आगरा। सड़क हादसों में कमी लाने, यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने के लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब जनपद में “नो-हेलमेट, नो-फ्यूल” नीति को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। 50 से अधिक लंबित चालान वाले वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने, उनके पंजीयन और ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई की जाएगी।

खराब सड़कों को 15 दिन में दुरुस्त करने, स्कूल वाहनों की फिटनेस और परमिट की जांच, ब्लैक स्पॉट का ऑडिट, जाम और अतिक्रमण हटाने के लिए नियमित अभियान चलाने समेत सड़क सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, प्रवर्तन व्यवस्था और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए विभिन्न विभागों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाई देने चाहिए।
बैठक में परिवहन विभाग, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, नगर निगम, आगरा विकास प्राधिकरण, यूपीईडा, यीडा, मेट्रो, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग सहित सभी संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारियां तय की गईं।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय जनपद में नो-हेलमेट, नो-फ्यूल नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने का रहा। जिलाधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देश दिए कि परिवहन विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन के समन्वय से इस व्यवस्था को पूरी गंभीरता के साथ लागू कराया जाए। उद्देश्य यह है कि बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों को पेट्रोल उपलब्ध न कराया जाए, जिससे लोगों में सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूकता बढ़े और दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।
यातायात नियमों के उल्लंघन पर किए जा रहे चालानों की समीक्षा भी बैठक का प्रमुख विषय रही। पुलिस विभाग को निर्देशित किया गया कि आईटीएमएस कैमरों के माध्यम से तथा मौके पर किए गए चालानों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही परिवहन विभाग और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से ऐसी कार्ययोजना तैयार करें, जिससे लंबित चालानों की शमन शुल्क राशि की प्रभावी वसूली सुनिश्चित हो सके। अधिकारियों से कहा गया कि केवल चालान करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जुर्माने की वसूली भी समयबद्ध तरीके से होनी चाहिए।
बैठक में उन वाहनों पर विशेष चिंता व्यक्त की गई, जिन पर 50 से अधिक चालान लंबित हैं। ऐसे मामलों में परिवहन विभाग को निर्देश दिए गए कि संबंधित वाहनों को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए। वाहन स्वामियों को नोटिस जारी किए जाएं और आवश्यकता पड़ने पर मोटर वाहन अधिनियम की धारा-53 के अंतर्गत वाहन का पंजीयन निलंबित करने तथा धारा-19 के तहत चालक का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई भी की जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इस श्रेणी के वाहनों के खिलाफ प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

आईटीएमएस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि प्रवर्तन योग्य सभी मामलों में परिवहन विभाग को आवश्यक फोटो और डिजिटल साक्ष्य समय पर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान की प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।
बैठक में सड़कों की खराब स्थिति पर भी गंभीर चर्चा हुई। लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और नगर निगम द्वारा सड़क रखरखाव की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने अपने निरीक्षण के दौरान मिली पांच खराब सड़कों का विशेष उल्लेख करते हुए निर्देश दिए कि अगले 15 दिनों के भीतर इन सड़कों की मरम्मत और सुधार का कार्य पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधित निर्माण अथवा अनुरक्षण एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दुर्घटनाओं की दृष्टि से संवेदनशील ब्लैक स्पॉट की समीक्षा करते हुए पुलिस विभाग को निर्देश दिए गए कि पहले कराए गए सुधार कार्यों की वास्तविक स्थिति का दोबारा परीक्षण कराया जाए। ब्लैक स्पॉट का पुनः ऑडिट कर यह सुनिश्चित किया जाए कि वहां किए गए सुधार वास्तव में दुर्घटनाओं को कम करने में प्रभावी साबित हो रहे हैं या नहीं।
शहर में बढ़ते अतिक्रमण और यातायात जाम की समस्या पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। अपर पुलिस उपायुक्त को निर्देश दिए गए कि थाना और चौकी प्रभारियों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए। अतिक्रमण हटाने और जाम की समस्या दूर करने के लिए नियमित अभियान चलाया जाए। यह भी स्पष्ट किया गया कि कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि लगातार निगरानी और फॉलोअप के साथ स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।
सड़क निर्माण और अनुरक्षण कार्यों में जवाबदेही तय करने के लिए प्रत्येक सड़क निर्माण एवं रखरखाव एजेंसी को निर्देश दिए गए कि संबंधित सड़क के शुरुआती बिंदु पर अपना नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें। इससे आम नागरिकों को यह जानकारी मिल सकेगी कि सड़क के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी किस एजेंसी की है और शिकायत की स्थिति में जवाबदेही तय करना आसान होगा।
बैठक में राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य जिला मार्गों (ओडीआर) पर बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर पर चिंता व्यक्त की गई। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि मार्गवार दुर्घटनाओं का विस्तृत विश्लेषण तैयार कर अगली बैठक में प्रस्तुत किया जाए। रिपोर्ट में दुर्घटनाओं के कारण, संभावित समाधान और आवश्यक सुधारात्मक कदमों का भी उल्लेख किया जाए, ताकि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस रणनीति तैयार की जा सके।
स्कूल वाहनों की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि जिन विद्यालयों द्वारा परमिट अथवा फिटनेस समाप्त होने के बावजूद वाहनों का संचालन कराया जा रहा है, उन्हें तत्काल नोटिस जारी किए जाएं। सभी विद्यालयों को व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से भी इसकी सूचना उपलब्ध कराई जाए तथा पूरे अभियान की निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी नामित किया जाए।
बैठक में जनपद में संचालित 108 एम्बुलेंस सेवा की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आवश्यकता के अनुसार एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने तथा आपातकालीन स्थिति में उनके रिस्पॉन्स टाइम को कम करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
रायभा टोल प्लाजा तथा फतेहाबाद स्थित आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे टोल प्लाजा द्वारा ओवरलोड वाहनों की सूचना समय पर उपलब्ध न कराए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। दोनों टोल प्लाजा के प्रबंधकों को निर्देश दिए गए कि वे अगली बैठक में सभी आवश्यक आंकड़ों के साथ उपस्थित हों। ऐसा न करने पर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (नगर) यमुनाधर चौहान, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी आलोक अग्रवाल, सहायक पुलिस आयुक्त अलका, सहायक मुख्य चिकित्सा अधिकारी, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग, यूपीईडा, यीडा, नगर निगम, आगरा विकास प्राधिकरण, मेट्रो, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में सभी विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाकर सड़क सुरक्षा से जुड़े निर्णयों को समयबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश दिए गए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था स्थापित करने का लक्ष्य प्रभावी रूप से हासिल किया जा सके।
