आगरा। छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े आगरा के ऐतिहासिक स्थलों को विश्वस्तरीय विरासत और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। सर्किट हाउस में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधियों तथा जिला प्रशासन की संयुक्त बैठक में कोठी मीना बाजार स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रस्तावित भव्य स्मारक के साथ जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, विकास और पर्यटन सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से विकसित करने पर सहमति बनी। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए दोनों राज्यों के बीच एमओयू, संयुक्त समिति या कार्य समूह, नोडल अधिकारियों के नामांकन, संयुक्त सर्वे, मैपिंग, विरासत आकलन, मास्टर प्लान और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
सर्किट हाउस में हुई बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री भरत सेठ गोगावले और जयकुमार रावल तथा जिलाधिकारी मनीष बंसल की मौजूदगी में परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज से संबंधित ऐतिहासिक स्थलों को उनकी ऐतिहासिक महत्ता और गौरव के अनुरूप विकसित करना तथा देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए एक ऐसा विरासत केंद्र तैयार करना है, जहां शिवाजी महाराज के आगरा प्रवास और मराठा इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की जानकारी मिल सके।

परियोजना के तहत आगरा के कोठी मीना बाजार में छत्रपति शिवाजी महाराज को समर्पित एक स्मारक के निर्माण की योजना है। इसे विश्वस्तरीय पर्यटन और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने तथा शिवाजी महाराज से जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियों को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि स्मारक का विकास केवल निर्माण कार्य तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे स्थल की ऐतिहासिक विरासत, वास्तुशिल्प और प्रमाणिकता को सुरक्षित रखते हुए इसे व्यापक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने जिला प्रशासन की ओर से अब तक की गई कार्रवाई की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोठी मीना बाजार में छत्रपति शिवाजी महाराज के भव्य स्मारक के निर्माण के लिए शासन द्वारा कोठी का अधिग्रहण किया गया है। संबंधित संपत्ति को लेकर विभिन्न वाद न्यायालय में विचाराधीन हैं। अधिग्रहण के संबंध में देय मुआवजा और प्रतिकर की धनराशि न्यायालय में जमा करने का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में भूमि शासन के अधिकार में है। स्थल पर निवासरत परिवारों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन को लेकर संबंधित परिवारों से संवाद किया जा रहा है, ताकि परियोजना को आगे बढ़ाते समय पुनर्वास से जुड़े पहलुओं का भी समुचित समाधान किया जा सके।

बैठक में यह भी तय किया गया कि आगरा स्थित इस ऐतिहासिक स्थल को विश्वस्तरीय विरासत और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार के बीच संस्थागत समन्वय स्थापित किया जाएगा। दोनों राज्यों के संबंधित उच्च अधिकारियों की संयुक्त समिति या कार्य समूह गठित करने तथा नोडल अधिकारियों का नामांकन करने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। इसके साथ ही दोनों सरकारों के बीच एमओयू या सहमति-पत्र के माध्यम से परियोजना के विकास, डिजाइन, वित्तीय सहभागिता, संचालन और रखरखाव से जुड़े दायित्वों को स्पष्ट करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री भरत सेठ गोगावले और जयकुमार रावल ने भी परियोजना को लेकर अपने विचार रखे। बैठक में संबंधित ऐतिहासिक स्थलों का संयुक्त सर्वे, मैपिंग और विरासत आकलन कराने का प्रस्ताव रखा गया। इसके तहत ऐतिहासिक भवनों, घुड़साल से जुड़े पुराने हिस्सों, हरित क्षेत्र और अन्य ऐतिहासिक अवशेषों का संरक्षण सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। परियोजना में संग्रहालय, पर्यटक सुविधा केंद्र, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं को शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया।

