आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित 92वें दीक्षांत समारोह ने शिक्षा, नवाचार, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्तरदायित्व का नया संदेश दिया। समारोह में 79,832 विद्यार्थियों को विभिन्न उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि 64 मेधावी विद्यार्थियों को 88 स्वर्ण, रजत एवं अन्य पदकों से सम्मानित किया गया।

विश्वविद्यालय की कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ। साथ ही 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की 1002 किशोरियों के लिए निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण अभियान, डिजिटल डिग्री का प्रदर्शन, खिलाड़ियों का सम्मान और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई कार्यक्रम इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत सोमवार को स्वामी विवेकानंद (खंदारी) परिसर स्थित शिवाजी मंडपम में आयोजित 92वां दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के इतिहास का यादगार आयोजन बन गया। समारोह में शिक्षा, संस्कार, नवाचार, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का समन्वय देखने को मिला। पूरे आयोजन का संचालन कुलसचिव अजय मिश्रा और जनसंपर्क अधिकारी पूजा सक्सेना ने किया।

समारोह की शुरुआत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के आगमन से हुई। कुलपति प्रो. आशु रानी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा और प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का भी स्वागत किया गया।

छात्राओं के हस्तनिर्मित बुके बने आकर्षण
स्वागत कार्यक्रम को आत्मनिर्भर भारत की भावना से जोड़ते हुए गृह विज्ञान संस्थान के होम मैनेजमेंट विभाग ने हस्तनिर्मित फ्लावर बुके तैयार किए। डॉ. प्रीति यादव के निर्देशन में एमएससी की छात्रा हेमांशाली चौधरी तथा बीएससी की छात्राओं श्रुति, स्नेहा, अमन और श्रेया ने पाइप क्लीनर, टेप, बीड्स, कोरियन पेपर और स्पंज से आकर्षक बुके तैयार किए, जिन्हें अतिथियों को भेंट किया गया। पर्यावरण हितैषी इस पहल की सभी ने सराहना की।

एचपीवी टीकाकरण केंद्र पहुंचीं कुलाधिपति
स्वागत के बाद कुलाधिपति सीधे विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित एचपीवी (HPV) टीकाकरण केंद्र पहुंचीं। उन्होंने वहां मौजूद बालिकाओं और उनकी माताओं से संवाद किया तथा 14 से 15 वर्ष की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया। टीकाकरण करा चुकी बालिकाओं को उन्होंने स्वयं प्रमाण-पत्र, पोषण बास्केट और चॉकलेट वितरित कर उत्साहवर्धन किया।

इस दौरान पूरे आगरा जनपद में सफलतापूर्वक संचालित एचपीवी टीकाकरण अभियान के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव को प्रशस्ति प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद विद्या परिषद और कार्य परिषद के सदस्यों के साथ समूह छायाचित्र लिया गया और पारंपरिक शोभायात्रा के साथ सभी समारोह स्थल पहुंचे, जहां वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

वार्षिक प्रतिवेदन में गिनाईं उपलब्धियां
कुलपति प्रो. आशु रानी ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान, नवाचार, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की प्रगति, भविष्य की योजनाओं और विद्यार्थियों को प्रदान की जाने वाली उपाधियों का विस्तृत विवरण रखा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उसे कौशल विकास, सामाजिक उत्तरदायित्व, नवाचार और मानवीय मूल्यों से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

79,832 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां
इस वर्ष विश्वविद्यालय ने कुल 79,832 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। इनमें 55,686 स्नातक, 9,150 स्नातकोत्तर, 14,826 प्रोफेशनल पाठ्यक्रम, 167 पीएचडी और 3 डी.लिट. की उपाधियां शामिल रहीं।

शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 64 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 88 स्वर्ण, रजत और अन्य पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें 46 छात्राएं और 18 छात्र शामिल रहे। यह आंकड़ा उच्च शिक्षा में बेटियों की बढ़ती भागीदारी और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण भी बना।

मानद उपाधि से सम्मानित हुए शिल्पकार
पारंपरिक हस्तशिल्प और ग्रामीण उद्यमिता के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध गोल्डन ग्रास (मदुर) शिल्पकार अरधेंदु शेखर दास को विश्वविद्यालय की मानद उपाधि प्रदान की गई।

