अशोक वाटिका में माता जानकी के दर्शन से भावविभोर हुए श्रद्धालु, बजरंगबली के पराक्रम और लंका दहन का भव्य मंचन देखने उमड़े दर्शक
आगरा। श्रीरामलीला महोत्सव 2026 में गुरुवार को बजरंगबली के पराक्रम और माता सीता की खोज से लेकर स्वर्ण लंका दहन तक की लीला का भव्य मंचन किया गया। समुद्र लांघकर लंका पहुंचे हनुमान ने अशोक वाटिका में माता जानकी के दर्शन किए और प्रभु श्रीराम की मुद्रिका देकर उन्हें संदेश दिया।
इसके बाद अशोक वाटिका उजाड़ने, रावण के दरबार में पहुंचने और पूंछ में आग लगाए जाने के प्रसंगों का मंचन हुआ। देखते ही देखते तीन मंजिला स्वर्ण लंका आग की लपटों में घिर गई। लंका के द्वार पर बने दोनों विशाल द्वारपालों के पुतले भी जल उठे।
इस दृश्य को देखकर रामलीला मैदान में मौजूद दर्शकों ने जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारे लगाए। अशोक वाटिका में माता जानकी के स्वरूप, भव्य लंका और एलईडी स्क्रीन पर प्रसारण ने आयोजन को खास बनाया। इस दौरान सामाजिक संगठनों ने भी स्वरूपों की आरती उतारी।https://todaynewstrack.com/2026/10/bajrangbali-parakram-swarn-lanka-dahan-agra-up/
गोस्वामी तुलसीदास की सुंदरकांड की चौपाई ‘प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥’ के भाव के अनुरूप रामलीला मैदान में हनुमान जी की भक्ति और पराक्रम का दृश्य साकार हुआ। उत्तर भारत की प्रमुख श्रीरामलीलाओं में शामिल इस आयोजन में लंका दहन की लीला को भव्य रूप दिया गया।
मैदान में बनाई गई तीन मंजिला स्वर्ण लंका दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही। इसकी बनावट और ऊंचाई देखने के लिए दर्शक उत्सुक नजर आए। लंका के मुख्य द्वार पर बनाए गए दो विशाल द्वारपालों के पुतलों ने भी इसकी भव्यता बढ़ाई। मैदान में प्रवेश करते ही लोगों की निगाहें स्वर्ण लंका पर टिक गईं। वहीं, अशोक वाटिका में विराजमान माता जानकी के स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

समुद्र लांघकर माता जानकी की खोज में पहुंचे हनुमान
लीला का आरंभ समुद्र तट पर पहुंची श्रीराम की वानर सेना के प्रसंग से हुआ। माता सीता की खोज के लिए लंका जाने की जिम्मेदारी हनुमान जी ने संभाली। जामवंत और सुग्रीव की ओर से उन्हें उनकी अपार शक्ति का स्मरण कराने के बाद पवनपुत्र ने प्रभु श्रीराम का नाम लेकर समुद्र लांघने के लिए उड़ान भरी। समुद्र पार कर लंका पहुंचने के बाद उन्होंने माता सीता की खोज शुरू की। विभिन्न स्थानों पर खोज करते हुए वे अशोक वाटिका पहुंचे, जहां माता जानकी विराजमान थीं।
हनुमान जी ने माता सीता को प्रभु श्रीराम की मुद्रिका दी। इससे उन्हें विश्वास हुआ कि हनुमान श्रीराम के दूत हैं और उन्हें रावण के बंधन से मुक्त कराने के लिए प्रभु जल्द ही लंका पहुंचेंगे। इस प्रसंग में माता सीता और हनुमान के संवाद के माध्यम से प्रभु श्रीराम के प्रति विश्वास, भक्ति और समर्पण का चित्रण किया गया। अशोक वाटिका में माता जानकी के दर्शन का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा। लीला के माध्यम से यह भी दिखाया गया कि विपरीत परिस्थितियों में भी प्रभु श्रीराम के प्रति विश्वास बना रहता है।
अशोक वाटिका उजाड़ी, रावण की सेना को दी चुनौती
माता सीता से भेंट करने के बाद हनुमान जी ने अशोक वाटिका में फल खाए और वहां के वृक्षों को उजाड़ना शुरू कर दिया। इस पर रावण की सेना के राक्षस उनसे युद्ध करने पहुंचे। हनुमान जी ने उनका सामना किया और अपनी शक्ति का परिचय दिया। इसके बाद उन्हें बंदी बनाकर रावण के दरबार में प्रस्तुत करने का प्रसंग मंचित किया गया। रावण के दरबार में हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम का संदेश दिया और रावण को उसके कृत्य के परिणामों से अवगत कराने का प्रसंग सामने आया।
