पंडाल में उमड़े सैकड़ों लोग, संत रविदास के भजनों पर झूमे श्रद्धालु
नई पीढ़ी से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक ने लिया समरसता का संदेश
आगरा। संत शिरोमणि गुरु रविदास महासभा की ओर से संत रविदास महाराज की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय समरसता महोत्सव का अंतिम दिन भक्ति, आस्था और सामाजिक समरसता के संदेश से सराबोर रहा।
बीएसएनएल ग्राउंड, तारघर चौराहा पर आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों से पंडाल खचाखच भर गया, जबकि बड़ी संख्या में लोग बाहर खड़े होकर भी कार्यक्रम से जुड़े रहे। संत रविदास के भजनों और उनकी वाणी से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्र कार्यवाह, पश्चिमी उत्तर प्रदेश डॉ. प्रमोद शर्मा के बौद्धिक सत्र से हुआ। उन्होंने सामाजिक समरसता को केवल मंचों और आयोजनों तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन के व्यवहार में उतारने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर देशभर में सामाजिक समरसता का भाव मजबूत करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से संदेश दिया जा रहा है। कन्याकुमारी से लेकर असम तक अनेक स्थानों पर समरसता के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश में कोई व्यक्ति केवल किसी जाति या समाज का सदस्य नहीं, बल्कि सबसे पहले भारत माता का पुत्र है। जब यह भाव व्यवहार में आएगा, तभी वास्तविक सामाजिक समरसता स्थापित होगी।
मुख्य वक्ता, भारत के प्रथम राष्ट्र मंदिर विश्व रामायण आश्रम, दिल्ली के संस्थापक भाई अजय ने हनुमान चालीसा के पाठ के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। रामधुन के साथ उन्होंने मेरे तो गिरधर गोपाल और पायो जी मैंने राम रतन धन पायो जैसे भजनों का संगीतमय गायन किया तो पूरा पंडाल भक्तिभाव में डूब गया। श्रद्धालु भजनों के साथ झूमते और जयकारे लगाते नजर आए।
भाई अजय ने कहा कि ब्रजभूमि हमारे आराध्य की भूमि है और यहां की संस्कृति का मूल ही भक्ति है। हर व्यक्ति में परमात्मा के दर्शन करने की दृष्टि विकसित होनी चाहिए। जिसके भीतर यह दृष्टि आ जाती है, वही सच्चे अर्थों में संत कहलाता है।
उन्होंने कहा कि संत रविदास प्रेम, भक्ति और निर्मलता की मूर्ति थे। उनके जीवन आदर्श जिस समय प्रासंगिक थे, उतने ही आज भी हैं। संत-महात्माओं की वाणी पुष्प की सुगंध की तरह होती है, जो समय बीतने के साथ भी अपनी खुशबू फैलाती रहती है।
कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि संत रविदास ने अपने जीवन और कर्मों से समाज को समानता, मानवता और भक्ति का मार्ग दिखाया। उनकी शिक्षाएं आज की पीढ़ी के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक भेदभाव समाप्त करने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतर आवश्यकता है।
मिलेनियम से अल्फा तक, जुड़ा हर उम्र का वर्ग
सचिव अभिनव मौर्य ने कहा कि समरसता महोत्सव की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि संत रविदास का संदेश मंच और पंडाल की सीमाओं से निकलकर समाज के हर वर्ग और हर पीढ़ी तक पहुंचा। अंतिम दिन पंडाल के भीतर जितने लोग मौजूद थे, उससे कहीं अधिक लोग बाहर खड़े होकर कार्यक्रम से जुड़े रहे।
बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक की भागीदारी ने साबित किया कि संत रविदास के विचार आज भी समाज को जोड़ने की अद्भुत शक्ति रखते हैं।
उन्होंने कहा कि जेन-जी और अल्फा पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और संत परंपरा से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है। आधुनिक तकनीक के दौर में उन्हें केवल डिजिटल दुनिया का हिस्सा नहीं, बल्कि अपने संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़ा जागरूक नागरिक बनाना होगा।
संत रविदास की समानता, मानवता, भक्ति और भेदभाव मुक्त समाज की कल्पना नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है। हमारा प्रयास है कि महोत्सव तीन दिनों तक सीमित न रहे, बल्कि संत रविदास का संदेश बच्चों और युवाओं के व्यवहार और जीवन का हिस्सा बने।
अध्यक्ष रमेश कर्दम ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि तीन दिवसीय समरसता महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब इस बात का संकेत है कि समाज में सकारात्मक बदलाव की लहर चल रही है। जाति के भेदभाव की दीवारें कमजोर हो रही हैं और लोग सामाजिक समरसता के भाव से जुड़ रहे हैं।
बच्चियों ने निबंध प्रतियोगिता में मारी बाजी
प्रचार प्रमुख विजय सामा ने बताया कि संत रविदास के कृतित्व और व्यक्तित्व पर शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों में निबंध प्रतियोगिता आयोजित कराई गई थी। इसमें बालिकाओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बाजी मारी।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 30 बालिकाओं को मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके अलावा समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले 27 समाजसेवियों का भी सम्मान किया गया।
इनका रहा सहयोग
तीन दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में प्रचार प्रमुख विजय सामा, स्वागत महामंत्री हर्ष दिवाकर, सोशल मीडिया प्रमुख प्रमोद महाजन, संरक्षक मनोज राजोरा, समरसता महोत्सव समिति के उपाध्यक्ष एडवोकेट अशोक चौबे, राकेश जाटव, डॉ. निष्ठा शर्मा, अंजली, अभिषेक कोटिया, सोनू डोगरा आदि ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
