सेमिनार में राष्ट्र निर्माण, शिक्षा और कश्मीर से जुड़े योगदान को किया याद
आज 500 विद्यार्थी चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता में लेंगे भाग
आगरा। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर हरिपर्वत स्थित एमडी जैन इंटर कॉलेज के सभागार में दो दिवसीय जन्मजयंती समारोह की शुरुआत हुई। सर्वहितकारी शिक्षा प्रसार समिति की ओर से संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित समारोह के पहले दिन सेमिनार, सांस्कृतिक कार्यक्रम और डॉ. मुखर्जी के जीवन पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
वक्ताओं ने उनके शिक्षा, राष्ट्र निर्माण और कश्मीर से जुड़े योगदान को याद किया। शुक्रवार को समारोह के दूसरे दिन विभिन्न विद्यालयों के करीब 500 विद्यार्थी चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता में भाग लेंगे।

दीप प्रज्वलित कर हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन राज्यसभा सांसद नवीन जैन, प्रधानाचार्य डॉ. संजय गर्ग, उपनिदेशक युवा कल्याण वीसी श्रीवास्तव और एसएन मेडिकल कॉलेज के वित्त निदेशक शिवनाथ सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद सेमिनार और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और उनके सार्वजनिक योगदान से परिचित कराया गया।
33 वर्ष की उम्र में बने कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति
मुख्य अतिथि नवीन जैन ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी देश के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री रहे। उन्होंने कम उम्र में ही शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। 33 वर्ष की आयु में उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति का दायित्व संभाला।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1943 में बंगाल के अकाल के दौरान डॉ. मुखर्जी ने राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 23 जून 1953 को कश्मीर में उनकी मृत्यु हुई। उन्होंने राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित किया।http://The call for ‘One Nation, One Constitution’
‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’
भाजपा के ब्रज प्रांत उपाध्यक्ष यादवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की एकता के लिए ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’ का संदेश दिया था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में लागू विशेष व्यवस्था का विरोध किया और राष्ट्रीय एकता को अपने सार्वजनिक जीवन का प्रमुख विषय बनाया।

उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन देश की एकता और अखंडता के लिए किए गए संघर्ष से जुड़ा रहा। कार्यक्रम के दौरान ‘जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वह कश्मीर हमारा है’ के नारे भी गूंजे।
25 मिनट की फिल्म में दिखाई जीवन यात्रा
आयोजन सचिव धर्मराज सिंह ने बताया कि बच्चों को डॉ. मुखर्जी के जीवन और उनके योगदान से परिचित कराने के उद्देश्य से दूरदर्शन द्वारा निर्मित करीब 25 मिनट की लघु फिल्म दिखाई गई। फिल्म में उनके जीवन, शिक्षा, राष्ट्र निर्माण में योगदान और कश्मीर से जुड़े विचारों को सामने रखा गया।
उन्होंने बताया कि समारोह का उद्देश्य विद्यार्थियों को डॉ. मुखर्जी के जीवन और उनके विचारों से जोड़ना है। इसी क्रम में सेमिनार के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
सेमिनार में वक्ताओं ने बताए जीवन के अलग-अलग पहलू
सेमिनार में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय मंत्री राहुल चौधरी, योगेश शर्मा, निखिल जैन, डॉ. घनश्याम सिंह, डॉ. आलोक जैन और डॉ. वेद प्रकाश त्रिपाठी ने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के शिक्षा के क्षेत्र में योगदान और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने कम उम्र में ही शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बाद सार्वजनिक जीवन में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। विद्यार्थियों को उनके जीवन से शिक्षा और राष्ट्र सेवा की प्रेरणा लेने की बात कही गई।
500 विद्यार्थी चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता में लेंगे भाग
बोर्ड सदस्य कृष्णकांत तिवारी ने बताया कि शुक्रवार को विभिन्न विद्यालयों के करीब 500 विद्यार्थी चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता में भाग लेंगे। विद्यार्थी अपने चित्रों और निबंधों के माध्यम से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों, राष्ट्र सेवा, शिक्षा और विरासत को अभिव्यक्त करेंगे।
चित्रकला प्रतियोगिता में विद्यार्थी उनके जीवन और राष्ट्र निर्माण से जुड़े प्रसंगों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे। वहीं निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थी उनके जीवन और योगदान को अपने शब्दों में सामने रखेंगे।
विद्यार्थियों को इतिहास और राष्ट्र सेवा से जोड़ने की पहल
आयोजकों के अनुसार समारोह के माध्यम से विद्यार्थियों को देश के इतिहास और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है। सेमिनार और फिल्म प्रदर्शन के जरिए उनके जीवन के प्रमुख पक्षों की जानकारी दी गई, जबकि प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता के साथ उनके विचारों को समझने का अवसर मिलेगा।
दो दिवसीय समारोह में पहले दिन विचार और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए डॉ. मुखर्जी के जीवन को सामने रखा गया। दूसरे दिन विद्यार्थियों की भागीदारी से चित्रकला और निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी।
कार्यक्रम का संचालन रिनेश मित्तल ने किया। इस अवसर पर प्रतिभा जिंदल, पीयूष कुमार सिंह, नम्रता सिंह, चेतना सिंह, नितिन जैन, डीआर सिंह आदि उपस्थित रहे।
