आगरा। श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव 2026 के तहत गुरुवार को निकली श्री राम वरयात्रा के स्वागत में शमशाबाद का ग्रामीण अंचल जनकपुर में बदल गया। लगभग आठ किलोमीटर की यात्रा कर पहली बार शमशाबाद पहुंचे प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों के स्वागत के लिए घरों को सजाया गया।
रास्ते में जगह-जगह पुष्पवर्षा, आरती और जय श्रीराम के उद्घोष के बीच 50 से अधिक सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने नारियल फोड़कर और स्वरूपों की आरती उतारकर वरयात्रा का शुभारंभ किया। ऋषि वशिष्ठ के स्वरूप में विराजमान महंत योगेश पुरी ने स्वरूपों को मेवा-मिष्ठान खिलाकर मंगल तिलक किया। शुक्रवार सुबह 11 बजे शमशाबाद की शिव वाटिका में बनाए गए जनक महल में तुलसी-शालिग्राम विवाह का आयोजन होगा।https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/agra/shri-ram-barat-to-cover-8-km-in-agra-with-over-51-tableaux-agra-up-2026-09-21

रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जाननिहारा॥ रामचरितमानस की इन पंक्तियों में व्यक्त प्रेम और श्रद्धा की भावना श्री राम वरयात्रा के दौरान शमशाबाद में दिखाई दी। प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाहोत्सव की परंपरा से जुड़े इस आयोजन को लेकर ग्रामीणों में उत्साह रहा। घरों के द्वार पर रंगोलियां बनाई गईं, बंदनवार सजाए गए और बिजली की रंग-बिरंगी झालरों से मकानों तथा गलियों को रोशन किया गया।
वरयात्रा के पहुंचने से पहले ही स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। जैसे-जैसे प्रभु के स्वरूपों की यात्रा आगे बढ़ी, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की भागीदारी भी दिखाई दी। किसी ने आरती उतारी तो किसी ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। कई स्थानों पर परिवारों ने एक साथ पहुंचकर प्रभु के दर्शन किए।
श्री मनःकामेश्वर ग्रामीण संस्थान, गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड से वरयात्रा की शुरुआत हुई। मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने नारियल फोड़कर आयोजन का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रभु श्रीराम सहित सभी स्वरूपों की आरती उतारी। इसके बाद ऋषि वशिष्ठ के स्वरूप में विराजमान महंत योगेश पुरी ने प्रभु श्रीराम, माता सीता और अन्य स्वरूपों को मेवा-मिष्ठान खिलाया तथा मंगल तिलक किया।
धार्मिक परंपरा के अनुसार विदाई की रस्म पूरी करने के बाद वरयात्रा को जनकपुर के लिए रवाना किया गया। मठ प्रशासक हरिहर पुरी सभी बारातियों और श्रद्धालुओं को साथ लेकर शमशाबाद की ओर बढ़े। यात्रा शुरू होते ही जय श्रीराम के उद्घोष से आसपास का क्षेत्र गूंज उठा।
हर ओर आरती और पुष्पवर्षा से स्वागत
वरयात्रा का मार्ग में जगह-जगह स्वागत किया गया। श्रद्धालु आरती की थालियां सजाकर प्रभु के स्वरूपों के दर्शन के लिए खड़े रहे। कई स्थानों पर पुष्पवर्षा की गई। घरों के बाहर और गलियों में सजावट के बीच निकलती वरयात्रा को देखने के लिए ग्रामीणों में उत्साह रहा। स्वागत का यह सिलसिला किसी एक स्थान तक सीमित नहीं था। मार्ग में अलग-अलग जगहों पर स्थानीय परिवारों और श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के अनुसार स्वागत किया। कहीं आरती उतारी गई, कहीं फूल बरसाए गए और कहीं हाथ जोड़कर प्रभु के दर्शन किए गए।https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/agra/story-preparations-lag-for-shri-ramleela-event-mayor-inspects-venue-amid-concerns-201790000701895.html
शमशाबाद में घरों के द्वार पर बनाई गई रंगोलियां और सजाए गए बंदनवार विवाहोत्सव का माहौल बना रहे थे। मकानों पर लगी रंग-बिरंगी बिजली की झालरों से गलियां जगमगा उठीं। पूरा ग्रामीण अंचल मानो प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह के लिए सजाया गया हो। श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह और प्रभु के दर्शन की लालसा दिखाई दी। आठ किलोमीटर की यात्रा के दौरान धार्मिक आस्था और सामूहिक भागीदारी आयोजन की विशेषता रही। वरयात्रा में शामिल स्वरूपों के दर्शन के लिए लोगों ने अपने घरों और रास्तों पर जगह-जगह स्वागत की व्यवस्था की।
