यमुना ब्रिज पर सीमेंट रैक बंद होने से परेशानी, शहर से दूर
कीठम स्टेशन के विकल्प पर व्यापारियों ने जताई दिक्कत
आगरा।सीमेंट की रैक के लिए शहर के नजदीक रेलवे सुविधा नहीं मिलने से कारोबारियों की परेशानी बढ़ रही है। यमुना ब्रिज रेलवे स्टेशन पर सीमेंट की रैक आना बंद होने के बाद रेलवे की ओर से कीठम स्टेशन का विकल्प बताया जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि कीठम शहर से काफी दूर है और वहां पर्याप्त कनेक्टिविटी नहीं होने से माल को बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त परेशानी होगी। व्यापारियों ने मांग की है कि यदि यमुना ब्रिज पर सीमेंट की रैक की सुविधा बहाल नहीं की जाती है तो कुबेरपुर रेलवे स्टेशन पर जरूरी सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
यह मुद्दा शनिवार को पंचकुइया स्थित माथुर वैश्य भवन में आगरा सीमेंट होलसेलर एसोसिएशन के तीसरे स्थापना दिवस समारोह एवं उद्योग संबंधी समस्याओं के निवारण पर आयोजित गोष्ठी में उठा। कार्यक्रम में सीमेंट कारोबारियों ने रेलवे रैक, ट्रांसपोर्टेशन और जीएसटी से जुड़ी समस्याएं प्रमुखता से रखीं।
यमुना ब्रिज कारोबारियों के लिए था सुविधाजनक
एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि पहले शहर में सीमेंट की रैक यमुना ब्रिज रेलवे स्टेशन पर आती थी। शहर के व्यापारियों के लिए यह स्टेशन नजदीक होने के साथ माल की ढुलाई के लिहाज से सुविधाजनक था। पिछले कुछ समय से रेलवे विभाग ने यहां सीमेंट की रैक आना बंद कर दिया है। अब कीठम रेलवे स्टेशन का प्रयोग करने की बात कही जा रही है।
उन्होंने कहा कि कीठम शहर से काफी दूर है। वहां पर्याप्त आवागमन की कनेक्टिविटी भी नहीं है। इससे रैक से उतारे गए सीमेंट को अलग-अलग बाजारों और गोदामों तक पहुंचाने में व्यापारियों को अतिरिक्त परिवहन व्यवस्था करनी पड़ेगी। इसका असर समय और ढुलाई की व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
कुबेरपुर को बनाया जाए विकल्प
मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि यदि रेलवे यमुना ब्रिज रेलवे स्टेशन पर सीमेंट की रैक शुरू नहीं करता है तो कुबेरपुर रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। कुबेरपुर कारोबारियों के लिए अपेक्षाकृत सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। उन्होंने कहा कि स्टेशन पर रैक उतारने, माल की आवाजाही और परिवहन से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं विकसित होने से व्यापारियों को राहत मिल सकती है।
व्यापारियों ने यमुना ब्रिज रेलवे स्टेशन को नमक, चीनी और अन्य खाद्य सामग्री की रैक के लिए खोलने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि इससे स्टेशन की व्यापारिक उपयोगिता बनी रहेगी और अलग-अलग वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़ी गतिविधियां सुचारु रूप से चल सकेंगी।
तीन साल पहले हुआ था संगठन का गठन
मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि आगरा सीमेंट होलसेलर एसोसिएशन का गठन तीन वर्ष पहले व्यापारियों को एकजुट करने और उनकी समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से किया गया था। संगठन का उद्देश्य व्यापारियों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाना और व्यापारिक हितों की रक्षा करना है।
उन्होंने कहा कि सीमेंट उद्योग पुराने उद्योगों में शामिल है। कारोबार से जुड़ी समस्याओं का समाधान आपसी सहयोग और संबंधित विभागों के साथ समन्वय से ही संभव है। एसोसिएशन ट्रांसपोर्टेशन, जीएसटी सर्वे और अन्य व्यापारिक समस्याओं के समाधान के लिए अपने सदस्यों के साथ खड़ा रहता है।

विधायक ने दिलाया सहयोग का भरोसा
गोष्ठी में व्यापारियों ने अपनी समस्याएं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल के सामने भी रखीं। विधायक ने समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि व्यापारियों से जुड़ी समस्याओं को संबंधित विभागों के समक्ष रखा जाएगा और उनके समाधान के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार, पर्यावरण अभियंता अशोक कुमार, संरक्षक मनीष अग्रवाल, शलभ शर्मा, नेशनल चैंबर अध्यक्ष मनोज बंसल, उपाध्यक्ष नीतेश अग्रवाल, अंबा प्रसाद और कोषाध्यक्ष विनय मित्तल ने दीप प्रज्वलित कर किया।
ब्रज लोककला ने बांधा समां
गोष्ठी के बाद ब्रज लोककला पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें माथुर वैश्य महासभा अध्यक्ष मुकेश गुप्ता का सम्मान किया गया। इसके बाद स्नेह मिलन कार्यक्रम हुआ, जिसमें सभी ने दाल-बाटी का आनंद लिया।
