स्थानीय भाषा में पढ़ाई, डिजिटल संसाधनों और अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन पर जोर
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि जुटे
विकसित भारत @ 2047 के लिए शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर मंथन
आगरा। बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए शिक्षकों को उनकी जरूरत, सीखने की गति और पारिवारिक परिस्थितियों को समझना होगा। स्थानीय भाषा में शिक्षण, बुनियादी भाषा और गणित की समझ, डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल तथा अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को आगरा में दो दिवसीय नेशनल कॉन्क्लेव-2026 का शुभारंभ करते हुए कहा कि शिक्षा में परिवर्तन का वास्तविक आधार शिक्षक का सशक्तिकरण, व्यावसायिक दक्षता और निरंतर विकास है।https://todaynewstrack.com/2026/10/agra_nep_2020_national_conclave_anandiben_patel_teacher_education_up_news/
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई), नई दिल्ली और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में 27 और 28 अक्टूबर को जेपी सभागार में कॉन्क्लेव आयोजित किया जा रहा है। इसमें नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा अधिकारियों, शिक्षकों, प्रोफेसरों और शिक्षाविदों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, एनसीटीई के चेयरमैन पंकज अरोरा और संस्कृति प्रमोशन फाउंडेशन के प्रो. चांद किरण सलूजा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर कॉन्क्लेव का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम और सरस्वती वंदना के गायन से हुई। इसके बाद अतिथियों का पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया गया।
कॉन्क्लेव का विषय ‘Capacity Building of Stakeholders for Nationwide Roll-out of PUSHTI (NPST) & MITRA (NMM)’ है। इसका उद्देश्य शिक्षकों की गुणवत्ता सुधारना, उनके निरंतर व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन के माध्यम से अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।

इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों तथा शिक्षा से जुड़े हितधारकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसका लक्ष्य विकसित भारत @ 2047 की परिकल्पना को कक्षाओं के स्तर पर मजबूत करना है।
कॉन्क्लेव में उत्तरी क्षेत्र के नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
इसमें एसीआरटी, डायट, नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय संगठन और सीबीएसई से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ प्रोफेसर तथा शिक्षाविद शामिल हैं। दो दिवसीय आयोजन में शिक्षक प्रशिक्षण, व्यावसायिक दक्षता, तकनीकी शिक्षा और मेंटरशिप से जुड़े विषयों पर विचार किया जा रहा है।

शिक्षक का सशक्तिकरण ही शिक्षा में बदलाव का आधार
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में परिकल्पित पीयूएसएचटीआई (PUSHTI), यानी शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक (NPST), उनकी व्यावसायिकता, मूल्यों और सतत विकास को स्पष्ट दिशा प्रदान करता है।
वहीं, मित्रा (MITRA), यानी राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन (NMM), के तहत देश के अनुभवी और नवाचारी शिक्षकों को मेंटर के रूप में जोड़कर दूसरे शिक्षकों को निरंतर मार्गदर्शन देने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसका मूल उद्देश्य शिक्षकों के अनुभव को शिक्षा व्यवस्था की सामूहिक पूंजी बनाना है।
उन्होंने कहा कि एनसीटीई की ओर से नवाचार, नैतिक मूल्यों और तकनीक पर आधारित शिक्षक प्रशिक्षण की शुरुआत की गई है। यह प्रसन्नता की बात है कि शिक्षकों को बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि देश की विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी व्यवस्थाओं में से एक है। इसमें लगभग एक करोड़ तीन लाख से अधिक शिक्षक हैं। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या प्रत्येक शिक्षक अपने विद्यार्थियों की जरूरत, उनकी सीखने की शैली और तकनीक के अनुरूप स्वयं को विकसित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यहीं पर एनसीटीई की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए तैयार करने से विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा।
स्थानीय भाषा में पढ़ाई से बच्चों को मिलेगी मदद
आनंदीबेन पटेल ने प्रारंभिक कक्षाओं में भाषा और गणित की बुनियादी समझ मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को उनकी स्थानीय भाषा में पढ़ाने से विषयों को समझने में मदद मिलती है।
उन्होंने शिक्षक डायरी लिखने की परंपरा को फिर से अपनाने की जरूरत बताई। इससे शिक्षक पढ़ाई की प्रक्रिया और विद्यार्थियों की प्रगति को समझ सकते हैं।

