तीन जागरूकता रथ गांव-गांव जाकर किसानों को बताएंगे फसल अवशेष प्रबंधन के तरीके
सुपर सीडर और हैप्पी सीडर की भी देंगे जानकारी
आगरा। फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली और अन्य अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग खाद और दूसरे कामों में किया जा सकता है। किसानों को इसके तरीके बताने के लिए कृषि विभाग ने फसल अवशेष प्रबंधन योजना वर्ष 2026-27 के तहत तीन जागरूकता प्रचार रथ रवाना किए हैं। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने शुक्रवार को कैम्प कार्यालय से हरी झंडी दिखाकर वाहनों को रवाना किया। ये रथ जिले की सभी तहसीलों और विकास खंडों में जाकर किसानों को पराली, गन्ने की पत्तियों और अन्य फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने की जानकारी देंगे।
गांव-गांव पहुंचेंगे जागरूकता रथ
केंद्र सरकार की प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू योजना के तहत जिले में प्रचार अभियान चलाया जाएगा। इन वाहनों में ऑडियो-विजुअल साधन और लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। इनके माध्यम से किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के तरीके बताए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान की जानकारी देना और उन्हें वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
सुपर सीडर और हैप्पी सीडर की जानकारी
प्रचार रथों के माध्यम से किसानों को सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और पराली बेलर जैसे कृषि यंत्रों के बारे में बताया जाएगा। कृषि विभाग की ओर से अनुदान पर उपलब्ध इन यंत्रों की जानकारी भी दी जाएगी, ताकि किसान अपनी जरूरत के अनुसार इनका इस्तेमाल कर सकें। इनकी मदद से फसल अवशेषों को खेत में मिलाने या एकत्र करने में सहायता मिलती है। इससे पराली जलाने की जरूरत कम की जा सकती है।http://Burning crop residues will reduce soil fertility.
खाद और पशु चारे में भी उपयोग
फसल अवशेषों को जलाने के बजाय जैविक खाद बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए किसानों को डी-कंपोजर जैसे विकल्पों की जानकारी दी जाएगी। पराली का उपयोग पशु चारे और अन्य कामों में भी किया जा सकता है। वैज्ञानिक तरीके से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने से उनका बेहतर इस्तेमाल संभव है और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
मिट्टी और हवा दोनों को नुकसान
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने किसानों से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में पराली न जलाएं। उन्होंने कहा कि आने वाला समय फसल अवशेष प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और आम लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। खेतों में अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए किसान फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं।

पराली जलाना दंडनीय अपराध
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है। कृषि विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी किसानों के संपर्क में रहकर उन्हें फसल अवशेष प्रबंधन की वैज्ञानिक और प्रभावी विधियों की जानकारी देंगे। जागरूकता रथ गांव-गांव पहुंचकर किसानों को पराली न जलाने और उपलब्ध विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।
पराली मुक्त जिला बनाने में किसानों की भूमिका
जिलाधिकारी ने उम्मीद जताई कि जिले के किसान फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूकता दिखाएंगे और पराली जलाने से बचेंगे। किसानों की भागीदारी से जिले में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है। उन्होंने किसानों से फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग करने के तरीके अपनाने की अपील की।
प्रचार वाहनों को रवाना किए जाने के अवसर पर उप कृषि निदेशक मुकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार सहित कृषि विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