दीक्षांत समारोह में सामाजिक सरोकार भी रहे केंद्र में
समारोह केवल उपाधियों के वितरण तक सीमित नहीं रहा। इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को उपयोगी किट वितरित की गईं और प्राथमिक विद्यालयों को पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं। इसके माध्यम से शिक्षा के सामाजिक विस्तार और समाज के कमजोर वर्गों तक संसाधन पहुंचाने का संदेश दिया गया।

विश्वविद्यालय मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों ने “पर्यावरण गीत” पर सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया।

लोकार्पित परियोजनाओं में विश्वविद्यालय मॉडल स्कूल का जीर्णोद्धार, मियावाकी (निधिवन) परियोजना, चाणक्य सदन और अतिथि गृह का एकीकरण, सुल्तानगंज परिसर में शताब्दी भवन (सेंटर फॉर लीगल एजुकेशन), कणाद हाई-टेक इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर, आंबेडकर प्रतिमा स्थल का नवीनीकरण तथा छलेसर परिसर में सुभाष चंद्र बोस मुख्य द्वार, लॉन टेनिस कोर्ट और सड़क निर्माण कार्य शामिल रहे।

इसके अलावा खंदारी परिसर स्थित आंबेडकर भवन तथा टीचर्स होम के 12 आवासों के जीर्णोद्धार का शिलान्यास भी किया गया।
डॉक्यूमेंट्री और डिजिटल डिग्री बनी आकर्षण का केंद्र
विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो 90.4 “आगरा की आवाज़” द्वारा शताब्दी वर्ष और दीक्षांत समारोह पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री तथा लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इसमें विश्वविद्यालय की गौरवशाली 100 वर्ष की यात्रा को प्रदर्शित किया गया।

राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी (NAD) के माध्यम से डिजिटल डिग्री का लाइव प्रदर्शन भी किया गया। HDFC बैंक के CSR सहयोग, शिक्षकों की पुस्तकों के लोकार्पण, चार उत्कृष्ट शिक्षकों के सम्मान तथा एचपीवी जागरूकता अभियान में सहयोग देने वाले प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया।

खिलाड़ियों को लाखों रुपये के पुरस्कार
राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। अखिल भारतीय विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं, खेलो इंडिया और नॉर्थ जोन प्रतियोगिताओं के स्वर्ण पदक विजेताओं को 1.05 लाख रुपये, रजत पदक विजेताओं को 50 हजार रुपये तथा कांस्य पदक विजेताओं को कुल 4.20 लाख रुपये की नकद धनराशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।

प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि आगरा केवल ऐतिहासिक धरोहरों का शहर नहीं, बल्कि वीरता, संस्कृति और ज्ञान की समृद्ध परंपरा का केंद्र भी है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य और डॉ. भीमराव आंबेडकर के समानता, शिक्षा एवं सामाजिक न्याय के विचारों को यह विश्वविद्यालय आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह जीवन में नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का भी प्रतीक है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना भी है। उन्होंने पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए अन्य विद्यार्थियों से निराश न होने की अपील की और कहा कि निरंतर प्रयास करने वाले ही सफलता प्राप्त करते हैं।

