आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज में 40 वर्षीय मरीज की किडनी में ट्यूमर का जटिल ऑपरेशन कर स्वस्थ किडनी को बचा लिया गया। लैप्रोस्कोपिक असिस्टेड पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी तकनीक से किए गए इस ऑपरेशन में ट्यूमर को निकाल दिया गया, जबकि किडनी को पूरी तरह निकालने की जरूरत नहीं पड़ी। मरीज की हालत ऑपरेशन के बाद ठीक है।
खास बात यह है कि मरीज को पहले बाहर इलाज कराने पर करीब छह लाख रुपये खर्च होने और दिल्ली जाने की सलाह दी गई थी। आर्थिक चुनौतियों के बीच मरीज एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंचा, जहां उसका सफल उपचार किया गया।https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/agra/life-saved-by-removing-stomach-cancer-one-kidney-and-a-25-kg-tumor-agra-news-c-25-1-agr1036-1057988-2026-05-14
एसएन मेडिकल कॉलेज में इस सर्जरी को आधुनिक यूरोलॉजी सेवाओं के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों की मदद से जटिल मामलों का उपचार किया जा रहा है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करने की जरूरत कम हो रही है।https://www.aajtak.in/health/story/safdarjung-hospital-robotic-surgery-team-of-doctors-removed-big-tumor-read-details-ntcpmm-dskc-2227570-2025-04-28

डॉ. विजय त्यागी ने बताया कि आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वय से जटिल मामलों का उपचार एसएन मेडिकल कॉलेज में ही सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इससे मरीजों को बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और उन्हें स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकती हैं।
डॉ. अभिषेक पाठक ने बताया कि किडनी में छोटी और सीमित गांठ होने पर उपयुक्त मरीजों में पूरी किडनी निकालने के बजाय केवल ट्यूमर निकालकर किडनी को बचाया जा सकता है। पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी का उद्देश्य कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाने के साथ स्वस्थ किडनी की कार्यक्षमता को सुरक्षित रखना है।
हालांकि, हर मरीज में इस तकनीक का इस्तेमाल संभव नहीं होता। उपचार का निर्णय ट्यूमर के आकार, उसकी स्थिति, जटिलता और मरीज के स्वास्थ्य के आधार पर लिया जाता है।

सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया संबंधी देखभाल में डॉ. अतिहार्ष मोहन, डॉ. प्रभा और डॉ. अमिता त्यागी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि संस्थान का निरंतर प्रयास है कि मरीजों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।https://www.amarujala.com/lucknow/rare-robotic-kidney-cancer-surgery-performed-at-lohia-institute-lucknow-news-c-13-lko1070-1763405-2026-06-02
इस सफल सर्जरी से किडनी में ट्यूमर से पीड़ित मरीजों के लिए किडनी बचाने वाले उपचार की संभावनाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी में ट्यूमर होने पर समय पर जांच कराना और विशेषज्ञ यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना जरूरी है। जांच के बाद ही तय किया जाता है कि मरीज के लिए कौन-सा उपचार उपयुक्त रहेगा।
