आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस छलेसर परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड पैरामेडिकल साइंसेज एवं डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज की ओर से प्रभावी संचार कौशल पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के डीन फैकल्टी ऑफ एजुकेशन प्रो. एन.पी.एस. चंदेल ने छात्रों को बताया कि संवाद केवल बोलने तक सीमित नहीं है। शब्दों के साथ आवाज का उतार-चढ़ाव, चेहरे के भाव, आंखों का व्यवहार, शरीर की गतिविधियां और समय का सही उपयोग भी प्रभावी संचार का हिस्सा हैं। फार्मेसी के छात्रों के लिए इन कौशलों को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में मरीजों और अन्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ बेहतर समन्वय के लिए स्पष्ट और सहज संवाद की आवश्यकता समझाई।
प्रभावी संवाद के पहलुओं पर व्याख्यान
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम का विषय “Barrier, Prospective & Elements of Communication Skills” रहा। मुख्य वक्ता प्रो. एन.पी.एस. चंदेल ने छात्रों को संचार कौशल की मूल अवधारणा से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति की बात को सामने वाले तक सही अर्थ में पहुंचाने के लिए संवाद का तरीका स्पष्ट और प्रभावी होना जरूरी है। केवल जानकारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सही शब्दों और उचित तरीके से सामने रखना भी जरूरी है।
उन्होंने छात्रों को संचार के विभिन्न तत्वों की जानकारी देते हुए बताया कि बातचीत के दौरान बोलने का तरीका सामने वाले पर सीधा प्रभाव डालता है। आवाज, टोन, पिच और रिदम जैसे पहलू किसी भी बातचीत के अर्थ और प्रभाव को बदल सकते हैं। इसलिए संवाद करते समय शब्दों के चयन के साथ आवाज के इस्तेमाल पर भी ध्यान देना जरूरी है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में संचार की अहम भूमिका
प्रो. चंदेल ने फार्मेसी के छात्रों के लिए संचार कौशल को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र फार्मासिस्ट के रूप में काम करेंगे और उन्हें चिकित्सकों, नर्सों तथा स्वास्थ्य सेवा से जुड़े अन्य लोगों के साथ समन्वय करना होगा। इसके अलावा मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत के दौरान भी सही तरीके से अपनी बात रखना जरूरी होगा।
उन्होंने छात्रों को समझाया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किसी जानकारी को गलत तरीके से समझे जाने की गुंजाइश कम होनी चाहिए। ऐसे में स्पष्ट भाषा, ध्यान से सुनना और सहज तरीके से अपनी बात रखना महत्वपूर्ण है। प्रभावी संवाद से कार्यस्थल पर आपसी समन्वय बेहतर हो सकता है और जानकारी को सही व्यक्ति तक सही तरीके से पहुंचाने में मदद मिलती है।
मौखिक संचार में आवाज भी महत्वपूर्ण
व्याख्यान के दौरान मौखिक और गैर मौखिक संचार के बीच अंतर भी समझाया गया। प्रो. चंदेल ने कहा कि मौखिक संचार में केवल शब्दों का महत्व नहीं होता। व्यक्ति किस आवाज में बोल रहा है, उसकी टोन कैसी है, पिच कितनी है और बोलने की रिदम कैसी है, ये सभी बातें संवाद को प्रभावी बनाने में भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने छात्रों को बताया कि बातचीत में शब्दों को इस तरह प्रस्तुत किया जाना चाहिए कि सामने वाला उन्हें आसानी से समझ सके। बहुत तेज बोलना, आवाज में अनावश्यक उतार-चढ़ाव या बात को अस्पष्ट तरीके से रखना संवाद के उद्देश्य को प्रभावित कर सकता है। वहीं सहज, स्पष्ट और संतुलित तरीके से कही गई बात अधिक प्रभावी ढंग से सामने तक पहुंचती है।
चेहरे के भाव और आंखों की गतिविधि भी संवाद का हिस्सा
गैर मौखिक संचार के विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रो. चंदेल ने बताया कि व्यक्ति बिना कुछ कहे भी अपने चेहरे के भाव और शरीर की गतिविधियों से बहुत कुछ व्यक्त करता है। चेहरे के भाव, आंखों की गतिविधि और नजरों का व्यवहार बातचीत के दौरान सामने वाले तक अलग-अलग संकेत पहुंचाते हैं।
उन्होंने सिर और हाथों की गतिविधियों को भी गैर मौखिक संचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। किसी व्यक्ति के बोलने के तरीके के साथ उसके हाव-भाव भी उसकी बात को समझने में भूमिका निभाते हैं। इसलिए प्रभावी संवाद के लिए शब्दों के साथ शरीर की भाषा को समझना भी आवश्यक है।
Kinesics से लेकर Chronemics तक समझाया
