S-MDSR की राज्य स्तरीय जोनल कार्यशाला में मातृ मृत्यु और मृतजन्म के कारणों की पहचान से लेकर रिपोर्टिंग, उपचार और रेफरल तक सिखाई गई प्रक्रिया
आगरा। मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से स्टिलबर्थ एंड मैटरनल डेथ सर्विलांस एंड रिस्पांस (S-MDSR) के अंतर्गत तीसरी स्टेट ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) जोनल कार्यशाला आयोजित की गई। प्रदेश को व्यापक स्तर पर कवर करने के लिए आगरा को तीन प्रमुख जोनल केंद्रों में शामिल किया गया। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पहुंचे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को मातृ मृत्यु तथा मृतजन्म के कारणों की पहचान, निगरानी, रिपोर्टिंग, समीक्षा, समयबद्ध उपचार और प्रभावी रेफरल व्यवस्था की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विशेषज्ञों ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रतिभागियों को व्यावहारिक जानकारी दी।
कार्यशाला में एसएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह, डॉ. आशा निगम और डॉ. संगीता साहू ने मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाई। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को गर्भावस्था तथा प्रसव के दौरान सामने आने वाली जटिल परिस्थितियों की पहचान और उनके समय पर प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। मातृ मृत्यु और मृतजन्म के पीछे जिम्मेदार कारणों को समझने के साथ उनकी निगरानी और सही तरीके से रिपोर्टिंग की प्रक्रिया पर भी प्रशिक्षण दिया गया।

S-MDSR व्यवस्था का उद्देश्य केवल मृत्यु के आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि प्रत्येक घटना से जुड़े कारणों को समझकर स्वास्थ्य सेवाओं में आवश्यक सुधार करना है। इसी दृष्टिकोण को प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी मातृ मृत्यु या मृतजन्म की घटना की व्यवस्थित समीक्षा से उन कारणों की पहचान की जा सकती है, जिनमें समय रहते हस्तक्षेप करके भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम करने की संभावना रहती है। इसके लिए रिपोर्टिंग की गुणवत्ता, समीक्षा की प्रक्रिया और प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को महत्वपूर्ण माना गया।
प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सकों को समयबद्ध उपचार की जरूरत पर विशेष जानकारी दी गई। गर्भावस्था और प्रसव के दौरान गंभीर स्थिति सामने आने पर मरीज की स्थिति को जल्दी पहचानना, आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर करना महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञों ने प्रभावी रेफरल व्यवस्था के व्यावहारिक पहलुओं पर भी प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया, ताकि गंभीर मामलों में उपचार के लिए अनावश्यक देरी न हो।
प्रदेश में प्रशिक्षण को व्यापक पहुंच देने के लिए आगरा को तीन प्रमुख जोनल केंद्रों में शामिल किया गया। इससे विभिन्न जनपदों से आए प्रतिभागियों को एक ही मंच पर विशेषज्ञों से प्रशिक्षण लेने का अवसर मिला। राज्य स्तर की प्रशिक्षण व्यवस्था में जोनल केंद्रों की भूमिका इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि इससे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को एक समान प्रक्रिया और मानकों की जानकारी दी जा सकती है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाना संस्थान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। चिकित्सकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का इस तरह का प्रशिक्षण प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से जमीनी स्तर पर मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिलेगी।
कार्यशाला में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने सर्विलांस और रिस्पांस प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए घटनाओं की समय पर सूचना, सही दस्तावेजीकरण, कारणों की समीक्षा और उसके आधार पर सुधारात्मक कदम उठाने की प्रक्रिया को समझाया। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य तंत्र में मौजूद कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए व्यावहारिक उपाय विकसित करना है।
मातृ मृत्यु के मामलों में गर्भावस्था से लेकर प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि तक कई स्तरों पर निगरानी की जरूरत होती है। प्रशिक्षण में इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से समझाया गया। चिकित्सकों को संभावित जोखिम वाले मामलों की पहचान, आवश्यक चिकित्सकीय प्रबंधन और आवश्यकता के अनुसार उच्च स्तरीय स्वास्थ्य केंद्र से समन्वय स्थापित करने की जानकारी दी गई। इसी तरह मृतजन्म के मामलों की समीक्षा के दौरान संभावित कारणों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पहलुओं को समझने पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों के लिए प्रशिक्षण को व्यावहारिक बनाने पर भी ध्यान दिया गया। केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय वास्तविक परिस्थितियों में निर्णय लेने की प्रक्रिया, रिपोर्टिंग से जुड़े पहलुओं और मरीजों को समय पर उचित केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्यकर्मियों के सामने आने वाली संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उनके समाधान से जुड़े सुझाव भी साझा किए।
S-MDSR के प्रभावी संचालन में चिकित्सकों के साथ स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण है। कार्यशाला में इस समन्वय की भूमिका पर जोर दिया गया, ताकि किसी घटना की जानकारी मिलने के बाद उसका विश्लेषण और समीक्षा व्यवस्थित तरीके से हो सके। प्राप्त जानकारी के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में जरूरी बदलाव किए जा सकें और भविष्य में जोखिम को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर व्यवस्था विकसित की जा सके।
प्रशिक्षण के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में समय महत्वपूर्ण होता है। जटिलता की पहचान में देरी, उपचार शुरू होने में विलंब या रेफरल के दौरान समन्वय की कमी गंभीर परिणामों का कारण बन सकती है। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने के साथ रेफरल नेटवर्क को प्रभावी बनाना जरूरी है। प्रशिक्षण में इसी पूरी श्रृंखला को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए चिकित्सकों और अन्य प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी इसमें मौजूद रहे। प्रतिभागियों को S-MDSR के तहत मातृ मृत्यु और मृतजन्म से संबंधित निगरानी, रिपोर्टिंग और समीक्षा की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। एसएन मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान अपने अनुभव और चिकित्सकीय जानकारी साझा की।
कार्यशाला के माध्यम से एसएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में अपनी विशेषज्ञ भूमिका निभाई। आगरा जोन में आयोजित प्रशिक्षण का उद्देश्य विभिन्न जिलों के स्वास्थ्यकर्मियों को ऐसी प्रक्रिया से परिचित कराना रहा, जिसके माध्यम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी अधिक व्यवस्थित हो और गंभीर मामलों में समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी को प्रतिभागी अपने-अपने जनपदों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मियों तक पहुंचाएंगे, जिससे सर्विलांस एवं रिस्पांस प्रणाली को स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सके।
