आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में “नशा मुक्त युवा – विकसित भारत संकल्प अभियान” के तहत नशामुक्ति को जनआंदोलन का स्वर देने वाले प्रेरक कार्यक्रम आयोजित किए गए। भाषण प्रतियोगिता, प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक, पुरस्कार वितरण और सामूहिक शपथ के माध्यम से विद्यार्थियों ने न केवल नशे के सामाजिक, मानसिक और शारीरिक दुष्प्रभावों को सामने रखा, बल्कि स्वस्थ, जागरूक और विकसित भारत के निर्माण में युवा शक्ति की निर्णायक भूमिका का सशक्त संदेश भी दिया। कार्यक्रमों में विभिन्न विभागों के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।

विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज में “नशा मुक्ति” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी), यूनिवर्सिटी कंप्यूटर सेंटर (यूसीसी), स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज सहित विभिन्न विभागों के लगभग 25 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने विचारों के माध्यम से बताया कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी गंभीर बाधा बनता है। विद्यार्थियों ने मानसिक तनाव, सामाजिक विघटन, अपराध, आर्थिक नुकसान और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी जागरूक करने की अपील की।

कार्यक्रम संयोजक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का युवा स्वस्थ जीवनशैली अपनाए, सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े और समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य करे। उन्होंने युवाओं से अपने आसपास नशामुक्त वातावरण बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

प्रतियोगिता में कामिनी शर्मा ने प्रथम, सिद्धि दात्री ने द्वितीय तथा प्रियांशु यादव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को प्रो. के.पी. सिंह और डॉ. मोहम्मद हुसैन ने पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। आयोजन को सफल बनाने में प्रो. भूपेन्द्र स्वरूप शर्मा, प्रो. आर.के. अग्निहोत्री, डॉ. मोनिका अस्थाना और डॉ. अंकुर गुप्ता का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीलू सिन्हा ने किया।

इसी क्रम में विश्वविद्यालय परिसर में “नशा मुक्त युवा – विकसित भारत” अभियान के तहत एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय कंप्यूटर सेंटर, विश्वविद्यालय मॉडल स्कूल, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के सामने विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों को सजीव रूप में दर्शाया। अभिनय, संवाद, गीत और प्रेरक नारों के माध्यम से कलाकारों ने यह संदेश दिया कि नशा केवल व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि परिवार और पूरे समाज के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
नुक्कड़ नाटक में दिखाया गया कि नशे की लत किस प्रकार युवाओं की शिक्षा, करियर, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करती है। कलाकारों ने लोगों से अपील की कि वे नशे से दूर रहें, जरूरतमंदों को सही मार्गदर्शन दें और समाज में जागरूकता फैलाने में सहयोग करें। प्रस्तुतियों को विद्यार्थियों, कर्मचारियों और राहगीरों ने भी ध्यानपूर्वक देखा और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। नुक्कड़ नाटक का निर्देशन और पर्यवेक्षण डॉ. रत्ना पांडेय और पुरुषोत्तम मयूरा ने किया। उनकी देखरेख में विद्यार्थियों ने प्रभावशाली और संदेशपरक प्रस्तुति दी।
कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी माध्यम युवा शक्ति है। यदि युवा स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज को भी जागरूक करें, तो नशामुक्त और विकसित भारत का लक्ष्य शीघ्र प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने और नशे जैसी बुराइयों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रमों में डॉ. सुरभि महाजन, डॉ. पूर्ति चतुर्वेदी, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. शिवानी यादव, डॉ. जागृति, डॉ. अनामिका, डॉ. कृति, डॉ. अजीत, डॉ. अंकिता, डॉ. हफज़ा, ऋतु सिंह, मोनिका यादव, अनिल, श्रेया, डॉ. रेखा शर्मा, डॉ. सोनल पांडे, डॉ. संगीता और ई. अंकिता माहेश्वरी सहित विभिन्न संकायों के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। इसके बाद विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने नशामुक्त भारत के निर्माण हेतु सामूहिक शपथ ग्रहण की। सभी ने संकल्प लिया कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे और समाज को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेंगे।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का यह अभियान केवल एक औपचारिक आयोजन बनकर नहीं रहा, बल्कि युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व, स्वस्थ जीवनशैली और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता जगाने वाला प्रेरक प्रयास साबित हुआ। भाषण, नुक्कड़ नाटक और सामूहिक संकल्प के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि जब युवा जागरूक, सकारात्मक और जिम्मेदार बनेंगे, तभी नशामुक्त समाज और विकसित भारत का स्वप्न वास्तविकता में बदल सकेगा।
