बच्चों को 13 साल की उम्र से पहले मोबाइल देने से बचें
अनजान APK फाइल पर क्लिक न करें; साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर दें सूचना
आगरा। मोबाइल फोन आज जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी बढ़ती लत बच्चों और युवाओं के लिए परेशानी का कारण बन रही है। घंटों रील देखना, हर समय फोन हाथ में रखना और अनजान लिंक पर क्लिक करना न केवल बच्चों की आदतों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ा रहा है।
साइबर एक्सपर्ट और उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के सलाहकार रक्षित टंडन ने आगरा में आयोजित एक बैठक में मोबाइल के इस्तेमाल और साइबर सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में मोबाइल की लत ड्रग की तरह काम कर रही है। इसके इस्तेमाल में लापरवाही और इंटरनेट पर छोटी-सी गलती भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।

शनिवार को होटल पीएल पैलेस में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल की अध्यक्षता में साइबर सिक्योरिटी पर बैठक आयोजित की गई। इसका संचालन आईटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन सचिन सारस्वत ने किया। बैठक में उद्यमियों और व्यापारियों को साइबर अपराध से बचने के तरीके बताए गए। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लोगों को तकनीक के प्रति जागरूक रहना जरूरी है।https://todaynewstrack.com/2026/10/agra-up-news-mobile-addiction-cyber-fraud-rakshit-tandon-safety-tips/
मोबाइल की लत को हल्के में न लें, बच्चों की आदतों पर दें ध्यान
रक्षित टंडन ने कहा कि आज की पीढ़ी में मोबाइल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। बच्चे बड़ी मात्रा में रील देखते हैं। लगातार मोबाइल पर समय बिताने से उनके व्यवहार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को मोबाइल देने और उसके इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतें। 13 वर्ष की उम्र से पहले बच्चों को मोबाइल देने से बचने की बात भी कही।
मोबाइल बच्चों के लिए पढ़ाई, जानकारी और संवाद का माध्यम हो सकता है, लेकिन इसका अनियंत्रित इस्तेमाल परेशानी पैदा कर सकता है। अभिभावकों को यह देखना चाहिए कि बच्चे फोन पर कितना समय बिता रहे हैं और किस तरह की सामग्री देख रहे हैं। बच्चों के साथ बातचीत, खेलकूद और दूसरी गतिविधियों के लिए समय निकालना भी जरूरी है।
मोबाइल का इस्तेमाल केवल जरूरत के अनुसार करने की आदत विकसित करनी चाहिए। बार-बार नोटिफिकेशन देखना, बिना उद्देश्य रील स्क्रॉल करते रहना और देर तक स्क्रीन पर समय बिताना दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। बच्चों के साथ बड़ों को भी अपने मोबाइल इस्तेमाल की आदतों पर ध्यान देना चाहिए।https://todaynewstrack.com/2026/10/agra-up-news-mobile-addiction-cyber-fraud-rakshit-tandon-safety-tips/
वेबसाइट की स्पेलिंग में गलती से गलत खाते में पहुंच सकता है पैसा
साइबर एक्सपर्ट ने ऑनलाइन भुगतान करते समय वेबसाइट के पते की अच्छी तरह जांच करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि सरकारी वेबसाइट या व्यापारिक भुगतान के दौरान पते की स्पेलिंग में मामूली अंतर भी नुकसान का कारण बन सकता है। गलत वेबसाइट पर जानकारी भरने या भुगतान करने से साइबर अपराधियों के जाल में फंसने का खतरा रहता है।http://todaynewstrack.com
उन्होंने बैंक की वेबसाइट पहचानने के बारे में भी जानकारी दी। उनके अनुसार, बैंक की आधिकारिक वेबसाइट का पता जांचना जरूरी है। बैंक का नाम लिखकर सामने आए किसी भी लिंक को सही मानकर उस पर क्लिक नहीं करना चाहिए। भुगतान करने से पहले वेबसाइट का पूरा पता और प्राप्तकर्ता के खाते की जानकारी ध्यान से जांचें।
