आगरा। रक्षा लेखा विभाग के 279वें स्थापना दिवस पर गुरुवार को आगरा में रक्षा लेखा विभाग दिवस-2026 मनाया गया। समारोह में विभाग के लंबे और गौरवशाली इतिहास से लेकर वर्तमान में सशस्त्र सेनाओं और रक्षा संगठनों को दी जा रही वित्तीय सेवाओं तक की भूमिका को याद किया गया। मुख्य अतिथि विभाग के भूतपूर्व रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक एवं वर्तमान में दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के प्रमुख जी.एस. सूद ने विभाग की परंपरा और राष्ट्रसेवा में योगदान की सराहना करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों से कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और सेवा-भावना के साथ जिम्मेदारियां निभाने का आह्वान किया।

रक्षा लेखा विभाग का इतिहास करीब तीन शताब्दियों पुराना है। आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार इसकी शुरुआत सैन्य वेतन व्यवस्था से जुड़ी रही है। 1747 में फोर्ट विलियम, कलकत्ता की छावनी के लिए पहले मिलिट्री पे मास्टर की नियुक्ति हुई थी। इसके बाद सैन्य खातों और भुगतान व्यवस्था में लगातार बदलाव हुए। 1788 में कमिसरी जनरल के पद को मिलिट्री ऑडिटर जनरल के रूप में पुनर्गठित किया गया। 1864 में मिलिट्री विभाग के लिए अकाउंटेंट जनरल का कार्यालय स्थापित हुआ। स्वतंत्रता के बाद 1 अक्तूबर 1951 को मिलिट्री अकाउंट्स विभाग का नाम बदलकर रक्षा लेखा विभाग किया गया और विभागाध्यक्ष का पद नियंत्रक रक्षा लेखा महानिदेशक (सीजीडीए) के रूप में निर्धारित हुआ।
समय के साथ विभाग का काम केवल खातों के रखरखाव तक सीमित नहीं रहा। रक्षा लेखा विभाग थल सेना, नौसेना और वायु सेना के साथ आयुध कारखानों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), कैंटीन भंडार विभाग (सीएसडी), तटरक्षक बल, सीमा सड़क संगठन और रक्षा मंत्रालय के विभिन्न अंतर-सेवा संगठनों को वित्तीय एवं लेखा सेवाएं उपलब्ध कराता है। विभाग के प्रमुख कार्यों में भुगतान, लेखांकन, आंतरिक लेखा-परीक्षा, वित्तीय परामर्श, बजट की निगरानी और रक्षा पेंशन से संबंधित सेवाएं शामिल हैं।

रक्षा लेखा संयुक्त नियंत्रक विजय तनेजा ने बताया कि आगरा में विभाग के दस कार्यालय आगरा-मथुरा क्षेत्र की सैन्य इकाइयों और संबंधित संगठनों को विभिन्न वित्तीय सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इनमें वेतन-भत्तों का भुगतान, अनुदानों और दावों का निपटारा, लेखा-परीक्षा तथा वित्तीय परामर्श प्रमुख हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से रक्षा संगठनों के वित्तीय कार्यों में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के साथ सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग में भी मदद मिलती है।
विभाग ने बदलते समय के साथ अपनी कार्यप्रणाली में तकनीक को भी शामिल किया है। रक्षा लेखा विभाग की वर्तमान व्यवस्था में डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से भुगतान, पेंशन, वित्तीय प्रबंधन और लेखा संबंधी कार्यों को अधिक व्यवस्थित करने पर जोर दिया जा रहा है। विभाग की सेवाओं का विस्तार रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के बेहतर उपयोग तक हुआ है।
समारोह के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं और उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने विभाग की ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हुए कहा कि बदलती रक्षा जरूरतों के साथ इसकी जिम्मेदारियां भी लगातार विस्तृत हुई हैं। करीब तीन शताब्दियों की इस यात्रा में भुगतान और लेखांकन से शुरू हुई व्यवस्था आज वित्तीय सलाह, आंतरिक ऑडिट, पेंशन प्रबंधन और वित्तीय निगरानी जैसे व्यापक दायित्वों तक पहुंच चुकी है।

