आगरा। राधाष्टमी के पावन अवसर पर सर्व सहाय सेवा समिति की ओर से बल्केश्वर स्थित गौशाला में गौसेवा, गौ माता को 56 भोग अर्पण, संगीतमय सुंदरकांड पाठ और प्रसादी वितरण का आयोजन किया गया। धार्मिक आस्था और सेवा भाव से जुड़े इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने गौ माता की सेवा की और सुंदरकांड की चौपाइयों का भावपूर्ण श्रवण किया। संगीतमय पाठ के दौरान जय श्रीराम और जय हनुमान के जयकारों से गौशाला का वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सुंदरकांड को केवल धार्मिक पाठ न मानकर भक्ति, साहस, सेवा और समर्पण से जुड़ी जीवन प्रेरणा बताया। आयोजन के समापन पर श्रद्धालुओं के बीच प्रसादी का वितरण किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत गौ माता को संस्था की ओर से 56 भोग अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद रामनिवास गुप्ता ने संगीतमय सुंदरकांड पाठ का वाचन किया। पाठ के बीच उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सुंदरकांड जीवन में विश्वास, साहस और सेवा की भावना को मजबूत करने का माध्यम है। हनुमान जी का चरित्र यह सिखाता है कि प्रभु के प्रति अटूट विश्वास और निस्वार्थ सेवा के भाव से कठिन से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से भक्ति के साथ अपने कर्तव्यों को निभाने और सेवा को जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी।
रामनिवास गुप्ता ने सुंदरकांड की चौपाइयों का भावपूर्ण वाचन करते हुए हनुमान जी के पराक्रम, विनम्रता और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने कहा कि हनुमान जी के जीवन में शक्ति के साथ विनम्रता भी दिखाई देती है। उन्होंने अपनी सामर्थ्य का उपयोग कभी निजी स्वार्थ के लिए नहीं किया, बल्कि लोककल्याण और प्रभु सेवा के लिए किया। सुंदरकांड के प्रसंगों में ऐसी अनेक सीख मिलती हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में मनुष्य को धैर्य बनाए रखने, सत्य के मार्ग पर टिके रहने और समाज के लिए उपयोगी कार्य करने की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने कहा कि जब जीवन में कठिनाइयां सामने आती हैं, तब विश्वास और धैर्य व्यक्ति को आगे बढ़ने की ताकत देते हैं। हनुमान जी ने भी अपने मार्ग में आई कठिन परिस्थितियों का सामना विश्वास और समर्पण के साथ किया। इसी भाव को जीवन में अपनाकर व्यक्ति चुनौतियों का सामना कर सकता है। सुंदरकांड के पाठ के दौरान चौपाइयों के साथ उनके भावार्थ को भी समझाया गया, जिससे श्रद्धालुओं को प्रसंगों के धार्मिक पक्ष के साथ उनके जीवनोपयोगी संदेशों को समझने का अवसर मिला।
आयोजन में गौसेवा को भी विशेष महत्व दिया गया। रामनिवास गुप्ता ने श्रद्धालुओं से गौसेवा के साथ जरूरतमंदों की सहायता करने और धार्मिक संस्कारों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सेवा का भाव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे दैनिक जीवन में भी उतारना चाहिए। समाज में जरूरतमंद लोगों की मदद, जीवों के प्रति संवेदना और सेवा की भावना से ही धार्मिक आयोजनों की सीख व्यवहार में दिखाई दे सकती है।
संगीत की मधुर धुनों के बीच सुंदरकांड की चौपाइयों और उनके भावार्थ के वाचन से गौशाला का वातावरण देर तक भक्तिरस में डूबा रहा। श्रद्धालु पाठ के दौरान भावविभोर नजर आए और समय-समय पर जय श्रीराम तथा जय हनुमान के जयकारे लगाते रहे। संगीतमय प्रस्तुति ने आयोजन में भक्ति का भाव और गहरा कर दिया। श्रद्धालु पूरे पाठ के दौरान धार्मिक वातावरण से जुड़े रहे और हनुमान जी के पराक्रम तथा प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति के प्रसंगों को एकाग्र होकर सुनते रहे।
सुंदरकांड पाठ पूरा होने के बाद प्रसादी वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर आयोजन का समापन किया। राधाष्टमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में गौसेवा और धार्मिक पाठ के साथ प्रसादी वितरण ने सेवा और भक्ति के दोनों भावों को एक साथ जोड़ा। कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारी और सदस्य भी मौजूद रहे तथा आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष दिलीप कुमार अग्रवाल, महामंत्री आशीष अग्रवाल, कोषाध्यक्ष सुनील गर्ग, विनीत अग्रवाल, नवीन गुप्ता, सचिन अग्रवाल, आदर्श मैनी, दुर्गेश गर्ग, मोहित अग्रवाल, श्याम मोहन गुप्ता, लक्की सिंघल और श्याम कुमार सिंघल आदि उपस्थित रहे।