पासपोर्ट से संबंधित सेवाओं के लिए उन्होंने आधिकारिक वेबसाइट passportindia.gov.in का इस्तेमाल करने की सलाह दी। इंटरनेट पर किसी सरकारी सेवा की वेबसाइट खोजते समय उसके पते की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से करनी चाहिए। मिलते-जुलते नाम और गलत स्पेलिंग वाले लिंक पर भरोसा करने से बचें।
APK और BIN फाइल पर क्लिक करने से पहले रहें सावधान
रक्षित टंडन ने फोन पर आने वाली अनजान APK फाइलों और संदिग्ध लिंक से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गैस कनेक्शन से जुड़ी सूचना या वाहन चालान के नाम पर आने वाले संदेशों में दिए गए लिंक पर बिना जांच किए क्लिक न करें। साइबर अपराधी कई बार ऐसे संदेशों के जरिये लोगों को फंसाने की कोशिश करते हैं।
अनजान APK फाइल डाउनलोड करने या इंस्टॉल करने से फोन की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके जरिये निजी जानकारी और बैंकिंग संबंधी विवरण तक पहुंचने का खतरा हो सकता है। इसी तरह, संदिग्ध BIN फाइल या अनजान अटैचमेंट को खोलने से भी बचना चाहिए।
अगर किसी संदेश में गैस कनेक्शन बंद होने, चालान जमा करने या किसी जरूरी सेवा के बाधित होने की बात कही गई हो, तो घबराकर लिंक न खोलें। संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या उसके सत्यापित माध्यम से जानकारी की पुष्टि करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर फोन में ऐप इंस्टॉल न करें और न ही उसे स्क्रीन साझा करने की अनुमति दें।
उन्होंने भूलवश APK या BIN फाइल पर क्लिक हो जाने की स्थिति में तुरंत फोन का सिम निकालने की सलाह दी। ऐसी स्थिति में केवल सिम निकालने पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। फोन को नेटवर्क से अलग करें, दूसरे सुरक्षित डिवाइस से बैंक या संबंधित सेवा प्रदाता से संपर्क करें और जरूरत पड़ने पर खाते तथा डिजिटल भुगतान की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएं।
साइबर ठगी होते ही 1930 पर करें कॉल
बैठक में साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत सूचना देने पर विशेष जोर दिया गया। रक्षित टंडन ने कहा कि किसी भी तरह की साइबर ठगी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करें। साथ ही संबंधित बैंक से संपर्क करके खाते और डिजिटल भुगतान को सुरक्षित करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
साइबर ठगी का पता चलते ही देर करने के बजाय जल्द शिकायत दर्ज कराना जरूरी है। भुगतान का मैसेज, ट्रांजेक्शन आईडी, संदिग्ध मोबाइल नंबर, लिंक और अन्य उपलब्ध साक्ष्य सुरक्षित रखें। शिकायत दर्ज कराने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
अगर खाते से पैसा निकल गया है, तो बैंक को तत्काल सूचना देकर संबंधित लेनदेन की जानकारी दें। बैंक से खाते, कार्ड या डिजिटल भुगतान सुविधा को सुरक्षित करने के लिए उचित कदम उठाने को कहें। किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी न बताएं।
संचार साथी एप डाउनलोड करने की सलाह
रक्षित टंडन ने लोगों को संचार साथी एप डाउनलोड करने की सलाह दी। दूरसंचार विभाग की इस पहल के माध्यम से मोबाइल कनेक्शन और मोबाइल फोन से जुड़ी कुछ सुरक्षा सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। एप डाउनलोड करते समय आधिकारिक स्रोत का ही उपयोग करना चाहिए, ताकि उसके नाम पर उपलब्ध किसी नकली एप को इंस्टॉल करने से बचा जा सके।