राज्यपाल ने बाजार से तैयार प्रोजेक्ट खरीदकर जमा कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वयं करके सीखने के अवसर दिए जाने चाहिए, जिससे उनकी समझ और रचनात्मक क्षमता विकसित हो सके।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की गति अलग होती है। कोई बच्चा जल्दी सीखता है तो किसी को अधिक समय लगता है। शिक्षकों को इसी अंतर को समझकर पढ़ाने के तरीके अपनाने चाहिए।
बच्चों को रोचक तरीके से पढ़ाने के लिए तकनीक और नवाचार का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इससे विषयों को सरल बनाया जा सकता है और विद्यार्थियों की सीखने में रुचि बढ़ाई जा सकती है।http://agra-up-news-national-conclave-2026-anandiben-patel-nep-education
बच्चों के व्यवहार के पीछे की वजह भी समझें शिक्षक
राज्यपाल ने शिक्षकों को विद्यार्थियों की पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों को समझने की जरूरत बताई। उन्होंने एक बच्ची का उदाहरण देते हुए कहा कि वह कक्षा में आती थी और रोते हुए बाहर चली जाती थी।

बाद में पता चला कि उसके माता-पिता खेतों में काम करने चले जाते थे और भाई के देहांत के कारण वह अकेली पड़ गई थी। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे बच्चों की परेशानी समझने के लिए शिक्षक को उनके पास जाकर बातचीत करनी होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल कक्षा में पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं है। बच्चों के व्यवहार, उनकी परिस्थितियों और भावनात्मक जरूरतों को समझना भी जरूरी है।
एक अन्य अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि मंच संचालन के लिए बेटियों को अवसर दिया गया तो उन्होंने बहुत अच्छा संचालन करके दिखाया। इससे स्पष्ट होता है कि बच्चों को अवसर देने पर उनकी प्रतिभा सामने आती है।
राज्यपाल ने शिक्षकों से विद्यार्थियों की क्षमताओं को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ने का मौका देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रोत्साहित करने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है।

गुजरात में सरल भाषा पद्धति से दस दिन में सीखने लगे बच्चे
आनंदीबेन पटेल ने गुजरात में प्राथमिक शिक्षा में सुधार के लिए किए गए प्रयासों के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वहां बच्चों को पढ़ाने के लिए सरल भाषा पद्धति शुरू की गई, जिससे बच्चे दस दिन में ही सीखने लगे।
उन्होंने शिक्षकों की कमी और रिक्त पदों की समस्या का उल्लेख करते हुए बताया कि तबादलों में मेरिट और सेवा अवधि को आधार बनाया गया। स्कूल नहीं जाने वाले शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की गई और ट्यूशन संस्कृति पर रोक लगाई गई।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा में सुधार के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक स्थिति का आकलन करने, आंकड़े जुटाने और उनके आधार पर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पहले समाज में बेटियों की शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता था। उनकी शिक्षा के अवसर सीमित थे। बड़ौदा के सयाजीराव और भावनगर के राजा ने प्रगतिशील निर्णय लेकर महिला शिक्षा को अनिवार्य किया था।

