ग्लोबल ताज इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए तैयार हो रही फिल्म
विश्वविद्यालय के विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने सीखी फिल्म निर्माण की बारीकियां
आगरा विद्यार्थियों में बढ़ते आत्महत्या के मामलों को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट (आईटीएचएम) में छह दिवसीय फिल्म निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई।
12 से 17 अक्टूबर तक संस्कृति भवन में चली कार्यशाला में विद्यार्थियों ने कहानी और पटकथा लेखन से लेकर ऑडिशन, कलाकारों के चयन, शूटिंग और फिल्म निर्माण के विभिन्न चरणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया। विद्यार्थी 16 से 18 नवंबर तक होने वाले आठवें ग्लोबल ताज इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए एक फिल्म तैयार कर रहे हैं। इसकी थीम विद्यार्थियों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखकर रखी गई है।https://todaynewstrack.com/2026/10/students-film-on-suicide-prevention-agra-up-news/
कार्यशाला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशू रानी के दिशा-निर्देशन और संस्थान के निदेशक प्रो. यूएन शुक्ला की देखरेख में आयोजित की गई। इसका संचालन Glamour Live Films के निर्देशक सूरज तिवारी ने किया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण की व्यावहारिक प्रक्रिया से परिचित कराना और स्वतंत्र रूप से फिल्म बनाने के लिए जरूरी कौशल विकसित करना था।
178 विद्यार्थियों ने कराया पंजीकरण
कार्यशाला के लिए विश्वविद्यालय के आवासीय संस्थानों के 178 विद्यार्थियों ने गूगल फॉर्म के माध्यम से पंजीकरण कराया। इनमें इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट, दाऊ दयाल संस्थान, इंस्टीट्यूट ऑफ बेसिक साइंस, इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, केएमआई और विश्वविद्यालय कंप्यूटर केंद्र के विद्यार्थी शामिल रहे।
प्रशिक्षण के दौरान फिल्म लेखक एवं निर्देशक सूरज तिवारी ने विद्यार्थियों को कहानी तैयार करने, पटकथा लिखने, ऑडिशन लेने और कलाकारों का चयन करने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने प्री-प्रोडक्शन, प्रोडक्शन और पोस्ट-प्रोडक्शन के विभिन्न चरणों की जानकारी देते हुए बताया कि फिल्म निर्माण में कहानी, पटकथा, कलाकारों का चयन, तकनीकी तैयारी और टीम के बीच समन्वय की अहम भूमिका होती है।
विद्यार्थियों ने समझीं फिल्म निर्माण की जिम्मेदारियां
कार्यशाला में विद्यार्थियों को फिल्म शूटिंग के लिए अलग-अलग भूमिकाएं तय करने का अभ्यास कराया गया। इसमें अभिनय, निर्देशन, पटकथा लेखन, कैमरा संचालन, प्रोडक्शन और अन्य जिम्मेदारियों का विभाजन शामिल रहा। ऑडिशन और कलाकारों के चयन की प्रक्रिया के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप भूमिका चुनने की समझ विकसित करने का अवसर मिला।
कार्यशाला में लो-बजट फिल्म मेकिंग पर भी विशेष जोर दिया गया। सूरज तिवारी ने बताया कि सीमित संसाधनों और कम बजट में भी रचनात्मक सोच, बेहतर योजना, उपलब्ध साधनों के प्रभावी इस्तेमाल और टीमवर्क से फिल्म बनाई जा सकती है। इस सत्र में विद्यार्थियों को कम संसाधनों में अपनी कल्पनाशीलता को पर्दे पर उतारने के तरीके बताए गए।
आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर आधारित होगी फिल्म
कार्यशाला के तहत पर्यटन एवं होटल प्रबंधन संस्थान और विश्वविद्यालय कंप्यूटर केंद्र के विद्यार्थी फिल्म निर्माण में भूमिका निभा रहे हैं। इनमें सुप्रिया, कुश त्यागी, प्रेम सिंह, देवांसी गुप्ता, रिया मुद्गल, अंशुल यादव, सौरभ, बिपाशा, निधि और हिमांशु सिंह सहित अन्य विद्यार्थी शामिल हैं।
फिल्म की थीम विद्यार्थियों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखकर तय की गई है। इसके माध्यम से अवसाद और आत्महत्या से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने तथा विद्यार्थियों को ऐसे कदमों से बचाने का संदेश देने का प्रयास किया जाएगा। फिल्म को आठवें ग्लोबल ताज इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए तैयार किया जा रहा है, जो 16 से 18 नवंबर तक आयोजित होगा।
छह दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ फिल्म निर्माण की वास्तविक प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिला। इससे उन्हें पर्यटन एवं होटल प्रबंधन की पढ़ाई के साथ रचनात्मक मीडिया और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा विकसित करने का मौका मिला।
कार्यशाला के सफल आयोजन में शिक्षक अमित कुमार साहू, विभा माथुर, साक्षी तिवारी, डॉ. अंजली कुमारी और रंजीत कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कर्मचारी वर्ग से कुलदीप यादव, विशाल गोला, पवन, अलविना, कुलदीप दीक्षित और रजनी ने सहयोग किया। इसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थी भी शामिल रहे।
