अनंत चतुर्दशी पर लाला चन्नोमल की बारहद्वारी में गूंजे वेद मंत्र, शंखध्वनि और जय श्रीराम के जयकारे
आगरा। प्रथम पूज्य गणनाथ मनाए, मंगल काज सभी बन आए… अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर शुक्रवार को रावतपाड़ा स्थित लाला चन्नोमल की ऐतिहासिक बारहद्वारी में गणपति पूजन और रजत मुकुट पूजन के साथ आगरा की करीब 150 वर्ष पुरानी श्रीरामलीला परंपरा का विधिवत शुभारंभ हुआ। श्री रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित मुकुट पूजन में वेद मंत्रों की गूंज, शंखध्वनि, आरती और जय श्रीराम के जयकारों से बारहद्वारी का वातावरण भक्तिमय हो उठा। वैदिक विधि-विधान से वेद प्रकाश प्रवेता, श्रीपति पंडित चिरंजीवी एवं पंडित श्याम ने पूजन संपन्न कराया।

पूजन के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, माता सीता, हनुमान और गणेश जी के स्वरूपों के रजत मुकुटों का विधिवत पूजन किया गया। भगवान गणेश का आह्वान करते हुए श्रीरामलीला महोत्सव के निर्विघ्न आयोजन की कामना की गई। ऐतिहासिक कोठार में वर्षों से सुरक्षित रखे रजत मुकुटों को बाहर निकालकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। मुकुटों पर चंदन और पुष्प अर्पित होते ही वर्षों पुरानी रामभक्ति की परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी। श्रीराम, सीता, लक्ष्मण सहित हनुमान जी की आरती के साथ पूजन संपन्न हुआ।
इसी के साथ बारहद्वारी में श्रीरामचरितमानस का पाठ भी आरंभ हो गया। यह पाठ पूरे रामलीला महोत्सव के दौरान प्रतिदिन होगा। मानस का मास पारायण बृजेश पंडित जी द्वारा किया जाएगा। रामलीला से जुड़े इस धार्मिक अनुष्ठान के साथ करीब डेढ़ शताब्दी पुरानी परंपरा का एक और अध्याय शुरू हो गया।
श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने कहा कि मुकुट पूजन आगरा की ऐतिहासिक श्रीरामलीला का महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। यह पीढ़ियों से चली आ रही आस्था, मर्यादा और संस्कारों को आगे बढ़ाने का अवसर भी है। गणपति पूजन के साथ अब श्रीरामलीला महोत्सव की तैयारियां विधिवत गति पकड़ेंगी।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष रामलीला का मंचन मथुरा के कृष्ण लीला संस्थान के संचालक नीरज चतुर्वेदी के नेतृत्व में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश पूजन के साथ रामलीला का शुभारंभ हो जाता है, क्योंकि शनिवार से पितृ पक्ष प्रारंभ हो रहा है। पितृ पक्ष प्रारंभ होने के कारण कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इसी वजह से अनंत चतुर्दशी के दिन से ही रामलीला का श्रीगणेश होता है।

रामलीला में श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, मां जानकी और हनुमान जी की भूमिका निभाने वाले पात्रों का आज से दिन वरण किया जाता है। इस वर्ष श्रीराम का स्वरूप शोभित कुमार, माता जानकी का अभिषेक चतुर्वेदी, लक्ष्मण का गोपाल चतुर्वेदी, भरत का कृष्णम, शत्रुघ्न का उद्धव और हनुमान जी का स्वरूप आनंद चतुर्वेदी निभाएंगे।
मुकुट पूजन के साथ ही अब रामलीला महोत्सव के प्रमुख आयोजनों की तैयारियां भी आगे बढ़ेंगी। महामंत्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि मुकुट पूजन के बाद शनिवार को शाम चार बजे श्रीमनःकामेश्वर नाथ महाराज की मुकुट सवारी निकाली जाएगी। सवारी टीला कालीबाड़ी स्थित चित्रा टॉकीज से प्रारंभ होगी। इसके बाद राजेंद्र मार्केट, गुड़ की मंडी, फुलट्टी बाजार, सेव बाजार, किनारी बाजार, छत्ता बाजार और रावतपाड़ा होते हुए श्रीमनःकामेश्वर नाथ मंदिर पहुंचेगी।