इसके लिए एक समग्र कॉन्सेप्ट मास्टर प्लान और संयुक्त डीपीआर तैयार कराने की बात कही गई। प्रस्ताव है कि मास्टर प्लान और डीपीआर विश्वस्तरीय विशेषज्ञों की मदद से तैयार कराए जाएं, ताकि परियोजना की ऐतिहासिक और पर्यटन संबंधी आवश्यकताओं को वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से शामिल किया जा सके। दोनों राज्यों के उच्च अधिकारियों के स्तर पर जल्द बैठक कर स्मारक से संबंधित विस्तृत कार्ययोजना को अंतिम रूप देने की बात भी बैठक में सामने आई।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि परियोजना को स्पष्ट टाइमलाइन के साथ चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट लक्ष्य, माइलस्टोन और समय-सीमा निर्धारित करने तथा परियोजना के लिए आवश्यक बजट का मूल्यांकन करने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि किसी बड़े ऐतिहासिक स्थल के विकास के लिए केवल निर्माण कार्य पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी ऐतिहासिक पहचान और प्रमाणिकता को भी पूरी गंभीरता से संरक्षित किया जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि स्थल की ऐतिहासिक प्रस्तुति में छत्रपति शिवाजी महाराज के आगरा प्रवास से जुड़े प्रसंगों को प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ शंभाजी महाराज, मिर्जा राजा जयसिंह और मराठा इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को भी परियोजना की प्रस्तुति का हिस्सा बनाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। शिवाजी महाराज से संबंधित ऐतिहासिक मार्ग के प्रमाणिक तथ्यों का अध्ययन और सत्यापन कर उन्हें भी परियोजना की प्रस्तुति से जोड़ने की संभावनाओं पर काम करने की बात कही गई।
योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल को उसकी ऐतिहासिक महत्ता और गौरव के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार के समन्वित प्रयास से इसे ऐसा भव्य और विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाया जाए, जहां देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों को शिवाजी महाराज के आगरा प्रवास और मराठा इतिहास की समृद्ध विरासत की जानकारी मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना में ऐतिहासिक प्रस्तुति को प्रमाणिक तथ्यों के आधार पर तैयार किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास की सही जानकारी उपलब्ध हो सके।
बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि ऐतिहासिक स्थल का विकास केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। इसकी ऐतिहासिक विरासत, वास्तुशिल्प और प्रमाणिकता को संरक्षित रखते हुए पर्यटन सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। परियोजना को स्पष्ट माइलस्टोन और समय-सीमा के साथ चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। दोनों राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर परियोजना को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने की दिशा में काम किया जाएगा।
दोनों राज्यों के पर्यटन विभागों के बीच नियमित समन्वय के लिए संयुक्त कार्य तंत्र या समन्वय प्रकोष्ठ विकसित करने पर भी सहमति बनी। इसके माध्यम से संयुक्त कार्ययोजना और डीपीआर तैयार कर परियोजना को आगामी स्तर पर अनुमोदन तथा क्रियान्वयन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इससे परियोजना की विभिन्न प्रक्रियाओं को एक साझा व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाने और दोनों राज्यों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।
बैठक में महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल से जुड़े कई अधिकारी भी शामिल हुए। इनमें निलेश गटणे, व्यवस्थापकीय संचालक, महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल; चंद्रशेखर जैसवाल, महाव्यवस्थापक; विजय पवार, उपसचिव, पर्यटन विभाग, महाराष्ट्र शासन; संजय पाटील, अधीक्षक अभियंता; उमेश राजपूत, कार्यकारी अधिकारी; सिद्धेश चव्हाण, व्यवस्थापक; सुनील कुंगिरी, अधिकारी तथा विजय नागरे, कनिष्ठ अभियंता शामिल रहे। इन अधिकारियों ने भी परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सहभागिता की।
बैठक में नगर आयुक्त संतोष वैश्य, आगरा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एम अरुनमोली, डीसीपी सिटी सैय्यद अली अब्बास, अपर जिलाधिकारी नगर आजाद भगत सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रोटोकॉल अमरेंद्र कुमार, अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार और क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी शक्ति सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। महाराष्ट्र शासन के संबंधित अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
कोठी मीना बाजार में प्रस्तावित शिवाजी महाराज स्मारक और इससे जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के विकास की योजना आगरा की पर्यटन पहचान में एक नया अध्याय जोड़ सकती है। ताजमहल और अन्य विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों के लिए पहचाने जाने वाले आगरा में शिवाजी महाराज से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किए जाने से मराठा इतिहास और आगरा के संबंधों को भी व्यापक स्तर पर सामने लाने का अवसर मिलेगा।
दोनों राज्यों के संयुक्त प्रयास से प्रस्तावित परियोजना में इतिहास, विरासत, पर्यटन और आधुनिक सुविधाओं का समन्वय करने की योजना है। संग्रहालय, पर्यटक सुविधा केंद्र, पार्किंग और हरित क्षेत्र के विकास के साथ पुराने ऐतिहासिक अवशेषों के संरक्षण पर ध्यान दिया जाएगा। संयुक्त सर्वे और विरासत आकलन के बाद तैयार होने वाले मास्टर प्लान और डीपीआर के आधार पर परियोजना के अगले चरण तय किए जाएंगे।
इस पहल से आगरा और महाराष्ट्र के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को भी नया आयाम मिलने की उम्मीद है। शिवाजी महाराज के आगरा प्रवास से जुड़े प्रमाणिक इतिहास को पर्यटन की दृष्टि से प्रस्तुत करने के साथ इसे देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाने की योजना है। अब संयुक्त समिति, एमओयू, कार्ययोजना, सर्वे, मास्टर प्लान और डीपीआर की प्रक्रिया के जरिए परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी है। बैठक में व्यक्त सहमति के अनुसार आने वाले चरणों में समय-सीमा तय कर काम को आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे आगरा की धरती पर शिवाजी महाराज से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत को विश्वस्तरीय पहचान देने की दिशा में ठोस पहल हो सके।
