आगरा। आगरा किला के सामने स्थित रामलीला मैदान में सोमवार को मेघनाद वध की लीला के दौरान रणभूमि में लक्ष्मण के निर्णायक प्रहार से मेघनाद धराशायी हो गया। रथों की टक्कर, तीरों की बौछार और ढोल-ताशों की गूंज के बीच हुए महासंग्राम को देखने के लिए हजारों दर्शक पहुंचे। मेघनाद का वध होते ही रामलीला मैदान जय श्रीराम और जय लक्ष्मण के जयघोषों से गूंज उठा।
पति का शीश लेकर सुलोचना के विलाप ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद 90 फुट ऊंचे मेघनाद के पुतले का आतिशी धमाकों के बीच दहन किया गया। गुलाब और कमल के फूलों से लेकर आकाशी झरनों तक की आतिशबाजी ने दर्शकों का मन मोह लिया। अब मंगलवार को विजयादशमी पर 120 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा।https://todaynewstrack.com/2026/10/meghnad-vadh-agra-up-ramlila-ravan-dahan/
श्री रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित उत्तर भारत की प्रमुख श्रीरामलीला में मेघनाद वध का मंचन देखने के लिए रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में लोग जुटे। लीला के दौरान युद्ध के प्रसंग को मैदान में साकार किया गया। एक ओर भगवान राम और लक्ष्मण का रथ था, जबकि दूसरी ओर मेघनाद अपने रथ पर सवार होकर युद्धभूमि में पहुंचा।

दोनों पक्षों के बीच तीरों से प्रहार शुरू हुए। रथों के मैदान में घूमने और सैनिकों के आमने-सामने आने से युद्ध का दृश्य जीवंत हो उठा। अंत में लक्ष्मण ने भगवान राम का स्मरण करते हुए मेघनाद पर निर्णायक प्रहार किया। इसके साथ ही मेघनाद का अंत हो गया और मैदान जयकारों से गूंज उठा।
रावण के दरबार में पहुंचा कुंभकर्ण वध का समाचार
लीला का आरंभ रावण के दरबार में कुंभकर्ण के वध का समाचार पहुंचने से हुआ। भाई की मृत्यु की खबर सुनकर रावण व्यथित हो उठा। इसके बाद उसने अपने पराक्रमी पुत्र मेघनाद को युद्धभूमि में जाने का आदेश दिया। पिता की आज्ञा मिलने पर मेघनाद युद्ध के लिए निकल पड़ा। मंच पर प्रसंग के मंचन के बाद रामलीला मैदान में रामदल और रावण दल के बीच युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया।http://lakshman-meghnad-vadh-agra-up-ravan-vadh
मैदान में भगवान राम और लक्ष्मण का रथ एक ओर था तो दूसरी ओर मेघनाद का रथ। दोनों योद्धाओं ने एक-दूसरे पर तीरों से प्रहार किए। रामदल और रावण दल के सैनिक भी आमने-सामने आ गए। रथ मैदान में चक्कर लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। युद्ध के इस दृश्य को देखने के लिए मौजूद दर्शक हर घटनाक्रम पर नजर लगाए रहे। कुछ देर बाद दोनों सेनाएं मध्यवर्ती चबूतरे पर पहुंचीं। यहां ढोल-ताशों की गूंज के बीच महासंग्राम और तेज हो गया।
लक्ष्मण के प्रहार से धराशायी हुआ मेघनाद
युद्ध के दौरान लक्ष्मण और मेघनाद के बीच लगातार प्रहार होते रहे। दोनों ओर से युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया गया। अंततः लक्ष्मण ने भगवान राम का स्मरण कर मेघनाद पर निर्णायक प्रहार किया। प्रहार लगते ही मेघनाद धराशायी हो गया और उसका शीश रामदल के सामने जा गिरा। http://meghnad-vadh-agra-up-vijayadashami-ravan-dahan
मेघनाद के वध के साथ ही रामलीला मैदान में जय श्रीराम और जय लक्ष्मण के जयघोष गूंजने लगे। बैंड-बाजों ने विजय की धुन बजाई। आतिशी धमाकों के बीच दर्शकों ने जयकारे लगाकर विजय के प्रसंग का स्वागत किया।
युद्ध के इस दृश्य में रथों की आवाजाही, सैनिकों का आमना-सामना और ढोल-ताशों की गूंज ने दर्शकों को बांधे रखा। मेघनाद के धराशायी होते ही युद्ध का दृश्य विजय के उत्साह में बदल गया। मैदान में मौजूद लोगों ने जयकारे लगाकर लीला के इस प्रसंग पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
