आगरा। उत्तर मध्य रेलवे में बढ़ती यात्री संख्या और ट्रेनों के दबाव को देखते हुए आगरा सहित कानपुर और मथुरा में कोचिंग टर्मिनलों के विस्तार की योजना पर काम शुरू किया गया है। इस योजना के तहत टर्मिनल क्षमता बढ़ाकर भीड़भाड़ कम करने और आधुनिक रेल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कानपुर, आगरा और मथुरा जैसे प्रमुख शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे उत्तर मध्य रेलवे का नेटवर्क अपग्रेड होगा।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस पहल से औद्योगिक और पर्यटन केंद्रों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर संपर्क सुविधाओं में क्रांतिकारी सुधार होगा और रेल परिचालन अधिक सुचारू बनेगा।
लगातार बढ़ती यात्रा मांग को देखते हुए विजन-2030 के तहत अगले पांच वर्षों में एनसीआर के प्रमुख शहरों से नई ट्रेनों के संचालन की क्षमता को वर्तमान स्तर से दोगुना करने का लक्ष्य तय किया गया है।
क्षमता विस्तार के तहत मौजूदा टर्मिनलों पर अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, स्टेबलिंग लाइन, पिट लाइन और आधुनिक शंटिंग सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।
मुख्य रेलवे स्टेशनों पर दबाव कम करने के लिए शहरों के बाहरी क्षेत्रों में सैटेलाइट टर्मिनलों की पहचान कर उनका निर्माण किया जाएगा।
ट्रेनों के गहन रखरखाव के लिए मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स विकसित किए जाएंगे, जिनमें आधुनिक वॉशिंग लाइन और रखरखाव सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
परिचालन सुगमता बढ़ाने के लिए सिग्नलिंग सिस्टम को उन्नत किया जाएगा और मल्टी-ट्रैकिंग के माध्यम से ट्रैक क्षमता में वृद्धि की जाएगी।
आगरा पर विशेष ध्यान
विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी आगरा में आगरा कैंट, आगरा फोर्ट, राजा की मंडी, आगरा सिटी और ईदगाह जैसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन स्थित हैं।
वर्तमान में आगरा से 10 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें और चार पैसेंजर ट्रेनें प्रारंभ होती हैं, जबकि आगरा कैंट स्टेशन से होकर कुल 192 ट्रेनें गुजरती हैं।
रेलवे की योजना के अनुसार आगरा कैंट और ईदगाह स्टेशन सहित अन्य स्टेशनों पर टर्मिनल क्षमता बढ़ाई जाएगी।
लक्ष्य है कि पर्यटन सीजन और त्योहारों के दौरान 100 प्रतिशत अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की क्षमता विकसित की जा सके।
तीन चरणों में लागू होगी योजना
योजना को तीन चरणों में लागू किया जाएगा। तत्काल चरण में परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करते हुए मौजूदा रेलवे यार्ड का पुनर्गठन किया जाएगा।
अल्पकालिक चरण में अगले दो से तीन वर्षों में अतिरिक्त प्लेटफॉर्म और आवश्यक अवसंरचना का निर्माण किया जाएगा।
दीर्घकालिक चरण में वर्ष 2030 तक मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स और नए टर्मिनलों का पूर्ण संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के पूरा होने से उत्तर मध्य रेलवे क्षेत्र में टर्मिनल क्षमता बढ़ेगी और भविष्य की यात्री व परिवहन मांग को मजबूती से पूरा किया जा सकेगा।
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