आगरा। तीन साल तक दफ्तरों के चक्कर, शिकायतों पर शिकायत, लेकिन जमीन की पैमाइश नहीं हुई। फिर एक दिन किसान की आवाज सीधे जिलाधिकारी तक पहुंची। कुछ ही दिनों में काम हुआ और सुबह वही किसान कलेक्ट्रेट पहुंचा। हाथ में कोई आवेदन नहीं, बल्कि जंगली ककोड़ों से भरा थैला था। उसने कहा, साहब, पैमाइश हो गई… ये मेरे खेत की तरफ से आपका धन्यवाद है। यह दृश्य सिर्फ एक किसान की राहत नहीं, बल्कि उस भरोसे की कहानी बन गया, जो प्रशासन और आम आदमी के बीच अक्सर कहीं खो जाता है।
कलेक्ट्रेट में गुरुवार सुबह का जनता दर्शन रोज की तरह चल रहा था। लोग अपनी समस्याएं लेकर जिलाधिकारी मनीष बंसल के सामने पहुंच रहे थे। कोई पेंशन की शिकायत लेकर आया था, कोई चकरोड पर कब्जे की बात कर रहा था, तो कोई खाद-बीज की समस्या बता रहा था। इसी बीच भीड़ में से एक साधारण किसान आगे बढ़ा। उसके हाथ में एक पुराना कपड़े का थैला था। अधिकारियों को लगा कि शायद इसमें कागजात होंगे, लेकिन जब थैला खुला तो उसमें जंगली ककोड़े निकले।

किसान ने मुस्कुराते हुए कहा, साहब, पैमाइश हो गई… मैं धन्यवाद देने आया हूं।
यह किसान था बाह तहसील के बसई अरेला गांव का रामप्रकाश, पुत्र रोशनलाल। उसकी जमीन की पैमाइश पिछले तीन वर्षों से लंबित थी। आरोप था कि राजस्व निरीक्षक और लेखपाल बार-बार टालमटोल कर रहे थे। शिकायतें होती रहीं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। धीरे-धीरे किसान की उम्मीद टूटने लगी थी।
6 जुलाई को संपूर्ण समाधान दिवस में रामप्रकाश ने अपनी पीड़ा सीधे जिलाधिकारी के सामने रखी। उसने बताया कि तीन साल से उसकी जमीन की पैमाइश नहीं की जा रही और हर बार कोई न कोई रिपोर्ट लगाकर मामला टाल दिया जाता है। किसान की बात सुनते ही जिलाधिकारी ने मौके पर संबंधित राजस्व निरीक्षक से जवाब तलब किया। पैमाइश में लापरवाही पर नाराजगी जताई और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
गुरुवार को जब रामप्रकाश फिर कलेक्ट्रेट पहुंचा, तो इस बार उसके चेहरे पर शिकायत नहीं, संतोष था। उसने बताया कि जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद उसकी जमीन की पैमाइश पूरी हो गई है और लंबे समय से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया। किसान ने कहा कि अब उसे बड़ी राहत मिली है और उसे लगा कि उसकी बात सचमुच सुनी गई।
इसके बाद उसने अपने साथ लाए थैले से जंगली ककोड़े निकालते हुए जिलाधिकारी को देने की इच्छा जताई। यह कोई महंगा उपहार नहीं था, बल्कि एक किसान की ओर से उसकी सबसे सच्ची और आत्मीय कृतज्ञता थी। वहां मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य भावुक कर देने वाला था। किसान की खुशी देखकर जिलाधिकारी भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके।
कलेक्ट्रेट में मौजूद कई लोगों ने कहा कि अक्सर जनता दर्शन को लोग सिर्फ औपचारिकता मानते हैं, लेकिन आज एक किसान की आंखों की चमक बता रही थी कि समय पर सुनवाई किसी गरीब के लिए कितनी बड़ी राहत होती है। रामप्रकाश बार-बार जिलाधिकारी की कार्यशैली की सराहना करता रहा। उसने कहा कि अगर उसकी बात उस दिन गंभीरता से न सुनी जाती, तो शायद वह आज भी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा होता।
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इस मौके पर सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि तहसील दिवस और प्रतिदिन होने वाली जनता जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि भूमि पैमाइश, चकरोड अतिक्रमण और सार्वजनिक भूमि पर कब्जे जैसी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और तत्काल कार्रवाई की जाए। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
यह घटना सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उस भरोसे की मिसाल बन गई है, जिसमें एक किसान अपनी समस्या लेकर आता है और समाधान मिलने पर धन्यवाद कहने लौटता है। आज कलेक्ट्रेट में फाइलों और आदेशों के बीच जंगली ककोड़ों की वह छोटी-सी थैली चर्चा का विषय बनी रही।