सुलोचना के विलाप ने दर्शकों को किया भावुक
मेघनाद का शीश रामदल के सामने गिरने के बाद लीला में सुलोचना का मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। सुलोचना भगवान राम के पास पहुंची और अपने पति का शीश लेकर विलाप करने लगी। पति के वियोग में उसका करुण क्रंदन देखकर दर्शक भावुक हो उठे।
युद्ध के रोमांच और जयकारों के बीच सुलोचना के विलाप ने माहौल को गमगीन कर दिया। कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं। इस प्रसंग ने मेघनाद वध की लीला में युद्ध के बाद का भावनात्मक पक्ष भी सामने रखा।http://meghnad-vadh-agra-up-ram-ravan-yudh-ramlila
90 फुट ऊंचे पुतले का आतिशी धमाकों के बीच दहन
मेघनाद वध की लीला के बाद रामलीला मैदान में स्थापित लगभग 90 फुट ऊंचे मेघनाद के पुतले का दहन किया गया। पुतले में लगी आतिशबाजी एक के बाद एक फूटने लगी। तेज धमाकों और रोशनी के बीच विशाल पुतला जलकर राख हो गया। इस दौरान मैदान में मौजूद दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। पुतला दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मैदान में मौजूद रहे।
गुलाब-कमल के फूलों से लेकर आकाशी झरनों तक की आतिशबाजी
मेघनाद के पुतला दहन से पहले रामलीला मैदान में आकर्षक आतिशबाजी की गई। आतिशबाजी के माध्यम से गुलाब और कमल के फूलों के दृश्य प्रस्तुत किए गए। आकाशी झरनों ने भी आसमान को रोशन किया। इसके साथ ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के युद्ध से जुड़े दृश्य भी आतिशबाजी के माध्यम से प्रदर्शित किए गए।
रंग-बिरंगी रोशनी से आसमान जगमगा उठा। दर्शकों ने तालियां बजाकर आतिशबाजी का आनंद लिया। पुतला दहन और आतिशबाजी के दौरान मैदान में उत्साह का माहौल रहा।
इन लोगों ने संभाला युद्ध का संचालन
रामलीला मैदान में युद्ध के संचालन की जिम्मेदारी मुकेश जौहरी, प्रकाश चंद, प्रवीण स्वरूप, आनंद मंगल, अंजुल बंसल, मनोज अग्रवाल, रामांशु शर्मा, आयुष अग्रवाल और राम राहुल शर्मा ने संभाली। इनके संचालन में युद्ध के प्रसंग को मैदान में प्रस्तुत किया गया।
आज विजयादशमी पर होगा रावण वध
श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और महामंत्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार शाम सात बजे से राम और रावण के बीच युद्ध की लीला का मंचन किया जाएगा। इसके बाद रामलीला मैदान में भव्य आतिशबाजी होगी।
आतिशबाजी का मुकाबला सुरील के अजय और पीलीभीत के शमशाद के बीच होगा। यह मुकाबला श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। धरती पर आतिशी झरनों के साथ आसमान को रोशन करने वाले धमाके भी आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करेंगे।
रामलीला कमेटी के मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि विजयादशमी पर दशानन के लगभग 120 फुट ऊंचे पुतले का दहन किया जाएगा। पुतले की नाभि से अमृत की वर्षा और दशानन की चमचमाती चंद्रहास का दृश्य भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। रावण वध और पुतला दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर पूर्व मंत्री चौधरी उदयभान सिंह, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, ताराचंद, भगवान दास बंसल, विजय प्रकाश गोयल, मुकेश जौहरी, आयुष, विनोद जौहरी, प्रवीण गर्ग, विष्णु दयाल, प्रकाश चंद्र, संजय तिवारी, राहुल गौतम और महावीर मंगल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
