आगरा। पितृ पक्ष मास की शुरुआत पर रविवार को पश्चिमपुरी और शास्त्रीपुरम क्षेत्र भक्ति और आस्था के रंग में नजर आया। समन्वय सेवा समिति की ओर से श्रीमद्भागवत सप्ताह सत्संग के शुभारंभ पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। पीत वस्त्रों में सजी महिलाएं सिर पर कलश धारण कर यात्रा में शामिल हुईं। बारिश और ठंडी हवाओं के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। बैंड-बाजों पर बज रही धार्मिक धुनों के बीच महिलाएं भक्ति में झूमती हुई चल रही थीं। रास्ते में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं के राधे-राधे के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

कलश यात्रा की शुरुआत पश्चिमपुरी स्थित सालासर बालाजी मंदिर से हुई। निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ी यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। महिलाओं ने पीले वस्त्र पहनकर सिर पर कलश धारण किए। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए पूरे रास्ते धार्मिक वातावरण बना रहा। बैंड-बाजों की धुन और जयकारों के बीच श्रद्धालु आगे बढ़ते रहे। बारिश होने के बावजूद लोगों की आस्था और उत्साह में कमी नहीं आई। पश्चिमपुरी और शास्त्रीपुरम क्षेत्र के विभिन्न मार्गों से गुजरती हुई कलश यात्रा कथा स्थल अमल गार्डन पहुंची।

यात्रा के दौरान आठ स्थानों पर सामाजिक संगठनों की ओर से श्रद्धालुओं का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। जगह-जगह लोगों ने यात्रा के स्वागत के लिए व्यवस्थाएं की थीं। मार्ग में श्रद्धालुओं के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। बग्गी पर श्रीधाम वृंदावन से आए भगवताचार्य नीरज नयन महाराज विराजमान रहे। वह श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए यात्रा के साथ चलते रहे। यात्रा के कथा स्थल पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने धार्मिक उत्साह के साथ स्वागत किया।
कथा संयोजक विराज गहराना और विकास कुलश्रेष्ठ ने बताया कि पितृ पक्ष मास की शुरुआत पर श्रीमद्भागवत सप्ताह सत्संग का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से आध्यात्मिक और धार्मिक विचारों से जोड़ना है। कलश यात्रा के बाद अमल गार्डन में कथा का शुभारंभ हुआ। पहले दिन भगवताचार्य नीरज नयन महाराज ने देव प्रतिष्ठा, भागवत महात्म्य कथा और शुकदेव आगमन प्रसंग का वर्णन किया।
कथा के दौरान उन्होंने श्रीमद्भागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत कथा मनुष्य के जीवन में आने वाले दुख और निराशा को दूर करने वाली अमृतधारा है। श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति को जीवन में सकारात्मक दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही मार्ग दिखाने वाला माध्यम भी है। कथा के प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति, सदाचार और ईश्वर के प्रति विश्वास का महत्व समझाया।
पहले दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। कलश यात्रा में शामिल महिलाएं भी कथा में मौजूद रहीं। कथा स्थल पर धार्मिक आयोजन को लेकर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आयोजकों के अनुसार चार अक्टूबर तक प्रतिदिन दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन अमल गार्डन में किया जाएगा। कथा के दौरान अलग-अलग प्रसंगों के साथ धार्मिक उत्सव भी आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम समन्वयक तुषार रंजन ने बताया कि सोमवार को कथा में विराट स्वरूप वर्णन, ध्रुव चरित्र और अन्य धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इसी दिन झूलन महोत्सव भी आयोजित किया जाएगा, जो कथा में श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगा। आयोजकों ने बताया कि प्रतिदिन कथा के साथ भक्ति और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। पितृ पक्ष के दौरान आयोजित इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के लोगों की भागीदारी लगातार बनी रहने की उम्मीद है।
दैनिक यजमान कमलेश कुलश्रेष्ठ, राजीव रंजन और सतीश चन्द्र कुलश्रेष्ठ ने पूजन किया। आयोजन में पार्षद प्रवीणा राजावत, गरिमा रंजन, समीक्षा गहराना, मोनिका कुलश्रेष्ठ, सरला अग्रवाल, रेनू श्रीवास्तव, आकांक्षा कुलश्रेष्ठ, अल्पना, रोहित डंग, नीरज सिंघल, आयुषी, अजय और अमल सहित अन्य लोग मौजूद रहे। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं से कथा में शामिल होकर धार्मिक प्रसंगों का श्रवण करने की अपील की गई है। श्रीमद्भागवत सप्ताह सत्संग चार अक्टूबर तक चलेगा।

