आगरा। कानून की जानकारी केवल अदालतों तक सीमित नहीं, बल्कि हर नागरिक के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी उद्देश्य के साथ एम.डी. आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया।
शिविर में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को निःशुल्क विधिक सहायता, संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार एवं कर्तव्यों, महिला और बाल अधिकार, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, साइबर अपराधों से बचाव, राष्ट्रीय लोक अदालत और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही विद्यार्थियों को कानून के प्रति जागरूक, जिम्मेदार और उत्तरदायी नागरिक बनने का संदेश भी दिया गया।

एम.डी. आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल, बाईपुर, सिकंदरा में सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को उनके संवैधानिक अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही निःशुल्क विधिक सहायता संबंधी व्यवस्थाओं से अवगत कराना रहा। कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पंकज कुमार-प्रथम के निर्देशन में किया गया।
शिविर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि कानून की जानकारी केवल कानूनी विवादों तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन में उसके अधिकारों की रक्षा, कर्तव्यों के पालन और सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए भी उतनी ही आवश्यक है। यदि व्यक्ति अपने अधिकारों और कानून की जानकारी रखता है तो वह न केवल अपने साथ होने वाले अन्याय का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकता है, बल्कि समाज में कानून के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
शिविर के दौरान विद्यार्थियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर, जरूरतमंद और पात्र नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है, ताकि कोई भी व्यक्ति केवल आर्थिक अभाव के कारण न्याय से वंचित न रहे। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि आवश्यकता पड़ने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से कानूनी सलाह, अधिवक्ता की सहायता और अन्य विधिक सेवाएं प्राप्त की जा सकती हैं।
कार्यक्रम में संविधान द्वारा प्रत्येक नागरिक को दिए गए मौलिक अधिकारों और मौलिक कर्तव्यों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि अधिकारों की जानकारी जितनी आवश्यक है, उतना ही जरूरी अपने कर्तव्यों का पालन करना भी है। एक जागरूक नागरिक वही है जो अपने अधिकारों के साथ-साथ संविधान के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझे और उनका पालन करे। विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की भूमिका, कानून के सम्मान और सामाजिक समरसता बनाए रखने की आवश्यकता के बारे में भी जानकारी दी गई।
शिविर में महिला अधिकारों से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए कानूनों पर प्रकाश डाला गया। साथ ही बाल अधिकारों के संबंध में बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और विकास का अधिकार प्राप्त है तथा इन अधिकारों की रक्षा के लिए विभिन्न कानूनी प्रावधान लागू हैं। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीड़न या भेदभाव की स्थिति में कानून उनके साथ खड़ा है और संबंधित संस्थाओं की सहायता ली जा सकती है।
इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। शिविर में बताया गया कि बुजुर्गों की सुरक्षा, सम्मान और भरण-पोषण सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी कानूनी व्यवस्था मौजूद है। परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया जाए तथा उनके अधिकारों का संरक्षण किया जाए।
आज के डिजिटल दौर को देखते हुए साइबर अपराधों से बचाव विषय पर भी विशेष रूप से जागरूक किया गया। विद्यार्थियों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी लिंक, ओटीपी साझा करने, साइबर ठगी, सोशल मीडिया के दुरुपयोग और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई। उन्हें सलाह दी गई कि इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग पूरी सावधानी के साथ करें तथा किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या ऑनलाइन लेन-देन के प्रति सतर्क रहें। साथ ही साइबर अपराध की स्थिति में संबंधित एजेंसियों को तुरंत सूचना देने के लिए भी प्रेरित किया गया।
शिविर के दौरान राष्ट्रीय लोक अदालत की उपयोगिता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से अनेक प्रकार के मामलों का त्वरित, सरल और आपसी सहमति के आधार पर निस्तारण किया जाता है। इससे समय और धन दोनों की बचत होती है तथा लोगों को शीघ्र न्याय मिलने में सुविधा होती है। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी गई, ताकि पात्र नागरिक इन योजनाओं का लाभ उठा सकें और जरूरत पड़ने पर विधिक सहायता प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
कार्यक्रम के दौरान विधिक साक्षरता के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों से कहा गया कि वे केवल स्वयं कानून की जानकारी तक सीमित न रहें, बल्कि अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी उनके अधिकारों और कानूनी व्यवस्थाओं के प्रति जागरूक करें। वक्ताओं ने कहा कि एक जागरूक समाज का निर्माण तभी संभव है, जब प्रत्येक नागरिक कानून का सम्मान करे, अपने अधिकारों को समझे और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करे।
महाविद्यालय प्रशासन ने भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में विधिक साक्षरता से जुड़े कार्यक्रम विद्यार्थियों को न केवल बेहतर नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी संवेदनशील बनाते हैं। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं।
शिविर में महाविद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित प्रतिभागियों ने विधिक जागरूकता शिविर को अत्यंत उपयोगी बताते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को कानून, संविधान, नागरिक अधिकारों और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा समाज में विधिक साक्षरता को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम साबित होते हैं।
