्तों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान से सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में पूजा और दर्शन के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा।
मंदिर के संस्थापक हरिमोहन गर्ग ने बताया कि पंचम गणेश महोत्सव में प्रत्येक दिन भगवान श्री महागणपति का अलग-अलग स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया जा रहा है। कर्पूर गौरम स्वरूप में मुख-मंडल का विशेष श्रृंगार भगवान की दिव्यता को और अधिक उजागर करता है। फूल बंगले और विशेष श्रृंगार के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रतिदिन भगवान के नवीन स्वरूप के दर्शन कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि महोत्सव का प्रमुख आकर्षण 101 किलो का मेवा मोदक भी है। इसे मंदिर की रसोई में शुद्ध मेवा से तैयार किया गया है। मोदक को तैयार करने और रखने में स्वच्छता व पवित्रता का विशेष ध्यान रखा गया है। इसे जालीदार स्वच्छ वस्त्र से ढककर रखा गया है और आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित लखन दीक्षित और प्रबंधक नितिन शर्मा ने बताया कि महोत्सव के दौरान प्रतिदिन प्रातः 7:30 बजे नित्य अभिषेक, वस्त्र श्रृंगार और फल सेवा होती है। इसके बाद विभिन्न भोग सेवाओं के साथ भोग आरती, दोपहर भोग और सायं भोग अर्पित किए जाते हैं। प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल महागणपति हवन, शाम 6 बजे सहस्रनाम अर्चना, शाम 7 बजे महाआरती और रात 9 बजे शयन आरती संपन्न होती है। वैदिक मंत्रोच्चार और आरती के दौरान मंदिर परिसर गणपति भक्ति से गूंज उठता है।a