उन्होंने कहा कि महिला शिक्षा के मामले में केवल सोचने या देखने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए ठोस प्रयास करने होंगे और आंकड़ों के आधार पर सुधार की दिशा तय करनी होगी।
राज्यपाल ने 50 वर्ष से कम आयु के शिक्षकों से शिक्षा के इतिहास को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को यह जानना चाहिए कि देश में शिक्षा की स्थिति किस तरह बदली है और महिला शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए पहले क्या प्रयास किए गए।
एआई, स्मार्ट क्लास और डिजिटल सामग्री का हो जिम्मेदारी से इस्तेमाल
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के साथ सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां भी अलग-अलग हैं। ऐसे में तकनीक का उपयोग शिक्षा से जुड़ी भौगोलिक दूरियों को कम करने में मदद कर सकता है।
उन्होंने कहा कि तकनीक उपलब्ध होने पर भौगोलिक दूरी ज्ञान की दूरी नहीं बननी चाहिए। इसके लिए शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑनलाइन शिक्षण सामग्री तैयार करने और डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण देना जरूरी है।http://agra-national-conclave-2026-nep-2020-teacher-training-up-news
शिक्षकों को स्मार्ट क्लास और ऑनलाइन शिक्षण सामग्री का प्रभावी तथा उत्तरदायी उपयोग करने में सक्षम बनाया जाना चाहिए। तकनीक का उद्देश्य केवल संसाधन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना होना चाहिए।
आनंदीबेन पटेल ने अनुभवी शिक्षकों को मेंटर बनाकर अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को स्वयं भी लगातार सीखना चाहिए और अपनी व्यावसायिक दक्षता बढ़ानी चाहिए।
उन्होंने शिक्षक संगठनों से शिक्षा की उन्नति और उसके स्तर को ऊंचा करने में सहयोग देने का आह्वान किया। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शिक्षकों, संगठनों और संबंधित संस्थाओं की भागीदारी जरूरी है।
मित्रा पोर्टल और एप से मिलेगा मार्गदर्शन
राज्यपाल ने मित्रा डिजिटल पोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन को तकनीक तथा मानवीय संवेदना से जोड़ने का सार्थक प्रयास बताया। इसके माध्यम से अनुभवी शिक्षकों के ज्ञान और अनुभव का लाभ दूसरे शिक्षकों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस पहल का संदेश है कि ज्ञान की कोई सीमा नहीं है, अनुभव की कोई आयु नहीं और सीखने की कोई अंतिम अवस्था नहीं। शिक्षकों को अपने अनुभव साझा करने और दूसरों से सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में परिकल्पित एनईटीएफ और एसएसएसए विद्यालयी शिक्षा में न्यूनतम गुणवत्ता मानक, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है और शिक्षक उस पूंजी के निर्माता हैं। शिक्षा अधिकार भी हो, अवसर भी हो, संस्कार भी हो और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम भी बने।
उन्होंने दो दिवसीय नेशनल कॉन्क्लेव के साथ मित्रा डिजिटल पोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन के सफल संचालन के लिए शुभकामनाएं दीं।
आगरा में आयोजन की पहल पर राज्यपाल ने बताई वजह
आनंदीबेन पटेल ने बताया कि कॉन्क्लेव को पहले लखनऊ में आयोजित करने पर विचार किया गया था। हालांकि, लखनऊ विश्वविद्यालय और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के साथ लंबे समय तक काम करने के अपने अनुभव को देखते हुए उन्होंने आगरा में कार्यक्रम आयोजित करने की पहल की।
उन्होंने कहा कि उनकी पहल पर आगरा विश्वविद्यालय में यह कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई। इससे पहले कानपुर विश्वविद्यालय में एआई पर मंथन हुआ था और नवंबर में प्रयागराज में कॉन्क्लेव प्रस्तावित है।
इन आयोजनों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में तकनीक, शिक्षकों के प्रशिक्षण और नए शैक्षिक तरीकों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
मंथन से विकसित भारत के सपने को मिलेगी दिशा : योगेंद्र उपाध्याय
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि कॉन्क्लेव में नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एसीआरटी, डायट, नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय संगठन, सीबीएसई से जुड़े प्रतिनिधियों, प्रोफेसरों और शिक्षाविदों के बीच विचार-विमर्श हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जब-जब मंथन हुआ है, उससे अमृत निकला है और उसका वितरण समाज तक हुआ है। इस कॉन्क्लेव से निकलने वाले विचार विकसित भारत के सपने को साकार करने में मील का पत्थर साबित होंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि लॉर्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति व्यक्ति को मौलिकता, अपनी जड़ों और संस्कृति से दूर करती थी। इसके विपरीत नई शिक्षा नीति स्वामी विवेकानंद के दर्शन पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो नैतिकता प्रदान करे, ज्ञान-विज्ञान सिखाए, व्यक्ति को स्वावलंबी बनाए और अपनी संस्कृति से जोड़े। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को जीवन के लिए सक्षम बनाना भी है।
योगेंद्र उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेश में यूजीसी ग्रेड-वन के छह, ए-प्लस-प्लस ग्रेड के सात, ए-प्लस ग्रेड के दो सरकारी और सात निजी विश्वविद्यालय हैं।
एनसीटीई चेयरमैन ने बताया 25 करोड़ बच्चों का शैक्षिक नेटवर्क
एनसीटीई के चेयरमैन पंकज अरोरा ने पीयूएसएचटीआई (NPST) और मित्रा (NMM) के उद्देश्यों तथा कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह उत्तर भारत क्षेत्र का पहला कार्यक्रम है।
उन्होंने कहा कि देश में इस प्रकार के कॉन्क्लेव और गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। इनका उद्देश्य शिक्षा से जुड़े हितधारकों की क्षमता बढ़ाना और शिक्षकों को बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
पंकज अरोरा ने बताया कि देश में करीब 25 करोड़ बच्चों का शैक्षिक नेटवर्क है। उच्च शिक्षा में लगभग साढ़े चार करोड़ विद्यार्थी हैं, जिनमें 49.7 प्रतिशत महिला विद्यार्थी हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को समावेशी शिक्षा, तकनीकी दक्षता, क्षमता निर्माण और मूल्यों पर आधारित शिक्षक-प्रशिक्षण के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे शिक्षकों की व्यावसायिक क्षमता बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।
दूसरे सत्र में मित्रा मिशन पर तकनीकी चर्चा
कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में मित्रा यानी नेशनल मिशन फॉर मेंटरिंग पर तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न विषय विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने सहभागिता की।
दो दिवसीय आयोजन में शिक्षकों के प्रशिक्षण, अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन, डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार से जुड़े विषयों पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ शिक्षकों को निरंतर सीखने और अपने अनुभव साझा करने के अवसर उपलब्ध कराना है।
