आगरा। खंदौली के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में छात्राओं को पॉक्सो एक्ट, बाल सुरक्षा, गुड टच-बैड टच और कानूनी सहायता के बारे में जानकारी दी गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में बालिकाओं को हेल्पलाइन नंबरों और शोषण की स्थिति में शिकायत करने की प्रक्रिया बताई गई। साथ ही ‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0’ की जानकारी देकर बताया गया कि विभिन्न प्रकार के विवादों का निस्तारण मध्यस्थता के माध्यम से निःशुल्क, शीघ्र और सौहार्दपूर्ण तरीके से कराया जा सकता है।
आज माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आगरा के निर्देशन में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, खंदौली में विधिक जागरूकता एवं पॉक्सो एक्ट जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। https://www.hindustantimes.com/india-news/
कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आगरा के पूर्णकालिक सचिव पंकज कुमार-I के माध्यम से किया गया। इसमें छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों और जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया।

कार्यक्रम में एत्मादपुर की नायब तहसीलदार दिशा सिंह, विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. प्रीति यादव और समस्त शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी प्रतिभाग किया। अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग से संबंधित योजनाओं की जानकारी छात्राओं को दी।
इसमें बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, किशोरी स्वास्थ्य योजना, छात्रवृत्ति योजना और बाल सुरक्षा योजनाएं प्रमुख रूप से शामिल रहीं। छात्राओं को इन योजनाओं के उद्देश्य और उनसे मिलने वाले लाभों के बारे में बताया गया, ताकि वे जरूरत पड़ने पर संबंधित योजनाओं का लाभ उठा सकें।
पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों की दी जानकारी
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पंकज कुमार-I ने छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम, 2012 के बारे में जानकारी दी। पॉक्सो का पूरा नाम प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट है।
यह कानून बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। छात्राओं को बताया गया कि इस कानून के अंतर्गत बच्चों के विरुद्ध होने वाले लैंगिक अपराधों से संबंधित प्रावधान हैं। किसी भी प्रकार के शोषण की स्थिति में चुप रहने के बजाय उचित माध्यम से शिकायत करना जरूरी है।
छात्राओं को गुड टच और बैड टच के बीच अंतर भी समझाया गया। उन्हें बताया गया कि अपने शरीर की सुरक्षा को लेकर जागरूक रहना और किसी असहज स्थिति को पहचानना महत्वपूर्ण है। यदि किसी का व्यवहार अनुचित लगे या कोई व्यक्ति गलत तरीके से छूने का प्रयास करे, तो इसकी जानकारी भरोसेमंद व्यक्ति, अभिभावक, शिक्षक या संबंधित अधिकारी को देनी चाहिए। किसी भी तरह के शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में शिकायत करने के लिए उपलब्ध कानूनी व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी गई।https://indianexpress.com/section/india/
कार्यक्रम में छात्राओं को अलग-अलग परिस्थितियों में सहायता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर बताए गए। इनमें बच्चों की सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, आपातकालीन सेवा के लिए 112 और विधिक सहायता के लिए 15100 शामिल हैं।
सचिव ने इन नंबरों के उपयोग के बारे में बताते हुए समझाया कि जरूरत पड़ने पर इनकी मदद ली जा सकती है। छात्राओं को यह भी बताया गया कि किसी घटना की शिकायत किस प्रकार की जा सकती है और सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित व्यवस्था से कैसे संपर्क किया जा सकता है।
सरकारी योजनाओं से भी कराया परिचित
कार्यक्रम में स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बालिकाओं के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी दी। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के माध्यम से बालिकाओं के संरक्षण, शिक्षा और सशक्तीकरण से जुड़े प्रयासों के बारे में बताया गया।
किशोरी स्वास्थ्य योजना के तहत किशोरियों के स्वास्थ्य से संबंधित विषयों पर जानकारी दी गई। छात्रवृत्ति योजनाओं के बारे में बताते हुए छात्राओं को शिक्षा के लिए उपलब्ध सहायता की जानकारी दी गई। बाल सुरक्षा योजनाओं के संबंध में भी बताया गया कि जरूरतमंद बालिकाएं और बच्चे संबंधित विभागों के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
अधिकारियों ने छात्राओं को योजनाओं के प्रति जागरूक रहने और पात्रता के अनुसार उनका लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में शिक्षिकाओं और संबंधित विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी के माध्यम से बालिकाओं को कानूनी अधिकारों के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई।
मध्यस्थता से विवादों का निस्तारण कराने की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आगरा के सचिव पंकज कुमार-I ने ‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0’ के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने उपस्थित छात्राओं, शिक्षिकाओं और अधिकारियों को बताया कि उच्च न्यायालय मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ की ओर से यह अभियान एक अगस्त 2026 से 30 सितंबर 2026 तक संचालित किया गया।
इस अभियान का उद्देश्य ऐसे उपयुक्त विवादों का मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारण कराना है, जिनमें संबंधित पक्ष आपसी बातचीत और सहमति से समाधान तक पहुंच सकते हैं। मध्यस्थता के जरिए विवादों को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया जाता है। इससे पक्षकारों को अपने विवाद का समाधान खोजने का अवसर मिलता है।
अभियान के अंतर्गत वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा से संबंधित मामले, चेक बाउंस यानी परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के मामले, वाणिज्यिक विवाद और सेवा विवाद शामिल हैं। इसके अलावा शमनीय आपराधिक मामले, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली, संपत्ति के बंटवारे, बेदखली, भूमि अधिग्रहण और अन्य उपयुक्त सिविल मामलों का निस्तारण भी मध्यस्थता के माध्यम से कराया जा सकता है।
सचिव ने बताया कि मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का समाधान निःशुल्क, शीघ्र और सौहार्दपूर्ण तरीके से कराने का प्रयास किया जाता है। इस प्रक्रिया में संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने और आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का अवसर मिलता है। ऐसे मामलों में जहां मध्यस्थता के माध्यम से समाधान संभव हो, वहां यह प्रक्रिया विवाद के निस्तारण का एक उपयोगी विकल्प बन सकती है।
न्यायालय या विधिक सेवा प्राधिकरण में कर सकते हैं संपर्क
‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0’ का लाभ लेने के संबंध में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि अपने लंबित वाद का निस्तारण मध्यस्थता के माध्यम से कराने के इच्छुक पक्षकार संबंधित न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आगरा या संबंधित तहसील विधिक सेवा समिति से संपर्क करके भी अभियान के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा सकती है और नियमानुसार इसका लाभ लिया जा सकता है।
कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि मध्यस्थता की प्रक्रिया सफल नहीं होती है, तो इसका संबंधित मुकदमे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। यानी मध्यस्थता के माध्यम से विवाद का समाधान नहीं निकलने की स्थिति में पक्षकार के मुकदमे पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। इस जानकारी का उद्देश्य लोगों को मध्यस्थता की प्रक्रिया के प्रति जागरूक करना और उपयुक्त मामलों में इसके माध्यम से समाधान का अवसर उपलब्ध कराना था।https://www.indiatoday.in/india
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, खंदौली में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम, बाल सुरक्षा, कानूनी सहायता और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। वहीं, उपस्थित शिक्षिकाओं और अधिकारियों को मध्यस्थता अभियान के उद्देश्य तथा विवादों के निस्तारण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में कानून और उपलब्ध सहायता व्यवस्थाओं की जानकारी को बालिकाओं तक पहुंचाने पर जोर दिया गया, ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सकें और जरूरत पड़ने पर सही माध्यम से मदद ले सकें।