उन्होंने लोगों को समय-समय पर जीमेल का पासवर्ड बदलने और सोशल मीडिया का इस्तेमाल सतर्कता से करने की भी सलाह दी। ईमेल और दूसरे महत्वपूर्ण खातों के लिए मजबूत तथा अलग-अलग पासवर्ड रखना बेहतर है। जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां दो-स्तरीय सुरक्षा भी सक्रिय करनी चाहिए। किसी अनजान ईमेल या संदेश में दिए गए लिंक से लॉगिन करने के बजाय संबंधित सेवा की आधिकारिक वेबसाइट या एप खोलें।
आधार और पैन कार्ड की तस्वीर फोन में रखने से बचें
साइबर सुरक्षा के लिए रक्षित टंडन ने आधार कार्ड और पैन कार्ड की तस्वीरों को मोबाइल में इमेज फाइल के रूप में रखने से बचने की सलाह दी। इन दस्तावेजों में व्यक्तिगत जानकारी होती है, जिसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। फोन खोने, किसी के हाथ लगने या उसमें मौजूद जानकारी तक अनधिकृत पहुंच होने पर निजी विवरण के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है।
जरूरत पड़ने पर पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल सुरक्षित और अधिकृत माध्यम से करना चाहिए। अनजान लोगों को दस्तावेज भेजने से बचें और सोशल मीडिया या असुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनकी तस्वीर साझा न करें। इसी तरह, किसी भी निवेश योजना में कम समय में अधिक पैसा कमाने के लालच में अपनी बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
व्हाट्सएप के सुरक्षित इस्तेमाल और कवच एम-2 की जानकारी दी
बैठक में व्हाट्सएप को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने के बारे में भी जानकारी दी गई। लोगों को अपनी गोपनीयता सेटिंग की जांच करनी चाहिए और यह तय करना चाहिए कि उनकी प्रोफाइल फोटो, व्यक्तिगत जानकारी तथा अन्य विवरण कौन देख सकता है। अनजान नंबर से आए संदेशों, संदिग्ध लिंक और बिना पुष्टि के भेजी गई फाइलों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
रक्षित टंडन ने साइबर सुरक्षा के लिए फोन में कवच एम-2 डाउनलोड करने की सलाह भी दी। एप डाउनलोड करने से पहले उसके सही नाम, आधिकारिक स्रोत और उपयोगिता की पुष्टि करनी चाहिए। किसी भी सुरक्षा एप को केवल नाम सुनकर अनजान वेबसाइट से डाउनलोड करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं का लाभ लेने के साथ लोगों को सतर्कता भी बरतनी होगी। ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए जागरूकता, सही जानकारी और समय पर कदम उठाना महत्वपूर्ण है।
व्यापारियों में साइबर ठगी को लेकर चिंता
चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने कहा कि हैकर्स की ओर से आम लोगों के साथ धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। इससे उद्यमियों और व्यापारियों में भी चिंता बनी हुई है। साइबर अपराध से बचाव और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से बैठक आयोजित की गई।
बैठक का संचालन आईटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन सचिन सारस्वत ने किया। रक्षित टंडन ने बताया कि वह 75 थानों को देख रहे हैं और अब तक 90 लाख बच्चों को मार्गदर्शन देकर जागरूक कर चुके हैं। कार्यक्रम के अंत में पूर्व अध्यक्ष केके पालीवाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
बैठक में उपाध्यक्ष नीतेश अग्रवाल और अम्बा प्रसाद गर्ग, कोषाध्यक्ष विनय मित्तल, पूर्व अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल और श्रीकिशन गोयल, शलभ शर्मा, सुरेश चंद बंसल, राजेन्द्र गर्ग, रंजीत सामा, गोमित जैन, चन्द्रवीर सिंह, संचित सिंघल, अखिलेश दूबे, विजय मंगवानी, विजय कुमार गुप्ता, मुकेश शर्मा, मयंक मित्तल, रूचि अग्रवाल, मनस्वी, प्रकृति, सतीश अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, कृतिका और अर्जुन गुप्ता सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