50 से अधिक झांकियों में दिखी देश की सांस्कृतिक विविधता
श्री राम वरयात्रा में 50 से अधिक सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक झांकियां शामिल रहीं। इन झांकियों के माध्यम से भारतीय परंपराओं, धार्मिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया। विभिन्न प्रदेशों की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को दर्शाती झांकियों ने लोगों का ध्यान खींचा। असम, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की झांकियों में अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक झलक देखने को मिली।

इन झांकियों के कारण वरयात्रा का स्वरूप केवल धार्मिक शोभायात्रा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को सामने लाने वाला आयोजन भी बना। अलग-अलग प्रदेशों की झांकियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की व्यापकता और विविधता में एकता का भाव प्रस्तुत किया गया। धार्मिक विषयों के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेशों को भी स्थान दिया गया। वरयात्रा को देखने पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए ये झांकियां आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं।
ग्रामीण बालिकाओं का नवदेवियों के स्वरूप में सजना भी वरयात्रा की खास विशेषताओं में शामिल रहा। नौ देवियों के रूप में तैयार बालिकाओं ने शक्ति, श्रद्धा और नारी सम्मान का संदेश दिया। धार्मिक परंपराओं से जुड़ी इस प्रस्तुति ने वरयात्रा में अलग रंग जोड़ा। सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विषयों को एक साथ प्रस्तुत करने वाली झांकियों ने आयोजन को व्यापक स्वरूप दिया।
पहली बार आठ किलोमीटर की यात्रा कर शमशाबाद पहुंची वरयात्रा
श्री मनःकामेश्वर मठ के प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि श्री राम वरयात्रा को पहली बार लगभग आठ किलोमीटर की यात्रा कर शमशाबाद लाने की व्यवस्था की गई। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में रामकथा की परंपरा का विस्तार करना और अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति से जोड़ना है। वरयात्रा के माध्यम से धार्मिक आयोजन को ग्रामीण अंचल तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। शमशाबाद में लोगों की भागीदारी और स्वागत की तैयारियों के बीच यात्रा का जनकपुर पहुंचना आयोजन का प्रमुख हिस्सा रहा।
हरिहर पुरी के अनुसार, वरयात्रा के बाद शुक्रवार को विवाह से जुड़ा धार्मिक आयोजन किया जाएगा। इसके लिए शमशाबाद स्थित शिव वाटिका में जनक महल तैयार किया गया है। जनकपुर के स्वरूप में सजाए गए परिसर में धार्मिक परंपराओं के अनुरूप तुलसी-शालिग्राम विवाह की तैयारियां की गई हैं।
शुक्रवार को जनक महल में होगा तुलसी-शालिग्राम विवाह
शुक्रवार सुबह 11 बजे शिव वाटिका में निर्मित जनक महल में तुलसी-शालिग्राम विवाह का भव्य आयोजन होगा। इसके लिए परिसर को जनकपुर के स्वरूप में सजाया गया है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार विवाह आयोजन की तैयारियां पूरी की गई हैं। श्री राम वरयात्रा के माध्यम से शमशाबाद में बनाए गए विवाहोत्सव के माहौल के बाद अब श्रद्धालुओं की निगाहें तुलसी-शालिग्राम विवाह पर रहेंगी।https://www.jagran.com/uttar-pradesh/agra-city-shri-ram-barat-on-october-6-with-over-200-tableaux-and-bands-participating-40359535.html
श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव के इस आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और सामाजिक सहभागिता की झलक देखने को मिली। प्रभु के स्वरूपों का स्वागत करने के लिए घरों की सजावट, मार्ग में आरती और पुष्पवर्षा तथा विभिन्न प्रदेशों की झांकियों ने वरयात्रा को विशेष स्वरूप दिया। शमशाबाद में पहली बार लगभग आठ किलोमीटर की यात्रा कर पहुंची श्री राम वरयात्रा ने ग्रामीण क्षेत्र में रामकथा की परंपरा को विस्तार देने और अधिक लोगों को सनातन संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य को सामने रखा। शुक्रवार को जनक महल में होने वाला तुलसी-शालिग्राम विवाह इसी धार्मिक आयोजन की अगली कड़ी होगा।
