आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर स्थित डायमंड जुबली हॉल में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के मानव दर्शन और भविष्य के भारत विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने युवाओं से एकात्म मानव दर्शन, अंत्योदय, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के विचारों को समझने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया। कुलपति प्रो. आशु रानी ने विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की बात कही। संगोष्ठी में शिक्षा, कौशल विकास, संस्कृति और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता पर विचार रखे गए।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर स्थित डायमंड जुबली हॉल में शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मभूमि स्मारक समिति, दीनदयाल धाम, फरह, मथुरा और दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी का विषय ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मानव दर्शन और भविष्य का भारत’ रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को उनके विचारों और दर्शन से परिचित कराना तथा जीवन मूल्यों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने की। उन्होंने कहा कि युवाओं को आगे आकर विकास की प्रक्रिया का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प लेना चाहिए। युवा शक्ति ही भारत के भविष्य की दिशा तय करेगी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय की अवधारणा को अपनाकर ही समावेशी विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
एकात्म मानव दर्शन को वर्तमान परिस्थितियों में समझने पर जोर
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के इतिहास विभाग के प्रो. शिव कुमार मिश्रा ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और समग्र विकास की भावना भारत के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विद्यार्थियों को उनके दर्शन को वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय परिस्थितियों के संदर्भ में समझना चाहिए। साथ ही इन विचारों को जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं प्रचारक डॉ. दिनेश ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और जीवन प्रसंगों के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृति और सिद्धांतों का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार राष्ट्र की रीढ़ हैं। इन्हें जीवन के व्यावहारिक पक्ष में उतारना जरूरी है। ऐसा होने पर विकसित भारत की कल्पना को साकार करने में मदद मिलेगी।
स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान
डॉ. कमल कौशिक ने युवाओं से विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, विवेक और समझदारी के साथ समस्याओं का समाधान खोजने को कहा। उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को प्रोत्साहित करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाने का आह्वान किया। उनके संबोधन में युवाओं को कठिन परिस्थितियों का सामना समझदारी से करने और अपने निर्णयों में विवेक का इस्तेमाल करने की सीख दी गई।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान के निदेशक डॉ. मनोज राठौर ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने युवाओं के विकास में कौशल आधारित शिक्षा और प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी में रखे गए विचारों में युवाओं की भूमिका, शिक्षा, स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और समाज के सभी वर्गों तक विकास का लाभ पहुंचाने जैसे विषय प्रमुख रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. रजनीश त्यागी ने किया। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के मानव दर्शन की वर्तमान समय में प्रासंगिकता को रेखांकित किया। संगोष्ठी के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके विचारों और जीवन मूल्यों को समझने तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।http://How Will the Dream of a Developed India Be Fulfilled? National Seminar on Deendayal Upadhyaya’s Ideas
कार्यक्रम में जन्मभूमि स्मारक समिति के मंत्री केशव शर्मा, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य प्रो. निर्मला दीक्षित, समाजसेवी प्रो. वेद त्रिपाठी, नरेंद्र शर्मा, आरती शर्मा और मोहन सिंह चाहर उपस्थित रहे। इनके अलावा शिक्षक डॉ. तपस्या चौहान, डॉ. नीरज कुशवाहा, डॉ. भरत सिंह, डॉ. रत्न पांडे, डॉ. राधिका गोयल, डॉ. रेखा, शिवि, अखिल और हीरेश कुमार भी मौजूद रहे।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को समझने और उन्हें व्यवहार में उतारने की आवश्यकता बताई। युवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने, स्वदेशी को अपनाने, कौशल विकसित करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय की अवधारणा को भविष्य के भारत के निर्माण से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।
