आगरा। पितृ पक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और स्मरण के बीच हलवाई की बगीची स्थित प्राचीन श्रीनाथ जी मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। 28 सितंबर से शुरू होने वाले महोत्सव का शुभारंभ सुबह भव्य कलश यात्रा से होगा। इसके बाद प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक कथा का आयोजन किया जाएगा। कथावाचक आचार्य सुभाष चन्द्र शास्त्री महाराज श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराएंगे। 5 अक्टूबर को पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ महोत्सव का समापन होगा। बुधवार को श्रीनाथ जी मंदिर में कथा महोत्सव के आमंत्रण-पत्र का विधिवत विमोचन किया गया।
पितृ पक्ष को सनातन परंपरा में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इसी धार्मिक वातावरण में श्रीनाथ जी मंदिर में आयोजित होने वाला यह कथा महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आयोजन का अवसर बनेगा। आयोजकों के अनुसार कथा के दौरान श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा, जिसमें भगवान के भक्तों, अवतारों और लीलाओं से जुड़े प्रसंग शामिल होंगे।

मुख्य यजमान वंदना सक्सेना ने बताया कि 28 सितंबर को सुबह 9 बजे शुभम अपार्टमेंट से कलश यात्रा निकाली जाएगी। इसमें महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण कर शामिल होंगी। यात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण देखने को मिलेगा। कलश यात्रा के मार्ग में आठ स्थानों पर पुष्पवर्षा की जाएगी और श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया जाएगा। यात्रा के श्रीनाथ जी मंदिर पहुंचने के बाद शाम को कथा महोत्सव का विधिवत शुभारंभ होगा।
कथा महोत्सव के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। 28 सितंबर को महात्म्य कथा से आयोजन की शुरुआत होगी। इसके माध्यम से श्रीमद्भागवत कथा के महत्व का वर्णन किया जाएगा। 29 सितंबर को कुंती-भीष्म स्तुति का प्रसंग सुनाया जाएगा। 30 सितंबर को सती, ध्रुव और प्रहलाद चरित्र का वर्णन होगा। इन प्रसंगों में भक्ति, श्रद्धा और भगवान के प्रति अटूट विश्वास से जुड़े प्रसंगों को कथा के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
1 अक्टूबर को समुद्र मंथन, रामचरित्र और नंदोत्सव के प्रसंग होंगे। इसके बाद 2 अक्टूबर को श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया जाएगा और गोवर्धन पूजन का आयोजन होगा। 3 अक्टूबर को कंस उद्धार, रासलीला और श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग कथा का प्रमुख हिस्सा रहेंगे। 4 अक्टूबर को सुदामा चरित्र के साथ कथा का विश्राम होगा। इस तरह सात दिनों के आयोजन में श्रीमद्भागवत के अलग-अलग प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को कथा श्रवण का अवसर मिलेगा।
कथावाचक आचार्य सुभाष चन्द्र शास्त्री महाराज ने बताया कि कथा महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। पितृ पक्ष के दौरान आयोजित होने के कारण इस आयोजन का धार्मिक महत्व भी विशेष रहेगा। उन्होंने बताया कि कथा के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान की लीलाओं, भक्तों की आस्था और धर्म के विभिन्न पक्षों से परिचित कराया जाएगा। कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक श्रीनाथ जी मंदिर में होगी।
महोत्सव के अंतिम दिन 5 अक्टूबर को पूर्णाहुति का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। इसी के साथ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का समापन होगा। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से कथा में शामिल होकर धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनने की अपील की है।