उपाध्याय ने विद्यार्थियों से संस्कारयुक्त शिक्षा को अपनाने, अभिव्यक्ति की मर्यादा बनाए रखने, सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत अभियान से जुड़कर समाज को नई दिशा देने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बताया भविष्य का मजबूत आधार
मुख्य अतिथि एवं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने कहा कि विश्वविद्यालय का शताब्दी वर्ष केवल सौ वर्षों की यात्रा का पड़ाव नहीं, बल्कि गौरवशाली शैक्षणिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और संस्कार का संतुलित वातावरण उपलब्ध कराती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से जीवनभर सीखते रहने की आदत विकसित करने की बात कही। साथ ही नवाचार को अपनाने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का नैतिक उपयोग करने और प्रत्येक निर्णय में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों के लिए पांच महत्वपूर्ण सूत्र भी बताए। इनमें जीवनपर्यंत सीखते रहने, ऐसी सफलता का चयन करने जिससे राष्ट्र आगे बढ़े, नवाचार अपनाने, तकनीक के साथ नैतिक मूल्यों को मजबूत रखने और हर कार्य में देश को सर्वोपरि मानने की सीख शामिल रही।
बेटियों की उपलब्धियों को बताया समाज में बदलाव का संकेत
अध्यक्षीय संबोधन में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के शिक्षित, संगठित और संघर्षशील समाज के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाला केंद्र बन चुका है।
उन्होंने छात्राओं की उल्लेखनीय सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में बेटियों का पदक प्राप्त करना समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। उन्होंने छात्राओं से आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सशक्त बनने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए जनजागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम है। विशेष रूप से 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं के लिए चलाया जा रहा एचपीवी टीकाकरण अभियान भविष्य की पीढ़ी को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने अभिभावकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग करने की अपील की।
उन्होंने नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित जीवनशैली, समय पर टीकाकरण, बेटियों को कौशल आधारित शिक्षा, नशामुक्त समाज के निर्माण तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण और उनकी देखभाल पर भी जोर दिया।
आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि उत्कृष्ट कार्यों के मार्ग में आलोचनाएं स्वाभाविक होती हैं, लेकिन उनसे विचलित हुए बिना निरंतर आगे बढ़ना ही सफलता की पहचान है। उन्होंने विदेशी विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में विश्वविद्यालय की लगातार बेहतर होती स्थिति को संस्थान की गुणवत्ता का प्रमाण बताया।
1002 किशोरियों के लिए चला विशेष एचपीवी टीकाकरण अभियान
दीक्षांत समारोह के साथ महिला स्वास्थ्य जागरूकता को जोड़ते हुए विश्वविद्यालय परिसर में विशेष एचपीवी टीकाकरण शिविर आयोजित किया गया। कुलपति प्रो. आशु रानी, स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव के सहयोग से 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की 1002 किशोरियों को निःशुल्क सर्वाइकल कैंसर रोधी एचपीवी वैक्सीन लगाई गई।
टीकाकरण कराने वाली सभी बालिकाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। यह विशेष अभियान स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूरे आगरा जनपद में संचालित किया गया, जिसे दीक्षांत समारोह के साथ जोड़कर महिला स्वास्थ्य जागरूकता का व्यापक संदेश दिया गया।
पोषण बास्केट में शामिल रहे कई पौष्टिक उत्पाद
टीकाकरण के साथ बालिकाओं के पोषण का भी विशेष ध्यान रखा गया। गृह विज्ञान संस्थान के आहार एवं पोषण विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. अर्चना सिंह के संरक्षण तथा डॉ. दीप्ति सिंह और डॉ. प्रिया यादव के पर्यवेक्षण में छात्राओं ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन) के मानकों के अनुरूप विशेष पोषण बास्केट तैयार की।
इस बास्केट में रागी न्यूट्री बिस्किट, मोरिंगा सोरघम मठरी, चोको नट कैंडी, आंवला कैंडी, कैरामेलाइज्ड गुड़ मखाना, हेल्दी शिकंजी और पोटैटो चिप्स शामिल किए गए। टीकाकरण कराने वाली सभी बालिकाओं को यह पौष्टिक सामग्री उपहार स्वरूप प्रदान की गई।
इस पहल को सफल बनाने में हेमांशाली, मोहित, नेहा, श्रेया, दिव्याश, गरिमा और सोनिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इन छात्राओं ने लिया टीकाकरण शिविर में हिस्सा
एचपीवी टीकाकरण अभियान में विश्वविद्यालय मॉडल स्कूल, विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों की बालिकाओं के साथ विवेकानंद स्कूल की छात्राओं ने भी भागीदारी की। इससे अभियान को व्यापक स्वरूप मिला और बड़ी संख्या में किशोरियों ने स्वास्थ्य सुरक्षा का संदेश ग्रहण किया।
कई शिक्षकों और अधिकारियों ने निभाई अहम जिम्मेदारी
एचपीवी टीकाकरण शिविर की संयोजिका प्रो. अचला गक्खर रहीं। कार्यक्रम के सफल संचालन और समन्वय में पूजा सक्सेना, डॉ. अनुपमा गुप्ता, डॉ. स्वेतलाना, डॉ. सौरभ निषाद, डॉ. रेखा शर्मा, प्रो. वंदना अग्रवाल, प्रो. पूनम सिंह, डॉ. पूनम तिवारी, डॉ. रत्ना पांडे, डॉ. मोनिका अस्थाना और डॉ. अंकिता महेश्वरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित यह 92वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधियों के वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक उत्तरदायित्व, कौशल विकास और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों को एक ही मंच पर समाहित करने वाला आयोजन साबित हुआ।
विश्वविद्यालय ने इस समारोह के माध्यम से यह संदेश दिया कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील, नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले नागरिक तैयार करना भी है। यही कारण रहा कि शताब्दी वर्ष का यह दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।
