आगरा। ब्रज संस्कृति की जड़ों से जुड़ी 100 वर्ष से अधिक पुरानी श्री कृष्ण लीला की परंपरा इस बार धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक सेवा और नए लीला प्रसंगों का संगम लेकर आ रही है। यमुना महारानी के चुनरी मनोरथ से शुरू होने वाली इस आयोजन श्रृंखला में नगर भ्रमण, मचिया लीला, कृष्ण जन्मोत्सव, विभिन्न धार्मिक प्रसंग, फूलों की होली, रक्तदान और पौधरोपण जैसे कार्यक्रम श्रद्धालुओं को अलग-अलग रंगों में जोड़ेंगे।
श्री कृष्ण लीला महोत्सव 2026 की कार्यक्रम श्रृंखला की घोषणा वाटर वर्क्स स्थित अतिथिवन में आयोजित समारोह में की गई। श्री कृष्ण लीला समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि आगरा को ब्रज धाम का प्रवेश द्वार कहा जाता है। ब्रज के 12 वनों में प्रमुख अग्रवन अर्थात आगरा में श्री कृष्ण लीला की परंपरा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि बाल श्री कृष्ण के दर्शन के लिए स्वयं महादेव भी यहां पधारे थे। इसी आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए आयोजन की शुरुआत 22 अक्टूबर को श्री कृष्ण की पटरानी यमुना महारानी के चुनरी मनोरथ से होगी।
चुनरी मनोरथ के लिए गणेश राम नागर स्कूल से पार्वती घाट, बल्केश्वर तक 100 मीटर से अधिक लंबी चुनरी लेकर समिति के सदस्य और श्रद्धालु बैंड-बाजे तथा संकीर्तन के साथ पहुंचेंगे। पार्वती घाट पर विधिवत पूजा-अर्चना और दीपदान के बाद यमुना महारानी को चुनरी अर्पित की जाएगी।
महोत्सव की श्रृंखला में मानव सेवा को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। इसके तहत विशाल रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। इसके बाद पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। इसमें श्री कृष्ण लीला से जुड़े कदंब, माखन कटोरी सहित विभिन्न पौधों का रोपण किया जाएगा।
समिति के महामंत्री विजय रोहतगी ने बताया कि 13 नवंबर से मुख्य लीला श्रृंखला शुरू होगी। इस दिन श्री गणेश जी की सवारी और कंस की दुहाई की सवारी निकलेगी। इस बार दोनों सवारियों का मार्ग बदला गया है। महादेव मंदिर, बल्केश्वर से शुरू होकर सवारी महाराजा अग्रसेन मार्ग तक जाएगी। नए मार्ग से कमला नगर और बल्केश्वर क्षेत्र के श्रद्धालुओं को भी सवारी के दर्शन का अवसर मिलेगा।
15 नवंबर से मचिया लीला का शुभारंभ शाम 6:30 बजे गौशाला प्रांगण, वाटर वर्क्स में होगा। 16 नवंबर को श्री कृष्ण जन्मोत्सव, नंदोत्सव एवं पूतना वध की लीला प्रस्तुत की जाएगी। 17 नवंबर को गोचरण, कालीदह लीला और माखन चोरी लीला का मंचन होगा।
लीला संयोजक शेखर गोयल ने बताया कि इस वर्ष तीन नई लीलाओं को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है। 18 नवंबर को भीष्म प्रतिज्ञा, 19 नवंबर को प्रह्लाद चरित्र और 21 नवंबर को सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र का प्रसंग प्रस्तुत किया जाएगा। 21 नवंबर को ही श्रद्धालुओं के लिए फूलों की होली का आयोजन भी रहेगा।
25 नवंबर को हवन-पूजन और स्वरूपों की विदाई के साथ श्री कृष्ण लीला महोत्सव का विधिवत समापन होगा। समिति पदाधिकारियों ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य केवल लीला मंचन तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से ब्रज परंपरा, भक्ति, संस्कार, लोक संस्कृति और सामाजिक सेवा को एक मंच पर लाने के साथ नई पीढ़ी को भी श्री कृष्ण की लीलाओं और ब्रज संस्कृति की समृद्ध विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में गिर्राज बंसल, विष्णु अग्रवाल राधे-राधे, महंत अनंत उपाध्याय, पंडित मुकेश शर्मा, अशोक गोयल, बृजेश अग्रवाल, केके अग्रवाल, पंकज मोहन, डीके चौधरी, जवाहरलाल, लक्ष्मण शर्मा, विनीत सिंघल, वीरेंद्र गोयल और मीडिया प्रभारी तनु गुप्ता उपस्थित रहे।
