आगरा। बाल विवाह और बालश्रम से बच्चों को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने अब चिन्हित बच्चों के रेस्क्यू के साथ उनके पुनर्वास और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी की है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक हुई। इसमें बताया गया कि भिक्षावृत्ति रोकथाम अभियान के तहत आठ बच्चों का रेस्क्यू किया गया है, जबकि चार बाल विवाह प्रकरणों में कार्रवाई की गई है। बाल एवं किशोर श्रमिकों के सर्वे में खतरनाक और गैर-खतरनाक कार्यों में लगे 77 बच्चों की पहचान हुई है। आठ परिवाद दाखिल किए गए हैं और शेष मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं। जिलाधिकारी ने चिन्हित बच्चों के लिए रेस्क्यू से लेकर पुनर्वास तक की एसओपी तैयार करने, उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने तथा बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए।

बैठक में बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। सबसे पहले पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की स्थिति और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित वार्षिक कार्ययोजना पर जानकारी ली गई। इसके बाद ऐसे बच्चों की पहचान और संरक्षण की व्यवस्था पर चर्चा हुई, जिन्हें परिवार, सामाजिक या आर्थिक परिस्थितियों के कारण विशेष देखभाल की जरूरत है।

समिति की बैठक में निराश्रित, अनाथ, मानसिक दिव्यांगता से प्रभावित, एकल अभिभावक के साथ रह रहे, भिक्षावृत्ति में लिप्त, बाल श्रम में लगे, शिक्षा से वंचित और गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों की पहचान और चिन्हांकन को महत्वपूर्ण विषय के रूप में रखा गया। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे बच्चों की जानकारी केवल सर्वे तक सीमित न रहे, बल्कि उसे व्यवस्थित रूप से दर्ज कर उनके लिए आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने ग्राम स्तर पर गठित समितियों, पुलिस विभाग, श्रम विभाग और अन्य संबंधित संस्थाओं से चिन्हित बच्चों की सूचना रजिस्टर में दर्ज कराने को कहा। इसके बाद प्रत्येक बच्चे की स्थिति के अनुसार उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास और जरूरतों का आकलन कर संबंधित विभागों की कल्याणकारी योजनाओं से लाभ दिलाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन का उद्देश्य बच्चों को केवल संकट की स्थिति से निकालना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और बेहतर भविष्य की ओर ले जाना है। इसके लिए चिन्हित बच्चों के रेस्क्यू, पुनर्वास और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
ब्लॉक, ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर गठित बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा हुई। बैठक में बताया गया कि इन स्तरों पर समितियों का गठन किया जा चुका है। जिलाधिकारी ने समितियों की नियमित बैठकें कराने और उनके माध्यम से जरूरतमंद बच्चों के पुनर्वास के लिए विभिन्न योजनाओं में आवेदन भेजने की प्रक्रिया सक्रिय रखने को कहा।
उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन सहित बच्चों के रेस्क्यू और पुनर्वास से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। इसके लिए पंपलेट, पोस्टर और अन्य प्रचार माध्यमों का इस्तेमाल करने को कहा गया, ताकि किसी बच्चे के संकट में होने की जानकारी समय रहते संबंधित तंत्र तक पहुंच सके।
बैठक में भिक्षावृत्ति रोकथाम अभियान की प्रगति भी सामने रखी गई। अधिकारियों ने बताया कि अभियान के तहत आठ बच्चों का रेस्क्यू किया जा चुका है। जिलाधिकारी ने रेस्क्यू किए गए बच्चों के आगे की स्थिति की जानकारी लेते हुए उनके पुनर्वास और आवश्यक योजनाओं से जोड़ने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
बाल विवाह के मामलों पर भी बैठक में जानकारी दी गई। अधिकारियों के अनुसार चार बाल विवाह प्रकरणों में कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए संबंधित विभागों और स्थानीय स्तर की समितियों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह को रोकने के साथ ऐसे मामलों में प्रभावित बच्चों की सुरक्षा और आगे की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
बाल एवं किशोर श्रमिकों के चिन्हांकन को लेकर भी रिपोर्ट मांगी गई। बैठक में बताया गया कि खतरनाक और गैर-खतरनाक कार्यों में लगे 77 बच्चों की पहचान की गई है। इनमें से आठ मामलों में परिवाद दाखिल किए गए हैं, जबकि अन्य मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं।
जिलाधिकारी ने सभी चिन्हित बाल एवं किशोर श्रमिकों के लिए रेस्क्यू और पुनर्वास की स्पष्ट एसओपी तैयार करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्रवाई केवल बच्चे को काम से हटाने तक सीमित न रहे। बच्चे की शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार की स्थिति और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया तय की जाए और उसे सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किए गए संकटग्रस्त बच्चों को परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी बैठक में चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने ऐसे बच्चों के मामले में काउंसलिंग के बाद उनकी स्थिति की लगातार निगरानी और पुनर्वासित बच्चों का फॉलोअप करने को कहा। संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर बच्चों से जुड़ी सूचनाएं एकत्र करने और उनकी स्थिति की निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने बाल श्रम और भिक्षावृत्ति में शामिल बच्चों का सर्वे कराने, उनकी पहचान करने और आवश्यकता के अनुसार रेस्क्यू व पुनर्वास की कार्रवाई करने को कहा। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग और बाल संरक्षण तंत्र को मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया गया।
