समरसता महोत्सव में जेन-जी और अल्फा पीढ़ी को संत रविदास के जीवन-दर्शन से जोड़ने की पहल, सत्संग में भक्ति और अच्छी संगत का महत्व समझाया, कवि सम्मेलन में गूंजी सामाजिक समरसता की कविताएं
आगरा। मोबाइल और आधुनिक तकनीक की दुनिया में व्यस्त नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, संत परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने की पहल के तहत समरसता महोत्सव में करीब 1500 स्कूली बच्चों ने संत रविदास के जीवन-दर्शन को जाना। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महासभा की ओर से संत रविदास महाराज की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन जेन-जी और अल्फा पीढ़ी पर विशेष ध्यान दिया गया। आगरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों स्कूलों से पहुंचे विद्यार्थियों ने भक्ति, समानता, मानवता और सामाजिक समरसता के विचारों को समझा। सत्संग में संत रविदास की वाणी के माध्यम से जीवन को सही दिशा देने का संदेश मिला, वहीं कवि सम्मेलन में प्रस्तुत रचनाओं ने नई पीढ़ी को संस्कार, प्रेम और राष्ट्र निर्माण से जुड़ने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। आगरा चर्म उद्योग की नगरी भी है और करीब साढ़े तीन लाख परिवार इस उद्योग से जुड़े हुए हैं। ऐसे में संत रविदास के जीवन और विचारों से बच्चों को परिचित कराना विशेष महत्व रखता है। उनकी वाणी के प्रत्येक शब्द में जीवन को सही दिशा देने की प्रेरणा समाहित है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने और जीवन में अच्छे विचार अपनाने का अवसर देते हैं।

महासभा के अध्यक्ष रमेश कर्दम ने बताया कि आगरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों स्कूलों से करीब 1500 बच्चों ने महोत्सव में सहभागिता की। जेन-जी और अल्फा पीढ़ी को संत रविदास के आदर्शों से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। उनका उद्देश्य बच्चों को केवल संत रविदास के जीवन के बारे में जानकारी देना नहीं, बल्कि उनके विचारों को व्यवहार में उतारने के लिए प्रेरित करना भी है।
अच्छी संगत से मिलती है जीवन को सही दिशा
सुखमनी सेवा सभा के संस्थापक सरदार महेंद्र पाल सिंह ने सत्संग में गुरु ग्रंथ साहिब में समाहित संत रविदास के 40 शबद और एक श्लोक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संत रविदास के पास न धन था और न ही कोई बड़ा वैभव, लेकिन उनके पास प्रभु का सच्चा नाम और भक्ति की अनमोल संपदा थी। इसी के सहारे उन्होंने प्रभु को पाया। उनकी वाणी सदियों से मानवता को सही मार्ग दिखा रही है और जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों का महत्व समझा रही है।
उन्होंने कहा कि सच्चा सत्संग वही है, जहां प्रभु के नाम और उनके विचारों की चर्चा होती है। संगत का अर्थ केवल किसी स्थान पर एकत्र होकर बैठना नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि मनुष्य अपने जीवन में किन लोगों के साथ रहता है और किन विचारों को अपनाता है। संत रविदास की वाणी ‘हरि सो हीरा छाड़ि कै करे आन की आस’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से अच्छे विचारों, सकारात्मक संगत और प्रभु के नाम से जुड़ने का आह्वान किया।
सरदार महेंद्र पाल सिंह ने कहा कि संत रविदास ने विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक भेदभाव के बावजूद अपने भीतर कटुता को स्थान नहीं दिया। उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ मानवता, समानता और करुणा का संदेश मिलता है। यह विचार आज भी प्रासंगिक हैं और मनुष्य को अपने आचरण पर विचार करने की प्रेरणा देते हैं। उनके अनुसार, आध्यात्मिकता का वास्तविक उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि जीवन में अच्छे संस्कार और मानवीय संवेदनाएं विकसित करना भी है।

सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं ने ‘वाहेगुरु सतनाम’ का सिमरन किया और संत रविदास की वाणी का सामूहिक गायन किया। भक्ति और आध्यात्मिक विचारों से जुड़े इस सत्र में बच्चों को संत परंपरा के साथ-साथ आपसी सद्भाव और समानता का महत्व समझने का अवसर मिला।
