आगरा। आगरा को देश के सबसे बड़े मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थानों में शामिल कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर आगरा स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड हॉस्पिटल (IMHH) परिसर में NIMHANS-2 की स्थापना का औपचारिक अनुरोध किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भेजी गई विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) और संस्तुति पत्र भी स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा। इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।
उत्तर भारत में राष्ट्रीय स्तर के मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS-2) की स्थापना की दिशा में आगरा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा से उनके कार्यालय में मुलाकात कर आगरा स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड हॉस्पिटल (IMHH) परिसर में NIMHANS-2 की स्थापना का अनुरोध किया। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तैयार विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) और राज्य सरकार की संस्तुति के साथ अपना समर्थन पत्र भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि केंद्र सरकार पहले ही उत्तर भारत में बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) की तर्ज पर एक नए राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना की घोषणा कर चुकी है। यदि यह संस्थान आगरा में स्थापित होता है तो न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत के करोड़ों लोगों को मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान से जुड़ी अत्याधुनिक चिकित्सा, अनुसंधान और प्रशिक्षण सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
दरअसल, केंद्रीय बजट प्रस्तुत करते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में उत्तर भारत में NIMHANS की तर्ज पर एक नए राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद से ही विभिन्न राज्यों में ऐसे संस्थान की स्थापना को लेकर संभावनाएं तलाशने का क्रम शुरू हुआ। इसी बीच केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने आगरा को इस राष्ट्रीय संस्थान के लिए सबसे उपयुक्त स्थान बताते हुए लगातार प्रयास शुरू किए।
प्रो. बघेल ने सबसे पहले इस विषय को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष व्यक्तिगत रूप से रखा। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि आगरा स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड हॉस्पिटल (IMHH) परिसर में NIMHANS-2 की स्थापना के लिए केंद्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष यह भी तर्क रखा कि आगरा का IMHH पहले से ही मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संस्थान है और यहां पर्याप्त आधारभूत संरचना उपलब्ध है, जिससे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की स्थापना के लिए यह स्थान उपयुक्त साबित हो सकता है।
इसके बाद मुख्यमंत्री के आगरा दौरे के दौरान आयोजित एक सार्वजनिक सभा में भी प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने इस विषय को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए आगरा में NIMHANS-2 स्थापित कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके लगातार प्रयासों के बाद राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लिया और आवश्यक औपचारिक प्रक्रिया शुरू की।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस संबंध में विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कराया। परियोजना प्रतिवेदन में आगरा स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड हॉस्पिटल (IMHH) परिसर में NIMHANS-2 की स्थापना के पक्ष में विस्तृत आधार प्रस्तुत किए गए। इसके साथ ही राज्य सरकार ने अपनी ओर से मजबूत संस्तुति करते हुए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया। इस प्रस्ताव में आगरा की भौगोलिक स्थिति, उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचा, मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की मौजूदा सुविधाएं तथा उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से बेहतर संपर्क जैसे पहलुओं को भी महत्व दिया गया।
मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा से हुई मुलाकात के दौरान प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने इस पूरे विषय को विस्तार से रखा। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को अपना संस्तुति पत्र सौंपने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भेजे गए संस्तुति पत्र और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) की प्रति भी उपलब्ध कराई। उन्होंने आग्रह किया कि केंद्र सरकार उत्तर भारत के लिए प्रस्तावित NIMHANS-2 की स्थापना आगरा स्थित IMHH परिसर में करने पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करे।
बैठक के दौरान प्रो. बघेल ने यह भी बताया कि आगरा लंबे समय से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड हॉस्पिटल (IMHH) प्रदेश ही नहीं बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों को भी सेवाएं उपलब्ध कराता है। ऐसे में यदि इसी परिसर में राष्ट्रीय स्तर का संस्थान विकसित किया जाता है तो इससे कम समय में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं और नई आधारभूत संरचना विकसित करने की आवश्यकता भी अपेक्षाकृत कम होगी।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि उत्तर भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर के एक आधुनिक संस्थान की स्थापना समय की जरूरत है। वर्तमान में बेंगलुरु स्थित NIMHANS देश का प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान है, लेकिन उत्तर भारत के मरीजों को वहां तक पहुंचने में काफी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में उत्तर भारत में इसी स्तर का संस्थान स्थापित होने से लाखों मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने प्रो. एस.पी. सिंह बघेल द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव, उत्तर प्रदेश सरकार की संस्तुति तथा डीपीआर का अवलोकन किया। उन्होंने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। हालांकि संस्थान की स्थापना को लेकर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जाएगा, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन को आगरा के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
यदि केंद्र सरकार आगरा के प्रस्ताव को स्वीकृति देती है तो इससे शहर को राष्ट्रीय स्तर की एक बड़ी स्वास्थ्य परियोजना मिल सकती है। इसके माध्यम से मानसिक रोगों के उपचार, तंत्रिका विज्ञान, चिकित्सा शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं, शोध एवं प्रशिक्षण के नए अवसर विकसित होंगे। साथ ही उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत के मरीजों को अत्याधुनिक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी।
आगरा पहले से ही चिकित्सा, शिक्षा और परिवहन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित है। ऐसे में NIMHANS-2 जैसे राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना से शहर की पहचान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हो सकती है। फिलहाल अब निगाहें केंद्र सरकार के अगले निर्णय पर टिकी हैं, क्योंकि यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह आगरा के स्वास्थ्य ढांचे और उत्तर भारत की मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकती है।
