आगरा। दिवाली से पहले यमुना की बदहाल स्थिति को लेकर रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने यमुना आरती स्थल पर अनोखे अंदाज में विरोध जताया। झुनझुने बजाकर जनप्रतिनिधियों को उनकी जिम्मेदारियां याद दिलाईं और नारा लगाया—‘आगरा को क्या मिला? झुनझुना, झुनझुना!’ संगठन ने यमुना में सालभर ताजे पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने, ताजमहल के डाउनस्ट्रीम में बैराज बनाने, नदी की सफाई और रिवरफ्रंट विकसित करने की मांग उठाई।
दिवाली का त्योहार नजदीक है। बाजारों में रौनक है और शहर में उत्सव की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन यमुना की बदहाली का मुद्दा अब भी जस का तस बना हुआ है। नदी के पुनर्जीवन की मांग लंबे समय से उठ रही है, मगर सरकारी घोषणाओं और वायदों के बावजूद स्थिति में ठोस सुधार नहीं होने पर लोगों ने अनोखे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया।https://todaynewstrack.com/2026/11/yamuna-river-revival-agra-braj-jhunjhuna-protest-agra-up-news/
रिवर कनेक्ट कैंपेन, आगरा के सदस्यों ने रविवार को यमुना आरती स्थल पर ‘झुनझुना दिवस’ मनाया। इस दौरान सदस्यों ने झुनझुने बजाकर जनप्रतिनिधियों और सरकारी तंत्र का ध्यान यमुना की दुर्दशा की ओर खींचा। विरोध के दौरान नारा गूंजा—‘आगरा को क्या मिला? झुनझुना, झुनझुना!’

झुनझुना बजाने के इस प्रतीकात्मक तरीके के जरिये सदस्यों ने जनप्रतिनिधियों को उनकी जिम्मेदारियां याद दिलाईं। उनका कहना था कि यमुना के पुनर्जीवन को लेकर वर्षों से मांग की जा रही है, लेकिन अब तक उन मांगों के अनुरूप काम दिखाई नहीं दिया है। आगरा के लोगों को नदी के लिए घोषणाओं के बजाय धरातल पर काम की जरूरत है।
रिवर कनेक्ट कैंपेन के संयोजक बृज खंडेलवाल ने कहा कि संगठन लंबे समय से यमुना को फिर से जीवंत बनाने की मांग उठा रहा है। सूखी और प्रदूषित यमुना में सालभर ताजे पानी का अविरल प्रवाह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। नदी में पर्याप्त पानी रहने से ही उसके प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने और उसकी स्थिति सुधारने की दिशा में काम हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि ताजमहल के डाउनस्ट्रीम में बैराज बनाया जाना भी जरूरी है। यमुना के पुनर्जीवन के लिए संगठन की प्रमुख मांगों में यह विषय लंबे समय से शामिल है। इसके साथ ही नदी की तलहटी में जमा गाद और गंदगी को हटाकर सफाई कराई जानी चाहिए, ताकि नदी की सफाई का काम केवल ऊपर दिखाई देने वाली गंदगी तक सीमित न रहे।
बृज खंडेलवाल ने यमुना नदी बेसिन की सहायक नदियों के संरक्षण की जरूरत भी बताई। उनका कहना था कि यमुना को बचाने के लिए केवल मुख्य नदी पर काम करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नदी बेसिन से जुड़ी सहायक नदियों का संरक्षण भी जरूरी है। इन नदियों की उपेक्षा करके यमुना के समग्र पुनर्जीवन का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने रिवरफ्रंट का विकास साबरमती नदी मॉडल पर कराने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि नदी के किनारे व्यवस्थित विकास की योजना बनाई जानी चाहिए, जिससे यमुना के आसपास का क्षेत्र बेहतर स्वरूप ले सके। संगठन चाहता है कि पानी की उपलब्धता, नदी की सफाई, सहायक नदियों के संरक्षण और रिवरफ्रंट विकास को एक साथ लेकर ठोस योजना तैयार की जाए।http://save-yamuna-river-protect-agra-braj-agra-up-news
बृज खंडेलवाल ने कहा कि यमुना को लेकर अब तक अनेक घोषणाएं और वायदे किए गए हैं, लेकिन नदी की हालत में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। सरकारी विभागों और राजनीतिक नेतृत्व की बेरुखी आगरा के नागरिकों के लिए पीड़ादायक है। वर्षों से उठाई जा रही मांगों के बाद भी यमुना की स्थिति नहीं बदलना लोगों की चिंता बढ़ा रहा है।
कार्यक्रम में डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने उम्मीद जताई कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की भाजपा सरकार यमुना पर बैराज निर्माण का काम शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि समूचे ब्रज मंडल की जीवनरेखा है। इसके संरक्षण के लिए ठोस और समयबद्ध कदम उठाने की जरूरत है।
उन्होंने यमुना के महत्व की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि नदी का संरक्षण पूरे ब्रज क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत से जुड़ा विषय है। इसलिए इस दिशा में काम को टालने के बजाय समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। बैराज निर्माण की दिशा में पहल होने से यमुना के पुनर्जीवन की मांग को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि ‘झुनझुना दिवस’ किसी उत्सव का हिस्सा नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों को उनके चुनावी वायदों और सार्वजनिक जिम्मेदारियों की याद दिलाने का शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रयास है। झुनझुने बजाने के जरिये उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि यमुना की बदहाली को लेकर आगरा के लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं और अब उन्हें जवाब के साथ ठोस काम भी चाहिए।
सदस्यों का कहना था कि आगरा को केवल आश्वासन नहीं, यमुना में पानी चाहिए। नदी में सालभर ताजे पानी का प्रवाह बना रहे, ताजमहल के डाउनस्ट्रीम में बैराज बने, तलहटी से गाद और गंदगी हटाई जाए तथा सहायक नदियों का संरक्षण किया जाए। इसके साथ ही साबरमती मॉडल पर रिवरफ्रंट विकसित करने की मांग भी पूरी की जानी चाहिए।
कार्यक्रम में डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, डॉ. हरेंद्र गुप्ता, चतुर्भुज तिवारी, मीरा खंडेलवाल, डॉ. ज्योति खंडेलवाल, विशाल झा, राकेश गुप्ता, जगन प्रसाद तेहरिया, पंडित जुगल किशोर, अभिनव, डॉ. मुकुल पंड्या, पद्मिनी अय्यर, शशिकांत उपाध्याय, रंजन शर्मा, मुकेश चौधरी और दिनेश शर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में गोस्वामी नंदन श्रोत्रिय ने विशेष यमुना आरती कराई। उपस्थित सदस्यों ने यमुना के पुनर्जीवन और ब्रज की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण का संकल्प दोहराया। आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन सदस्यों ने यमुना की बदहाली दूर करने और नदी में पानी का अविरल प्रवाह सुनिश्चित करने की मांग फिर उठाई।
रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने झुनझुना दिवस के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को यह याद दिलाने का प्रयास किया कि यमुना का मुद्दा केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नदी की सफाई, पानी की उपलब्धता, बैराज निर्माण और सहायक नदियों के संरक्षण जैसे विषयों पर काम शुरू होना चाहिए, ताकि आगरा और ब्रज की जीवनरेखा को फिर से उसका प्राकृतिक स्वरूप मिल सके।