मुकुट सवारी में विभिन्न संगठन और अखाड़े परंपरागत डंडों एवं अखाड़ों के प्रदर्शन करते हुए शामिल होंगे। सवारी के दौरान शहर की पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का स्वरूप भी देखने को मिलेगा।
राजीव अग्रवाल ने बताया कि इसी क्रम में 29 सितंबर को रावण की दुहाई नगर भ्रमण के लिए निकलेगी। इसमें रावण अपने भाई-पुत्रों सहित नगर में अपने सम्राट होने की दुहाई देगा। ऋषि-मुनियों और देवताओं को कष्ट पहुंचाने, कर वसूलने तथा अत्याचार करने की घटनाओं को विभिन्न झांकियों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। रावण की दुहाई के साथ रामलीला के अगले आयोजनों का क्रम भी आगे बढ़ेगा।
रजत मुकुटों में संजोई है डेढ़ शताब्दी की विरासत
पंडित वेद प्रकाश ने मुकुट पूजन के महत्व के बारे में बताया कि लाला चन्नोमल की बारहद्वारी स्थित कोठार में वर्षों से सुरक्षित रखे रजत मुकुटों का पूजन रामलीला की परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। पूजन के बाद मुकुटों को आगामी श्रीराम बरात के लिए तैयार कराया जाएगा। इन मुकुटों के साथ केवल चांदी और आभूषणों की चमक नहीं, बल्कि आगरा की डेढ़ शताब्दी से अधिक पुरानी रामभक्ति और सांस्कृतिक विरासत भी जुड़ी हुई है। पीढ़ियों से इन मुकुटों का धार्मिक आयोजनों में उपयोग होता रहा है और मुकुट पूजन के साथ रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होती है।
30 सितंबर से किले में सजेगा रामलीला का मंच
श्रीरामलीला महोत्सव की मंचीय लीलाओं का शुभारंभ 30 सितंबर को शाम छह बजे आगरा किला स्थित रामलीला मैदान में होगा। पहले दिन नारद मोह एवं विश्व मोहिनी लीला का मंचन किया जाएगा। इसके बाद रामकथा के विभिन्न प्रसंग मंच पर साकार होंगे।
एक अक्टूबर को श्रीराम जन्मोत्सव मनाया जाएगा। दो अक्टूबर को माता सीता जन्मोत्सव का आयोजन होगा। छह अक्टूबर को भव्य श्रीराम बरात निकाली जाएगी। इसके बाद सिकंदरा स्थित भावना एस्टेट क्षेत्र में तीन दिवसीय जनकपुरी महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस तरह मुकुट पूजन से शुरू हुई रामलीला की धार्मिक परंपरा आगे चलकर मंचीय लीलाओं, श्रीराम जन्मोत्सव, माता सीता जन्मोत्सव, श्रीराम बरात और जनकपुरी महोत्सव तक पहुंचेगी।
मुकुट पूजन में ये रहे उपस्थित
मुकुट पूजन के अवसर पर श्री रामलीला कमेटी के उपाध्यक्ष टीएन अग्रवाल, विजय प्रकाश गोयल, अशोक कुमार राठी, मुकेश जौहरी, विनोद जौहरी, राकेश जैन, मनोज अग्रवाल पोली भाई, संजय तिवारी, राजा दशरथ के स्वरूप संजय सिंघल सादाबाद, कोषाध्यक्ष ताराचंद्र अग्रवाल, प्रवीन स्वरूप, कॉर्डिनेटर अंजुल बंसल, आनंद मंगल, उपमंत्री मोहित अग्रवाल, अजय अग्रवाल, रामांशू शर्मा, प्रकाश अग्रवाल, मीडिया प्रभारी राहुल गौतम, सहायक मंत्री प्रसून मंगल, मनोज अग्रवाल, रामाशीष शर्मा, मनोज हौजरी, अरविंद अग्रवाल, आयुष अग्रवाल, संजय अग्रवाल, कोठार मंत्री लखन गर्ग, प्रचार मंत्री मनीष शर्मा, संगठन मंत्री राम राहुल शर्मा, शैलेंद्र अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।