रावण ने हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया। इसके बाद उनकी पूंछ में आग लगाई गई। रावण की सेना ने इसे हनुमान जी को अपमानित करने का तरीका समझा, लेकिन यही आग उसकी स्वर्णनगरी के विनाश का कारण बन गई। लीला के इस हिस्से में रावण के अहंकार और हनुमान जी की सूझबूझ तथा पराक्रम का चित्रण किया गया। दर्शक लगातार मंचन देखते रहे और लंका दहन के दृश्य का इंतजार करते रहे।
आग की लपटों में घिरी तीन मंजिला स्वर्ण लंका
पूंछ में आग लगने के बाद हनुमान जी ने उसी अग्नि को रावण की लंका के विरुद्ध अस्त्र बना लिया। वे एक भवन से दूसरे भवन तक पहुंचे और देखते ही देखते स्वर्णनगरी आग की लपटों से घिर गई। मैदान में बनाई गई तीन मंजिला लंका धू-धू कर जलने लगी। उसके मुख्य द्वार पर बनाए गए दोनों विशाल द्वारपालों के पुतले भी आग की चपेट में आ गए। आग की लपटों के बीच लंका दहन का दृश्य देखने के लिए दर्शक अपनी जगह पर ठहर गए। भव्य संरचना के जलने के साथ मैदान में उत्साह बढ़ गया।
लंका दहन के दौरान बैंड-बाजों की धुन गूंजने लगी। दर्शकों ने खड़े होकर जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारे लगाए। पूरा रामलीला मैदान भक्तिमय माहौल में डूब गया। जगह-जगह से श्रीराम के नाम का उद्घोष सुनाई देने लगा। लंका दहन के प्रसंग ने दर्शकों को रामायण की उस घटना से जोड़ा, जिसमें हनुमान जी ने माता सीता का पता लगाने के बाद रावण की शक्ति और अहंकार को चुनौती दी थी।
इस दौरान व्यासपीठ से गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई ‘लंका जारि असुर दल मारे। रामचंद के काज संवारे॥’ भी सुनाई गई। सुंदरकांड की चौपाइयों के साथ मंचन आगे बढ़ा। चौपाइयों और लीला के दृश्यों ने धार्मिक प्रसंग को और प्रभावशाली बनाया। दर्शकों ने जयकारों के साथ लीला का आनंद लिया।
एलईडी स्क्रीन पर भी दिखा मंचन
रामलीला मैदान में मुख्य मंच के साथ दोनों ओर एलईडी स्क्रीन लगाई गई थीं। इन पर भी लीला का प्रसारण किया गया, जिससे दूर बैठे दर्शक भी प्रसंगों को स्पष्ट रूप से देख सके। मंच की सजावट, अशोक वाटिका में माता जानकी का स्वरूप और तीन मंजिला स्वर्ण लंका आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे। लंका दहन के समय आग की लपटों और जयकारों से मैदान का माहौल उत्साहपूर्ण हो गया। दर्शकों को मुख्य मंच के अलावा एलईडी स्क्रीन के माध्यम से भी लीला देखने का अवसर मिला।
सामाजिक संगठनों ने उतारी स्वरूपों की आरती
श्रीरामलीला महोत्सव में सामाजिक संगठनों की सहभागिता भी लगातार बढ़ रही है। गुरुवार को भारत विकास परिषद संस्कार, अग्रवाल संगठन कमला नगर, किन्नर समाज, श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी और आगरा फार्मा की ओर से स्वरूपों की आरती उतारी गई। धार्मिक आयोजन में विभिन्न संगठनों की भागीदारी ने कार्यक्रम को सामूहिक स्वरूप दिया। रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु लीला के विभिन्न प्रसंगों को देखने पहुंचे।
ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, मुख्य संरक्षक जगदीश बागला, अजय अग्रवाल बीएन ग्रुप, ताराचंद, प्रवीण स्वरूप, भगवानदास बंसल, मुकेश जौहरी, अंजुल बंसल, विष्णु दयाल, राहुल गौतम, आनंद मंगल, राकेश जैन, दिलीप अग्रवाल, रामांशु शर्मा, विकास, प्रकाश चंद्र, गिरधर शरण, तपिश और मनोज अग्रवाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
रामलीला में आज
रामलीला कमेटी के मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि शनिवार को विभीषण शरणागति, रामेश्वर पूजन, सेतु बंधन और अंगद-रावण संवाद की लीला का मंचन किया जाएगा। इन प्रसंगों में विभीषण के श्रीराम की शरण में आने, रामेश्वर पूजन, समुद्र पर सेतु निर्माण और अंगद के रावण के दरबार में संवाद से जुड़े दृश्य प्रस्तुत किए जाएंगे।