प्रो. चंदेल ने छात्रों को संचार से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी भी दी। उन्होंने Kinesics के बारे में बताते हुए शरीर की गतिविधियों और हाव-भाव की भूमिका समझाई। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान शरीर की गतिविधियां कई बार बिना शब्दों के भी भाव और विचार व्यक्त करती हैं।
Haptics के माध्यम से स्पर्श से होने वाले संचार के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि संवाद के विभिन्न संदर्भों में स्पर्श भी एक तरह का संचार हो सकता है और इसके सामाजिक तथा व्यावहारिक पहलुओं को समझना जरूरी है।
Artifacts के अंतर्गत पहनावे और बाहरी रूप-रंग से व्यक्त होने वाले संदेशों की जानकारी दी गई। उन्होंने समझाया कि व्यक्ति की वेशभूषा और उसका प्रस्तुतिकरण भी उसके बारे में एक धारणा बनाने में भूमिका निभाता है।
इसी क्रम में Chronemics के अंतर्गत समय के उपयोग और समय प्रबंधन के बारे में छात्रों को बताया गया। उन्होंने समझाया कि समय का सही इस्तेमाल भी प्रभावी संचार और पेशेवर व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
संचार में आने वाली बाधाओं पर भी चर्चा
व्याख्यान में मौखिक संचार के दौरान आने वाली विभिन्न समस्याओं और प्रभावी संवाद की राह में आने वाली बाधाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। प्रो. चंदेल ने छात्रों को बताया कि बातचीत के दौरान कई कारणों से संदेश का सही अर्थ सामने वाले तक नहीं पहुंच पाता। ऐसी स्थिति में संवाद का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने छात्रों को संवाद करते समय बात को स्पष्ट रखने, सामने वाले की बात ध्यान से समझने और परिस्थितियों के अनुसार अपनी भाषा व व्यवहार को रखने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि संचार कौशल केवल कक्षा या परीक्षा तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि आगे के व्यावसायिक जीवन में भी इसकी लगातार जरूरत पड़ेगी।
छात्रों के लिए व्यावहारिक सीख
कार्यक्रम में छात्रों ने संचार कौशल से जुड़े विभिन्न पहलुओं को व्यावहारिक दृष्टि से समझा। व्याख्यान के माध्यम से उन्हें यह जानने का अवसर मिला कि किसी बात को सही तरीके से कहने के साथ-साथ उसे सुनना और समझना भी प्रभावी संवाद का हिस्सा है। खासकर फार्मेसी जैसे स्वास्थ्य सेवा से जुड़े क्षेत्र में मरीजों, चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ संवाद करते समय इन बातों का ध्यान रखना उपयोगी रहेगा।
व्याख्यान में संचार के मौखिक और गैर मौखिक दोनों पक्षों को शामिल किए जाने से छात्रों को संवाद के व्यापक स्वरूप की जानकारी मिली। आवाज, टोन, पिच और रिदम से लेकर चेहरे के भाव, आंखों की गतिविधि, हाथों और सिर की गतिविधियों तथा समय प्रबंधन तक विभिन्न पहलुओं को एक साथ समझाया गया।
फार्मेसी विभाग ने किया संयोजन
फार्मेसी विभागाध्यक्ष डॉ. रवि शेखर के नेतृत्व में कार्यक्रम का संयोजन डॉ. प्रतिभा मिश्रा ने किया। कार्यक्रम के समन्वयक के रूप में डॉ. अभिलाष सिंह, शिवाली ढिकोनिया, अंजलि चौहान और राशि कुलश्रेष्ठ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन के दौरान छात्रों की भागीदारी रही और वक्ता ने संचार कौशल से जुड़े विषयों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
शिक्षकों और छात्रों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में प्रो. ब्रजेश कुमार तिवारी, डॉ. प्रतिभा मिश्रा, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, डॉ. अरिंजय जैन, राशि कुलश्रेष्ठ, मुकुल यादव, अंजलि चौहान और शिवाली ढिकोनिया सहित सभी छात्र उपस्थित रहे। व्याख्यान के दौरान छात्रों ने संचार कौशल के विभिन्न पहलुओं को समझा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में इसके महत्व की जानकारी हासिल की।http://From Voice to Eye Contact, Students Learn the Complete Art of Effective Communication
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को प्रभावी संवाद के विभिन्न तरीकों से परिचित कराना रहा। इसमें मौखिक संचार से लेकर गैर मौखिक संचार, शरीर की गतिविधियों, चेहरे के भाव, नजरों के व्यवहार, समय के उपयोग और संवाद में आने वाली बाधाओं तक कई पहलुओं को शामिल किया गया। इससे छात्रों को अपने शैक्षणिक जीवन के साथ आगे के पेशेवर जीवन में भी बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए जरूरी बिंदुओं की जानकारी मिली।