बैठक में बाल देखरेख संस्थानों में रह रहे बच्चों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। इन संस्थानों में बच्चों के आवास, पुनर्वास, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, मनोसामाजिक सहायता, स्वास्थ्य, पोषण और कौशल प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाओं पर जानकारी ली गई। सुरक्षा मानकों और समय-समय पर किए जाने वाले निरीक्षण की रिपोर्ट की भी समीक्षा की गई।
बाल देखरेख संस्थानों में रह रहे बच्चों के लिए केवल सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं माना गया। उनके मानसिक और शारीरिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर सेवाएं उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों को भविष्य में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम करने को कहा गया।
बैठक में केस मैनेजमेंट सिस्टम की वर्तमान स्थिति की भी समीक्षा की गई। संस्थागत देखभाल में रह रहे बच्चों के परिवार का पता लगाने और उन्हें परिवार से दोबारा मिलाने के प्रयासों की जानकारी ली गई। जिलाधिकारी ने परिवार से पुनर्मिलन को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।
दत्तक ग्रहण और बच्चों की वैकल्पिक देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दत्तक ग्रहण, स्पॉन्सरशिप, फॉस्टर केयर, ग्रुप फॉस्टर केयर और आफ्टर केयर योजनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही सपोर्ट पर्सन, फिट पर्सन और फिट फैसिलिटी के चिन्हांकन के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी ली गई।
कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों की मैपिंग और जोखिम के स्तर का आकलन करने पर भी जोर दिया गया। इसमें बाल विवाह, बाल श्रम और बाल तस्करी से जुड़े बच्चे, अनाथ बच्चे, एकल अभिभावक या कानूनी संरक्षक के साथ रहने वाले बच्चे, सौतेले माता-पिता के साथ रह रहे बच्चे, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे तथा मानसिक और शारीरिक दिव्यांगता से प्रभावित बच्चे शामिल हैं।
ऐसे बच्चों की पहचान के बाद उनके जोखिम स्तर का आकलन कर उन्हें जरूरत के अनुसार विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाने तथा पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। प्रशासन का प्रयास है कि बाल संरक्षण तंत्र के संपर्क में आने वाला कोई भी जरूरतमंद बच्चा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से वंचित न रहे।
बैठक में बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, जिला बाल संरक्षण इकाई यानी डीसीपीयू और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई। विशिष्ट दत्तक ग्रहण इकाइयों, बाल देखरेख संस्थाओं और संबंधित कार्यालयों की भौतिक व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों और कार्यों की स्थिति पर भी जानकारी ली गई।
जिलाधिकारी ने जिले के सभी थानों पर नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को नियमानुसार जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस और अन्य विभागों के बीच प्रभावी समन्वय जरूरी है, ताकि जरूरतमंद बच्चों को समय पर संरक्षण और सहायता मिल सके।
उन्होंने जनपद को बाल विवाह और बालश्रम से मुक्त बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करने को कहा। बाल संरक्षण से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स को बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रशासन या बाल संरक्षण तंत्र के संपर्क में आने वाले बच्चों को उनकी परिस्थितियों के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए विभागीय योजनाओं की जानकारी एकत्र कर पात्र बच्चों तक उनका लाभ पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने को कहा गया।
बच्चों की पहचान से लेकर रेस्क्यू, काउंसलिंग, पुनर्वास, परिवार से पुनर्मिलन और सरकारी योजनाओं से जोड़ने तक पूरी प्रक्रिया को एक-दूसरे से जोड़कर देखने पर जोर दिया गया। इससे बाल संरक्षण व्यवस्था को केवल तत्काल हस्तक्षेप तक सीमित रखने के बजाय दीर्घकालिक पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता दोनों जरूरी हैं। किसी बच्चे के बाल श्रम, भिक्षावृत्ति, बाल विवाह या अन्य कठिन परिस्थिति में होने की जानकारी मिलने पर उसके संरक्षण के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, डीपीओ अतुल सोनी, जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज मौर्य सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बाल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं, संस्थाओं और स्थानीय समितियों की स्थिति की जानकारी दी।
