बसें पूरी नहीं खरीदी जा सकीं, फतेहाबाद और बाह क्षेत्र में ही संचालन
सेवा शुरू होती तो गांव से शहर तक स्कूल, अस्पताल और बाजार पहुंचना होता आसान
आगरा। गांव से शहर तक सुलभ और सस्ती परिवहन सुविधा देने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना को लागू हुए पांच महीने हो चुके हैं, लेकिन जिले में चयनित नौ मार्गों पर अभी तक बसों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। रोडवेज के अनुसार बसें पूरी खरीदी नहीं जा सकी हैं। इससे उन ग्रामीण इलाकों के यात्रियों को अब भी पुराने साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जहां नियमित सार्वजनिक परिवहन की सुविधा सीमित है। फिलहाल फतेहाबाद और बाह क्षेत्र में योजना के तहत बसों का संचालन किया जा रहा है।
गांवों से जिला मुख्यालय और तहसील स्तर के बाजारों तक पहुंचने के लिए बड़ी संख्या में लोग रोजाना सफर करते हैं। बस सेवा उपलब्ध नहीं होने पर ग्रामीणों को निजी वाहनों, साझा वाहनों या उपलब्ध सीमित साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से शहर आने वाले ग्रामीणों के लिए यात्रा की परेशानी बनी रहती है। कई मार्गों पर सार्वजनिक परिवहन का विकल्प कम होने से समय पर गंतव्य तक पहुंचना भी चुनौती बनता है।
नौ मार्गों पर प्रस्तावित है बस संचालन
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल ने बताया कि ग्राम परिवहन योजना के तहत जिले में नौ मार्ग चयनित किए गए हैं। इनमें रजौरा-शिवलालगुर्जा-छूट-राटौली-स्याहीपुरा-फतेहाबाद-आगरा, गोहरा-खेराराठौर-अभयपुरा-पिनाहट-आगरा, सियाइच-बलीजर-बटेश्वर-बिजकौली-फरैरा-भदरौली-फतेहाबाद-आगरा, मलियाखेड़ा-खिलावली-चित्राहाट-बाह-आगरा और फतेहपुर सीकरी-उन्देरा-बादनपुर-पूरा-बानपुर-कागारौल-अकोला-आगरा शामिल हैं।
इसके अलावा मेवली-सरेंधी-नगला दूल्हेखॉन-रसूलपुर-खेरागढ़-सैंया-आगरा, खेरिया-बृथला-लादूखेड़ा-सैंया-तेहरा-सिकंदरपुर-ककुआ-आगरा, गढ़ी दर्याव-धिमश्री-शमशाबाद-बड़ा गांव-बाकलपुर-हिरनेर-दिगनेर-श्यामों-बरौली अहीर-आगरा तथा लडुआपुरा-अरनौटा-खण्डेर-फतेहाबाद-पीपलचौकी-डौकी-आगरा मार्ग भी योजना में शामिल हैं।
इन मार्गों का उद्देश्य ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ना है, जहां से लोगों को आगरा या संबंधित कस्बों तक पहुंचने के लिए कई बार वाहन बदलने पड़ते हैं। बसें चलने से गांवों और शहर के बीच सीधा सार्वजनिक परिवहन विकल्प उपलब्ध हो सकता है।
बसें नहीं होने से बढ़ रही निर्भरता
चयनित मार्गों पर बस सेवा शुरू नहीं होने का सीधा असर ग्रामीण यात्रियों पर पड़ रहा है। जिन लोगों को रोजाना काम, पढ़ाई या इलाज के लिए शहर अथवा तहसील जाना पड़ता है, उन्हें उपलब्ध निजी और स्थानीय परिवहन के भरोसे यात्रा करनी पड़ती है। समय के अनुसार वाहन नहीं मिलने पर यात्रियों को इंतजार करना पड़ता है या वैकल्पिक साधन तलाशना पड़ता है।
विद्यार्थियों के लिए नियमित बस सेवा होने पर स्कूल और कॉलेज तक पहुंच आसान हो सकती थी। इसी तरह मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक परिवहन का एक निर्धारित विकल्प मिलता। बाजार और सरकारी कार्यालयों तक जाने वाले ग्रामीणों को भी यात्रा की बेहतर सुविधा मिल सकती थी।
तय किराये पर मिलती यात्रा की सुविधा
योजना के तहत 15 से 28 सीट क्षमता वाली निजी बसों के संचालन का प्रावधान है। बसें डीजल, सीएनजी या इलेक्ट्रिक हो सकती हैं और वाहन की अधिकतम आयु आठ वर्ष निर्धारित है। बस स्वामी को चालक, परिचालक, टिकट और किराया व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालनी होगी। प्रत्येक वाहन को संबंधित गांव से दो फेरे लगाने होंगे।
बस स्वामी को आवेदन के समय 2000 रुपये शुल्क और 5000 रुपये सिक्योरिटी राशि जमा करनी होगी। इसके अलावा प्रतिमाह 1500 रुपये शुल्क निर्धारित है। मार्ग और समय बस स्वामी तय करेंगे, जबकि रूट का अंतिम निर्णय जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति करेगी।
हर विकासखंड में दो बसों की योजना
योजना के तहत हर विकासखंड में दो बसों के संचालन का प्रावधान बताया गया है। जिले के 15 विकासखंडों में ग्रामीण कनेक्टिविटी बढ़ाने का लक्ष्य है। यदि चयनित मार्गों पर निर्धारित बसें नियमित रूप से चलती हैं तो ग्रामीण यात्रियों को शहर तक पहुंचने के लिए अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल ने बताया कि बसों की खरीद पूरी नहीं हो पाने के कारण अभी सभी चयनित मार्गों पर संचालन शुरू नहीं हो सका है। उन्होंने बताया कि फतेहाबाद और बाह क्षेत्र में योजना के तहत बसें चल रही हैं।
समय और दूरी दोनों की बचत की उम्मीद
ग्राम परिवहन योजना का मकसद केवल गांवों को बस सेवा से जोड़ना नहीं है, बल्कि ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार जैसी जरूरी सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाना भी है। नियमित बस मिलने पर यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बार-बार वाहन बदलने की जरूरत कम हो सकती है। इससे यात्रा का समय भी घट सकता है और रोजाना आने-जाने वालों के लिए सार्वजनिक परिवहन का भरोसेमंद विकल्प तैयार हो सकता है।