स्थापना दिवस समारोह में संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने आपसी सहयोग बनाए रखने तथा संगठन को और मजबूत करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर सचिव दिलीप अग्रवाल, कोषाध्यक्ष सचिन अग्रवाल, उपाध्यक्ष अनिल वार्ष्णेय, नितिन अग्रवाल, ऑडिटर मुकेश गुप्ता, उपमंत्री संजय गुप्ता, एसएन अग्रवाल, विजित गुप्ता, अमन गुप्ता, मुरारी लाल गोयल, पारस चंद जैन और रवि प्रकाश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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अगस्त में 125 रैक से पहुंचा 2.97 लाख टन माल, कारोबारियों का रेल की ओर बढ़ा रुझान
पांच महीने में 559 रैक से 12.96 लाख टन माल की ढुलाई, रेलवे को 189.17 करोड़ रुपये की आय
आगरा। सड़क मार्ग से माल ढुलाई में ट्रकों की उपलब्धता, जाम और लंबी दूरी की परेशानी के बीच कारोबारियों के लिए रेल परिवहन बड़ा विकल्प बनता जा रहा है। आगरा रेल मंडल में अगस्त में 125 रैक के जरिए 2,97,526 मीट्रिक टन माल का लदान हुआ। इस माल ढुलाई से रेलवे को 44.15 करोड़ रुपये की आय हुई। बड़ी मात्रा में माल को एक साथ लंबी दूरी तक पहुंचाने के लिए रैक का इस्तेमाल बढ़ने से कारोबारियों की रेल परिवहन में रुचि दिखाई दे रही है।
आगरा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम के अनुसार, सड़क मार्ग से बड़ी खेप भेजने पर कारोबारियों को ट्रकों की उपलब्धता, रास्ते में जाम, लंबी दूरी और सड़क पर लगने वाले समय जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मालगाड़ी के रैक से एक साथ बड़ी मात्रा में माल भेजा जा सकता है। भारी और अधिक मात्रा वाले माल के लिए यह व्यवस्था कारोबारियों के काम आ रही है।
अगस्त में 125 रैक से हुआ लदान
अगस्त में आगरा मंडल में कुल 125 रैक के माध्यम से 2,97,526 मीट्रिक टन माल का परिवहन किया गया। इससे रेलवे को 44.15 करोड़ रुपये की आय मिली। अलग-अलग साइडिंग से पेट्रोलियम उत्पाद, कंटेनर, बैलास्ट, बिटुमेन, ई-ऑयल, डीओसी, स्टोन और मस्टर्ड ऑयल समेत कई तरह के माल की ढुलाई हुई।
सबसे अधिक लदान आईओसी साइडिंग से हुआ। यहां पेट्रोलियम ऑयल के 100 रैक लोड किए गए। इसके अलावा आईसीडीवाई से 12 रैक कंटेनर, गोविंदगढ़ से तीन रैक बैलास्ट और बीओसी साइडिंग से एक रैक बिटुमेन का लदान हुआ।
रामगढ़ से ई-ऑयल, डीओसी और स्टोन की ढुलाई हुई। यमुना ब्रिज से ई-ऑयल और मथुरा जंक्शन से मस्टर्ड ऑयल का परिवहन किया गया।
पांच महीने में 559 रैक से 12.96 लाख टन माल
अप्रैल से अगस्त तक पांच महीने में आगरा रेल मंडल में कुल 559 रैक के माध्यम से 12.96 लाख टन माल की ढुलाई की गई। इस अवधि में माल परिवहन से रेलवे को 189.17 करोड़ रुपये की आय हुई।
माल ढुलाई में पेट्रोलियम, डीजल, खाद्य तेल, गेहूं, चावल, नमक, यूरिया, डीएपी और लुब्रिकेंट्स के साथ तैयार कंक्रीट प्रमुख रूप से शामिल रहे। रेलवे के माध्यम से अलग-अलग औद्योगिक और कृषि उत्पादों की बड़ी खेप भी भेजी गई।
कंटेनर से ऑटो पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स की ढुलाई
माल ढुलाई केवल थोक उत्पादों तक सीमित नहीं रही। कंटेनर के माध्यम से ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों का भी परिवहन किया गया। कंटेनर आधारित परिवहन से अलग-अलग उद्योगों को अपनी सामग्री लंबी दूरी तक भेजने का विकल्प मिला।
रेलवे के रैक से एक साथ बड़ी मात्रा में माल भेजे जाने के कारण सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने का विकल्प कारोबारियों के सामने आया है। विशेषकर भारी माल और बड़ी खेप के मामले में रेल परिवहन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सड़क की परेशानियों के बीच बढ़ा रेल का इस्तेमाल
कारोबारियों के लिए माल की समय पर आवाजाही महत्वपूर्ण होती है। सड़क से बड़ी खेप भेजने में कई ट्रकों की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके साथ ही रास्ते में जाम और लंबी दूरी के कारण समय बढ़ता है। ऐसे में एक रैक में बड़ी मात्रा में माल भेजना अलग विकल्प उपलब्ध कराता है।
अगस्त के आंकड़ों में पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा हिस्सा रहा। आईओसी साइडिंग से ही 100 रैक पेट्रोलियम ऑयल का लदान हुआ। इसके अलावा कंटेनर, बैलास्ट, बिटुमेन और विभिन्न औद्योगिक तथा कृषि उत्पादों की ढुलाई भी हुई। पांच महीने के आंकड़े बताते हैं कि अलग-अलग तरह के माल को रेल नेटवर्क के माध्यम से भेजा जा रहा है।
189.17 करोड़ रुपये की आय
अप्रैल से अगस्त तक हुई 559 रैक की ढुलाई से रेलवे को 189.17 करोड़ रुपये की आय हुई। अकेले अगस्त में 125 रैक से 2,97,526 मीट्रिक टन माल का परिवहन हुआ और इससे 44.15 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई।
इन आंकड़ों में पेट्रोलियम, डीजल, खाद्य तेल, गेहूं, चावल, नमक, यूरिया और डीएपी जैसे जरूरी सामान के साथ लुब्रिकेंट्स और तैयार कंक्रीट शामिल हैं। कंटेनर के जरिये ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पाद भी भेजे गए। इससे माल परिवहन में रेल की भूमिका अलग-अलग कारोबार और उद्योगों तक पहुंचती दिखाई देती है।