संस्कृति और विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी
महासभा के सचिव अभिनव मौर्य ने कहा कि जेन-जी और अल्फा पीढ़ी देश का भविष्य होने के साथ ही संस्कृति और विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी भी निभाएगी। संत रविदास के विचारों को पुस्तकों और आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय बच्चों और युवाओं के दैनिक जीवन से जोड़ना जरूरी है। इसी सोच के साथ महोत्सव में स्कूली विद्यार्थियों को सहभागी बनाया गया है, ताकि वे भक्ति, समानता, मानवता और सामाजिक समरसता के मूल्यों को समझकर अपने व्यवहार में शामिल कर सकें।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के दौर में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखना समय की बड़ी आवश्यकता है। मोबाइल और डिजिटल माध्यमों के बीच बच्चों को अपनी सांस्कृतिक पहचान, संतों की शिक्षाओं और समाज के प्रति जिम्मेदारियों से परिचित कराना जरूरी है। संत रविदास का जीवन-दर्शन बच्चों को आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर समानता और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
कविताओं में बच्चों और युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण का संदेश
महोत्सव के दूसरे सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन में सामाजिक सरोकार, प्रेम, संस्कार और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने वाली रचनाएं प्रस्तुत की गईं। सत्र के मुख्य अतिथि अभिनेता श्रीकांत वर्मा रहे। संयोजक एडवोकेट अशोक चौबे ने बताया कि कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया। कविताओं में नई पीढ़ी के विचारों, जिम्मेदारियों और जीवन मूल्यों को प्रमुखता से स्थान मिला।
कवि पद्म गौतम ने बच्चों को आदर्शों पर चलने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देते हुए पंक्तियां प्रस्तुत कीं—
‘आदर्शों में लोच न बनना, ऐसी वैसी सोच न बनना। निर्माता हो नव भारत के, बच्चों तुम कॉकरोच न बनना।’
उनकी रचना में बच्चों को अपने लक्ष्य और आदर्शों के प्रति दृढ़ रहने का संदेश दिया गया। डॉ. आशुतोष त्रिपाठी, देवरिया ने ‘दुनिया एक वीराना, जंगल और भटकता मन बंजारा’ गीत प्रस्तुत किया। वहीं डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने संत रविदास को समर्पित रचना के माध्यम से उनके आध्यात्मिक व्यक्तित्व और जाति-धर्म से ऊपर उठकर मानवता का संदेश देने वाले विचारों को अभिव्यक्त किया।
उन्होंने अपनी पंक्तियों में कहा—
‘जाति धर्म बंधन परे, हृदय हरि का वास। स्वयं सत्य का नाम हैं, गुरुवर संत रविदास।’
इसके अलावा प्रो. ओमपाल सिंह निडर, लोकेश चौधरी लॉरेंस और डॉ. अंगद धारिया ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को सामाजिक समरसता, मानवीय मूल्यों और सकारात्मक सोच का संदेश दिया। कवि सम्मेलन ने महोत्सव के सांस्कृतिक पक्ष को विस्तार दिया और संत रविदास के विचारों को साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत किया।
समापन पर होगी संत रविदास कथा, प्रतिभाएं होंगी सम्मानित
महासभा के प्रचार प्रमुख विजय सामा ने बताया कि तीन दिवसीय समरसता महोत्सव के समापन अवसर पर दिल्ली से आए कथा व्यास भाई जी अजय संत रविदास कथा प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और रामदासिया समाज के लोगों को सम्मानित किया जाएगा। आयोजन के माध्यम से संत रविदास के जीवन, उनकी भक्ति और सामाजिक समानता के विचारों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस अवसर पर डॉ. निष्ठा शर्मा, अंजली, हर्ष दिवाकर, राजेंद्र पाल एडवोकेट, सीए संजीव माहेश्वरी, विभाग कार्यवाह सुनील दीक्षित, अशोक पिप्पल, प्रमोद महाजन, राकेश जाटव, मनोज राजौरा खटीक और अभिषेक कोटिया सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
